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पौल षष्टम भवन में सन्त पापा फ्राँसिस धर्मसभा सत्र में, 04.10.2024 पौल षष्टम भवन में सन्त पापा फ्राँसिस धर्मसभा सत्र में, 04.10.2024  

धर्मसभा: 7 अक्टूबर को उपवास और शांति के लिए प्रार्थना

वाटिकन स्थित परमधर्मपीठीय प्रेस कार्यालय ने इस समय वाटिकन के पौल षष्टम भवन में जारी विश्व धर्माध्यक्षीय धर्मसभा की 16वीं साधारण महासभा के दूसरे सत्र के उद्घाटन पर प्रकाश डाला।

वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 4 अक्तूबर 2024 (रेई, वाटिकन रेडियो): वाटिकन स्थित परमधर्मपीठीय प्रेस कार्यालय ने इस समय वाटिकन के पौल षष्टम भवन में जारी विश्व धर्माध्यक्षीय धर्मसभा की 16वीं साधारण महासभा के दूसरे सत्र के उद्घाटन पर प्रकाश डाला।

गुरुवार, 03 अक्टूबर को विश्व धर्माध्यक्षीय धर्मसभा में चर्चित प्रमुख विषय थे, शांति, क्षमा, महिलाओं की भूमिका और साथ ही अध्ययन समूहों की कार्य पद्धतियाँ। विश्व धर्माध्यक्षीय धर्मसभा की 16वीं साधारण महासभा के विशिष्ट सचिव येसु धर्मसमाजी पुरोहित फादर जाकोमो कॉस्ता सहित कई गणमान्य विशेषज्ञों ने धर्मसभा को सम्बोधित किया।

डॉ.पाओलो रूफिनी

सर्वप्रथम, परमधर्मपीठीय सम्प्रेषण और संचार माध्यम सम्बन्धी विभाग के डॉ.पाओलो रूफिनी ने धर्मसभा के सदस्यों को सम्बोधित कर आध्यात्मिकता और प्रार्थना के पक्ष को उजागर किया। उन्होंने सूचित किया कि 365 धर्मसभा सदस्यों में से 356 गुरुवार प्रातः पौल षष्टम भवन में उपस्थित थे। उन्होंने बताया कि प्रत्येक समूह के प्रतिवेदक चुने गए, और इंस्ट्रुमेंटम लेबोरिस के "फाउंडेशन" अध्याय पर ध्यान केंद्रित करने वाले पांच कामकाजी मॉड्यूल में से पहला लॉन्च किया गया।  

डॉ. रुफीनी ने सत्रों में "आध्यात्मिकता और प्रार्थना" के महत्व पर जोर दिया और बताया कि वैश्विक परिस्थितियाँ और खास तौर पर युद्धग्रस्त क्षेत्रों की परिस्थितियाँ सभी प्रतिभागियों के दिल और दिमाग पर भारी पड़ रही हैं।  सन्त पापा फ्राँसिस की अपीलों को याद कर उन्होंने उन्हीं के शब्दों को दुहराते हुए कहा कि "हिंसा को रोकने के लिए हर संभव प्रयास किये जायें" और "शांति के रास्ते खोले जायें।"

फादर जाकोमो कॉस्ता

फादर कॉस्ता ने सन्त पापा फ्रांसिस के शब्दों का स्मरण करते हुए इस तथ्य की पुनरावृत्ति की कि विश्व धर्माध्यक्षीय धर्मसभा "कोई संसद नहीं है," बल्कि श्रवण और संवाद का एक स्थान है। उन्होंने पौल षष्टम भवन के हर्षित और गहन माहौल को देखते हुए इस बात को रेखांकित किया कि यह सिर्फ एक अलंकारिक बयान नहीं है, बल्कि एक जीवंत अनुभव है। उन्होंने अध्ययन समूहों को "धर्मसभा को जीवन की प्रयोगशालाओं" के रूप में देखने को प्रोत्साहित किया, जो जून 2025 तक विश्व के समस्त विश्वासियों के योगदान के लिए खुले रहेंगे।

कार्यप्रणाली में बदलाव

फादर कॉस्ता ने 2023 और 2024 के सत्रों के बीच परिवर्तन को समझाया। उन्होंने कहा, 2023 में लक्ष्य विविध दृष्टिकोणों को सुनना था - "कलीसिया की कहानियाँ" जिन्हें उभरने की जरूरत थी। हालाँकि, 2024 में, उन्होंने देखा, धर्मसभा के सत्रों की भूमिका सन्त पापा को अब तक सम्पन्न यात्रा के फलों के प्रति उन्मुख करना है, जिसका  उद्देश्य एकरूपता उत्पन्न करना नहीं है अपितु सामंजस्य एवं सद्भाव को बढ़ावा देना है।

