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2024.10.08 धर्मसभा प्रेस ब्रीफिंग 2024.10.08 धर्मसभा प्रेस ब्रीफिंग  

सिनॉड ब्रिफिंग – 5वाँ दिन : युद्ध से पीड़ित लोगों के दर्द को गले लगाना

सिनॉड महासभा के 5वें दिन के प्रेस ब्रीफिंग से पता चला कि प्रतिभागियों ने शांति के लिए प्रार्थना और उपवास किया, सभा में इस्राएल पर हमास के क्रूर हमले की पहली वर्षगांठ और उसके बाद की तनाव में वृद्धि पर चर्चा हुई था, कलीसिया में महिलाओं की भूमिका पर प्रकाश डाला गया और सेतु निर्माण पर ध्यान केंद्रित किया गया।

वाटिकन सिटी

सोमवार को सुबह के सत्र में कुल 351 प्रतिभागी थे, जिसकी शुरूआत "प्रार्थना और 7 अक्टूबर के युद्ध के कारण मध्य पूर्व में लोगों की पीड़ा में दिल से सहभागी होकर की गई, जो नाटकीय रूप से प्रतीकात्मक दिन था।"

वाटिकन संचार विभाग के प्रीफेक्ट पाओलो रूफिनी ने पत्रकारों के लिए एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान इसकी घोषणा की। उन्होंने यह भी बताया कि पोप फ्राँसिस ने मध्य पूर्व में काथलिकों को "इस दुखद दिन" पर एक पत्र भेजा है।

इसके अलावा, डॉ. रूफ़िनी ने बताया कि कार्डिनल ग्रेच ने धर्मसभा के प्रतिभागियों को याद दिलाया कि पोप के अनुरोध पर, रविवार शाम को संत मरिया मेजर महागिरजाघर में शांति के लिए रोजरी प्रार्थना के बाद, सोमवार "प्रार्थना और उपवास का दिन" था। डॉ. रूफ़िनी ने बताया कि पोप के परोपकारी विभाग के अध्यक्ष कार्डिनल कोनराड क्राएस्की ने दोपहर से शुरू होनेवाले दान संग्रह प्रयास की घोषणा की। यह विशेष रूप से गज़ा में एकमात्र काथलिक पल्ली और उसके पुरोहित, फादर गाब्रिएल रोमानेली के लिए सहायता प्रदान करेगा, "जिन्हें पोप हर दिन पीड़ित लोगों के प्रति अपनी निकटता व्यक्त करने के लिए फोन करते हैं।"

रविवार को पोप द्वारा घोषित 21 नए कार्डिनल में से 9 इस पहल में भाग लेंगे। वे हैं: लुइस जेरार्दो कैबरेरा हेरेरा, तरचिसियो एसाओ किकुची, पाब्लो वर्जिलियो सियोंगको डेविड, लादिस्लाव नेमेत, जैमे स्पेंगलर, इग्नेस बेस्सी डोगबो, डोमिनिक मैथ्यू, रॉबेर्तो रेपोले और तिमोथी पीटर जोसेफ रेडक्लिफ।

सिनॉडल महासभा का कार्य

सूचना आयोग की सचिव शेइला पीरेस ने घोषणा करते हुए कहा, चौथी आमसभा मंगलवार को निर्धारित है।

उन्होंने कहा, “आंतरिक विनियमों के अनुच्छेद 13 के अनुसार, सभा अंतिम दस्तावेज़ की मसौदा समिति के लिए सदस्यों का चुनाव करने की योजना बना रही है। उसके बाद भाषा तालिकाओं से रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी।”

 पहले सप्ताह में अपनाए गए मॉडल का अनुसरण करते हुए, धर्मसभा के सदस्य चर्चा के लिए एजेंडे पर मतदान करेंगे, तथा दिन खुली चर्चा के साथ जारी रहेगा।

