हेलसिंकी की भावना की पुनः बहाली का महाधर्माध्यक्ष ने किया आग्रह
वाटिकन सिटी
माल्टा, शुक्रवार, 6 दिसम्बर 2024 (रेई, वाटिकन रेडियो): यूरोप में सुरक्षा सम्बन्धी संगठन ओएससीई (ओशे) की 31वीं वार्षिक मंत्रिस्तरीय परिषद को संबोधित करते हुए राज्यों और अन्य संगठनों के साथ संबंधों के लिए वाटिकन सचिव महाधर्माध्यक्ष पौल गालाघार ने सदस्य देशों से मतभेदों से ऊपर उठने और "हेलसिंकी की भावना" में वर्तमान वैश्विक चुनौतियों का सामना करने के लिए सहयोगात्मक रूप से काम करने का आग्रह किया।
परमधर्मपीठ की “गहन चिंता”
यूरोप में सुरक्षा और सहयोग संगठन (ओएससीई) 2025 में अपनी स्थापना की 50वीं वर्षगांठ मनाने की तैयारी कर रहा है, महाधर्माध्यक्ष गालाघार ने सदस्य देशों के बीच बढ़ते विभाजन पर परमधर्मपीठ की “गहन चिंता” व्यक्त की और कहा, यह संगठन की “जड़ों” को अस्पष्ट कर रहा है और बढ़ती वैश्विक चुनौतियों के बीच इसके दैनिक काम को प्रभावित कर रहा है।
गुरुवार को उन्होंने कहा, "संगठन को बचाए रखना बहुत महत्वपूर्ण है, विशेष रूप से ऐसे समय में जब संवाद को बढ़ाना और तनावों को कम करना आवश्यक हो गया है।"
संस्थापक सिद्धांतों को कायम रखना
अपने वक्तव्य में, महाधर्माध्यक्ष गालाघार ने आज विश्व के सामने आने वाली नई चुनौतियों से निपटने के लिए 1975 के हेलसिंकी अंतिम अधिनियम के संस्थापक दस्तावेज में निहित ओएससीई (ओशे) के सिद्धांतों को कायम रखने के महत्व पर बल दिया।
उन्होंने स्मरण दिलाया कि शीत युद्ध के तनाव को कम करने के लिए निर्मित ऐतिहासिक हेलसिंकी समझौता इस समझ पर आधारित था कि “शांति का मतलब केवल युद्ध की अनुपस्थिति या शक्ति संतुलन बनाए रखना नहीं है, बल्कि यह मैत्रीपूर्ण संबंधों, रचनात्मक संवाद और राज्यों के बीच अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत दायित्वों को निभाने और सभी सार्वभौमिक मानवाधिकारों के सम्मान में सहयोग का फल है।”
महाधर्माध्यक्ष ने कहा कि हेलसिंकी की घोषणा के विपरीत आज ओएससीई के भीतर प्रक्रियात्मक आम सहमति की कमी के कारण यह दृष्टिकोण प्रभावित हो रहा है, लेकिन सबसे बढ़कर, कुछ भागीदार देशों के बीच आपसी विश्वास में कमी, वैचारिक आक्रामकता में वृद्धि और उन सिद्धांतों की घोर अवहेलना हो रही है।
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