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भारत बलात्कार के विरोध में प्रदर्शन भारत बलात्कार के विरोध में प्रदर्शन   (AFP or licensors)

बाल बलात्कारियों के लिए मौत की सज़ा की पुष्टि

भारतीय संसद ने एक कानून पारित कर 12 वर्ष से कम उम्र की बच्चियों के बलात्कार के लिये मौत की सज़ा की अनुमति प्रदान कर दी है किन्तु काथलिक कलीसिया के अधिकारियों ने पूरे देश में बच्चों के खिलाफ यौन उत्पीड़न को रोकने के लिए इस कानून की प्रभावकारिता पर संदेह व्यक्त किया है।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

नई दिल्ली, शुक्रवार, 3 अगस्त 2018 (आयएएनएस): भारतीय संसद ने एक कानून पारित कर 12 वर्ष से कम उम्र की बच्चियों के बलात्कार के लिये मौत की सज़ा की अनुमति प्रदान कर दी है किन्तु काथलिक कलीसिया के अधिकारियों ने पूरे देश में बच्चों के खिलाफ यौन उत्पीड़न को रोकने के लिए इस कानून की प्रभावकारिता पर संदेह व्यक्त किया है.

जनवरी माह में कश्मीर में 8 साल की एक लड़की के बलात्कार तथा पूरे देश में अन्य भयानक मामलों पर राष्ट्रीय स्तर पर हुए विरोध के उपरान्त पारित, संसद का अध्यादेश, 21 अप्रैल को आपराधिक कानून में किए गए आपातकालीन संशोधन को प्रतिस्थापित करता है.

भारतीय दण्ड संहिता में बलात्कारियों के लिये सज़ा

भारत की दंड संहिता में बलात्कारियों के लिये सात साल की जेल का प्रावधान था किन्तु 12 से 16 साल की उम्र से कम लड़कियों के बलात्कार को दंडित करने के लिये कठोर दण्ड का प्रावधान नहीं था. ईाई 30 को अनुमोदित नये कानून में महिलाओं के बलात्कार के लिये न्यूनतम दण्ड को दस वर्ष के कठोर कारावास तक बढ़ा दिया गया है. इसके अतिरिक्त, 12 साल से कम उम्र की लड़कियों के गिरोह-बलात्कार के दोषी लोगों को या तो आजीवन कारावास या फिर सज़ा-ए-मौत प्रदान की जायेगी जबकि 16 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों के बलात्कार के लिये उम्र क़ैद का प्रावधान रहेगा.

30 जुलाई को अनुमोदित नये विधान के अनुसार नाबालिगों के विरुद्ध यौन दुराचार के मामलों पर जाँचपड़ताल एवं मुकद्दमा दो माहों के अन्तर्गत समाप्त हो जाना चाहिये और इन मामलों में ज़मानत का कोई प्रावधान नहीं है.  

पत्रकारों से गृह मामलों के मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि कानून का लक्ष्य बच्चों के विरुद्ध हिंसा पर रोक लगाना है.

आधिकारिक आँकड़े

भारत के आधिकारिक अपराधिक आँकड़ों के अनुसार सन् 2012 में भारत में बच्चों के बलात्कार के 8,541 मामले दर्ज़ किये गये थे जो सन् 2016 में 19,765 तक पहुँच गये हैं. बताया जाता है कि प्रतिदिन भारत में बच्चों के विरुद्ध 50 से अधिक बलात्कार होते हैं.

काथलिक कलीसिया

हालांकि, भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के महासचिव धर्माध्यक्ष थियोदोर मैसकेरेनस ने कहा कि अपराध कितना ही गम्भीर क्यों न हो काथलिक कलीसिया प्राणदण्ड को स्वीकार नहीं कर सकती. ऊका न्यूज़ से उन्होंने कहा, "काथलिक कलीसिया प्राणदण्ड के खिलाफ़ है तथापि, हम राष्ट्र के कानून का सम्मान करते हैं."     

सर्वोच्च न्यायालय की वकील सि. स्कारिया ने कहा, बलात्कार के मामले तब तक समाप्त नहीं होंगे जब तक अपराधियों को अपनी माँ-बहनों के सम्मान की शिक्षा नहीं दी जायेगी.

03 August 2018, 11:46