पीरेस ने बताया कि प्रेरितिक ईशशास्त्र पर पहले दो मंच बुधवार दोपहर को आयोजित किए जा रहे हैं, जिनके विषय हैं: "ईश्वर की प्रजा, मिशन की विषयवस्तु" और "धर्मसभा स्वरूप कलीसिया में धर्माध्यक्षों की भूमिका और अधिकार।" एशिया में धर्मसभा यात्रा चर्च को पुल बनाने चाहिए और खुद भी पुल बनना चाहिए। इसका मतलब है कि विविध संस्कृतियों और धर्मों पर ध्यान दिया जाना चाहिए, संवाद और धर्मसभा को बढ़ावा देना चाहिए।

एशिया में सिनॉडल यात्रा

मुम्बाई के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल ओसवाल्ड ग्रेसियस ने कहा कि कलीसिया को पुल बनाना चाहिए और खुद भी पुल बनना चाहिए। इसका मतलब है कि विविध संस्कृतियों और धर्मों पर ध्यान दिया जाना चाहिए, संवाद और धर्मसभा को बढ़ावा देना चाहिए।

वे सिनॉडल सचिवालय की महासमिति के सदस्य हैं, कार्डिनल्स की परिषद और पोप फ्राँसिस द्वारा कलीसिया के संचालन में सहायता के लिए अपने कार्यकाल की शुरुआत में स्थापित कार्य समूह के सदस्य भी हैं।

सोमवार की ब्रीफिंग के दौरान, कार्डिनल ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सिनॉडालिटी में आगे बढ़ने के लिए अंतर-सांस्कृतिकता की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि द्वितीय वाटिकन महासभा के बाद से, दूसरों के लिए स्वीकृति और सम्मान व्यापक रूप से स्थापित अवधारणाएँ बनी हैं।

कार्डिनल ग्रेसियस ने एशिया में धर्मसभा यात्रा का उदाहरण दिया, जहां 2022 में एक सभा ने उन विषयों पर चर्चा की थी जिन पर वर्तमान में धर्मसभा में चर्चा की जा रही है, तथा प्रेरितिक प्रथाओं को नवीनीकृत करने की आवश्यकता पर ध्यान दिया गया था।

दो मुख्य बिंदु थे काम करना और साथ मिलकर चलना। कार्डिनल ने समझाया कि विभिन्न स्थानीय संस्कृतियों वाले देशों में ईश्वर के राज्य का निर्माण करना आवश्यक है - लेकिन धर्मांतरण करके नहीं - विविधताओं को महत्व देते हुए। धारणाओं या अवधारणाओं को थोपने से बचने के लिए धर्मसभा स्वरूप कलीसिया का दृष्टिकोण आवश्यक है।

भाईचारे को बढ़ावा देना

एशिया में, सभाएँ 2023 तक जारी रहीं, जब दो सौ धर्माध्यक्ष धर्मों के प्रति सम्मान, लोकधर्मी आंदोलनों और प्रत्येक व्यक्ति के बपतिस्मा पर चर्चा करने के लिए एकत्र हुए।

कार्डिनल ग्रेसियस ने जोर देकर कहा कि अन्य धर्मों के साथ संबंधों के लिए सहयोग महत्वपूर्ण है, उन्होंने कहा कि कलीसिया "अब उन्हें अन्य धर्म नहीं कह सकता, बल्कि पड़ोसी धर्म कह सकता है।"

एशिया के धर्माध्यक्षों ने भी डिजिटल दुनिया के महत्व को स्वीकार किया और धर्मसभा को अपने काम की निरंतरता के रूप में देखा। कार्डिनल ने आगे कहा, "मुझे यकीन है कि चीजें बेहतर होंगी, और कलीसिया के लिए भाईचारा और प्यार बढ़ेगा।"

एक परिवार

ब्रीफिंग के दौरान, यूरोपीय धर्माध्यक्षीय सम्मेलन परिषद के अध्यक्ष और विलनियस के महाधर्माध्यक्ष गिंटारस ग्रुसास ने इस बात पर ध्यान केंद्रित किया कि सोमवार की सुबह धर्मसभा में विश्व शांति के लिए प्रार्थना और उपवास के दिन को कैसे उजागर किया गया।

उन्होंने बताया कि मध्य पूर्व और यूक्रेन जैसे देशों में युद्ध के प्रभाव से पीड़ित लोगों के साथ एकजुटता इस अनुभव को बढ़ावा देती है कि “हम सभी एक परिवार हैं जो शांति और एकता के लिए प्रार्थना करते हैं।” महाधर्माध्यक्ष ने कलीसियाओं के बीच संबंधों को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा, “बातचीत करना हमारा मिशन है।”