उन्होंने कहा, "अब की विधि किसी भी कठोर निष्कर्ष से बचते हुए, आगे की खोज के लिए जगह खुली रखते हुए, 'आध्यात्मिक वार्तालाप' के माध्यम से गहन विश्लेषण के लिए प्रमुख बिंदुओं की पहचान करने में मदद करेगी।"

ईशशास्त्री फादर बात्तोखियो

इसी प्रकार, ईशशास्त्री फादर बात्तोखियो ने क्षमा के महत्व पर प्रकाश डाला, विशेष रूप से, मंगलवार शाम, पहली  अक्टूबर को सन्त पेत्रुस महागिरजाघर में सन्त पापा फ्राँसिस के नेतृत्व में सम्पन्न दंडात्मक जागरण के दौरान पश्चाताप की प्रार्थना को उन्होंने याद किया। उन्होंने कहा कि वह क्षमा याचना समारोह हमारे लिये  "एक आदर्श, एक चेतना प्रदान करता है कि कलीसिया होने का क्या मतलब है", क्योंकि पापी व्यक्ति "कोई बाहरी व्यक्ति नहीं होता है, बल्कि वह व्यक्ति होता है जिसका बोझ उठाने में मुझे मदद करनी चाहिए।" उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि "हम सब ईश्वर की दया के प्राप्तकर्ता के रूप में कलीसिया के सदस्य हैं।"

महिलाओं की भूमिका

मेक्सिको की धर्मबहन सि. मरिया दोलोरेस गोम्ज़ ने धर्मसभा के भीतर "महान स्वतंत्रता और महान उत्साह" के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि सभी प्रतिभागी "इस दुनिया की चरम वास्तविकता को पहचानते हुए एक साथ चल रहे हैं, और एक साथ मिलकर पिता ईश्वर से प्रार्थना कर रहे हैं।"

कलीसिया में महिलाओं की भूमिका के बारे में उन्होंने कहा कि विभिन्न संदर्भों और महाद्वीपों में पहले से ही महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। लातीनी अमरीका में अपने अनुभवों के आधार पर, उन्होंने कहा कि कलीसीया में "महिलाओं की भूमिका और योगदान को धर्मसभा मान्यता दी जा रही है।"

महिला याजक के संबंध में, उन्होंने और अन्य वक्ताओं ने भी परमधर्मपीठीय विश्वास और धर्मसिद्धान्त सम्बन्धी परिषद के अध्यक्ष कार्डिनल विक्टर मैनुअल फर्नांडीज के बयान को दोहराते हुए कहा कि इस विषय के लिए अभी समय नहीं आया है, लेकिन कलीसिया की सामूहिक तीर्थयात्रा के भीतर इसकी खोज जारी रहनी चाहिए।

मौन का महत्व

इसी प्रकार धर्मसभा आचार्य धर्माध्यक्ष फ्लोर्स ने मौन प्रार्थना पर बल दिया। धर्माध्यक्ष फ्लोर्स ने मदर मारिया इग्नाज़िया एंजेलिनी द्वारा 1 अक्टूबर को दिए गए ध्यान का जिक्र करते हुए, धर्मसभा प्रक्रिया में मौन के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा, मौन कोई खाली जगह नहीं है, बल्कि अर्थ से भरी एक जगह है जहां दिल से शब्द निकलते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि मौन धर्मसभा शैली का एक मूलभूत हिस्सा है, जो व्यक्ति को दुनिया की गहरी आध्यात्मिक समझ में सक्षम बनाता है।

प्रार्थना और उपवास

पत्रकार सम्मेलन सन्त पापा फ्राँसिस की शांति अपील से सम्पन्न हुआ। 06 और 07 अक्टूबर को सन्त पापा ने विश्व के समस्त ख्रीस्तयों को आमंत्रित किया है कि इन दो दिनों कलीसिया के मनोरथों के लिये वे प्रार्थना करें और उपवास रखें। इन दिनों रोम स्थित मरियम महागिरजाघर सान्ता मरिया माज्जोरे में रोज़री विनती का पाठ किया जायेगा। धर्मसभा के सभी प्रतिभागियों को रविवार के कार्यक्रम में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है, जबकि सोमवार के सत्र में प्रार्थना और सादगी का विशेष माहौल होगा।

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04 अक्तूबर 2024, 10:43
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