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एक ताओवादी मंदिर एक ताओवादी मंदिर 

नैतिक संकट को दूर करने में ख्रीस्तीय एवं ताओवादी एक साथ

ख्रीस्तीय तथा ताओवादी विद्वानों ने सिंगापुर में आयोजित एक सभा में एक वक्तव्य जारी किया, जिसमें अभिसरण के 7 अंक थे।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

5 से 7 नवम्बर तक रखे गये इस ख्रीस्तीय-ताओवादी दूसरी संगोष्ठी की विषयवस्तु थी, "वार्ता में ख्रीस्तीय एवं ताओवादी नीति"। सिंगापुर, चीन, फ्राँस, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, स्वीटज़रलैंड, ताईवान तथा वाटिकन सिटी के 70 ख्रीस्तीय एवं ताओवादी प्रतिनिधियों ने संगोष्ठी में भाग लिया। संगोष्ठी के अंत में प्रतिभागियों ने एक अंतिम वक्तव्य जारी किया जिसमें अभिसरण के 7 बिन्दु हैं। 

वाटिकन द्वारा सिंगापुर एवं थाईलैंड में दो अंतरधार्मिक आयोजन

संगोष्ठी में आज की दुनिया में नैतिक संकट से संबंधित कई मुद्दों पर प्रकाश डाला गया। इसे सामाजिक संस्थानों, आध्यात्मिकता, वैश्विक नैतिकता, एक सामंजस्यपूर्ण समाज को बढ़ावा देने, और भावी ख्रीस्तीय-ताओवादी वार्ता के लिए संभावनाओं को देखा गया।

अभिसरण के बिन्दु

वक्तव्य में अनुबंध के सात अंक सूचीबद्ध हैं। पहला, यह स्वीकार किया जाता है कि संगोष्ठी ने मित्रता के बंधन को मजबूत किया। दूसरा, दोनों समुदाय चिंताओं और उम्मीदों को साझा करते हैं और "अच्छा करने और बुराई से बचने के लिए सामान्य बुनियादी शिक्षा की पुष्टि करते हैं। वे मानते हैं कि आज के नैतिक संकट के लिए बुनियादी सार्वभौमिक मूल्यों की पुनःखोज की आवश्यकता है, जिसे वे मानते हैं कि दोनों धार्मिक परंपराओं द्वारा सामना किया जा सकेगा। आध्यात्मिक और नैतिक विकास में  परिवार महत्वपूर्ण है जहाँ आज के युवा कल की दुनिया को, एक बेहतर स्थान बनाना सीखते है। यह  पारस्परिक एवं विद्वतापूर्ण आदान-प्रदान, वर्तमान एवं भावी-पीढ़ी के कल्याण हेतु आवश्यक नैतिक ढांचे को आकार देने" में सहयोग करने हेतु सहायक होता है। 

 

08 November 2018, 15:46