ध्यानपूर्वक सुनने की प्रवृत्ति में वृद्धि

इंटरनेशनल यूनियन ऑफ सुपीरियर्स जनरल (यूआईएसजी) की अध्यक्षा सिस्टर मेरी तेरेसा बैरन ने कहा कि एक-दूसरे को सुनना एक ऐसा कौशल है जो धर्मसभा में बढ़ रहा है।

उनका मानना ​​है कि एक-दूसरे को सुनने की क्षमता में सुधार हुआ है, जिससे दूसरों की मान्यताओं को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिली है। सुनने से लोग उन लोगों के करीब आते हैं जो बहिष्कृत और हाशिए पर हैं।

अपनी ओर से, यूआईएसजी ने एक धर्मसभा पहल के रूप में, धर्मसभा के लिए समर्पित एक कार्यालय की स्थापना की है, जिसमें एक अंतर-सांस्कृतिक समूह है जो बेहतर संबंध बनाने के लिए सुनने और संबंधों को प्राथमिकता देने पर केंद्रित है। सबसे बढ़कर, इसका उद्देश्य हाशिये पर रहनेवालों की मदद करना है, सिस्टर बैरन ने स्पष्ट किया, विशेष रूप से सीरिया, लेबनान, रूस, यूक्रेन, वियतनाम, म्यांमार और इंडोनेशिया में धर्मसभा की यात्रा को कैसे जारी रखा जाए, इस पर ध्यान केंद्रित किया।

उनसे पूछा गया कि आज कलीसिया में महिलाओं के लिए क्या स्थान हो सकता है, और उन्होंने जवाब दिया, "कई संभावनाएँ और नेतृत्व के अवसर हैं, लेकिन उन्हें तलाशने और उनका मूल्यांकन करने की आवश्यकता है।"

उन्होंने कहा कि व्यवहार में यह अलग-अलग है क्योंकि कुछ देशों में कलीसिया में महिला नेता हो सकती हैं और अन्य में नहीं, लेकिन ध्यान अभिषिक्त प्रेरिताई पर नहीं है। और जबकि यह सच है कि ऐसी महिलाएँ हैं जो पुरोहिताई के लिए बुलाई गई हैं, यह क्षेत्र प्रेरिताई के लिए पवित्र आत्मा के आह्वान जैसे व्यापक विषयों को छूता है, जो इस धर्मसभा का विषय नहीं है।

हालांकि, कार्डिनल ग्रेसियस ने कहा कि कलीसिया में महिलाएँ ध्यान के केंद्र में हैं, उन्होंने बताया कि कार्डिनल्स की पिछली तीन परिषदों में, कलीसिया में महिलाओं की भूमिका पर ईशशास्त्रीय और प्रेरितिक दृष्टिकोण से चर्चा की गई थी।

प्रेरिताई, करिस्मों और बुलाहटों के संबंध में, महाधर्माध्यक्ष ग्रुसास ने कहा कि लोकधर्मी और परिवारों की भूमिकाएँ विभिन्न स्थानों पर अलग-अलग तरीके से व्यक्त की जा सकती हैं, और इसलिए, पुरुषों और महिलाओं की भूमिकाओं को उचित रूप से महत्व दिया जाना चाहिए।

इसके बाद धर्माध्यक्ष की नियुक्ति के बारे में अध्ययन समूह के बारे में सवाल उठाए गए और कार्डिनल ग्रेसियस ने स्पष्ट किया कि धर्माध्यक्ष की भूमिका पर ध्यान केंद्रित करने वाले दो समूह हैं, एक भूमिका पर और दूसरा नियुक्ति प्रक्रिया पर। कार्डिनल ने पुष्टि की, "धर्माध्यक्ष की छवि कलीसिया के लिए मौलिक है, और उनकी नियुक्ति सर्वोत्तम संभव तरीके से की जानी चाहिए," उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों समूहों ने कलीसिया के लिए इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में सहयोग करना शुरू कर दिया है।

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08 अक्तूबर 2024, 17:26
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