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2021.03.21 नस्लवाद के ख़िलाफ़ दिवस 2021.03.21 नस्लवाद के ख़िलाफ़ दिवस  (Copyright 2011 Brett Jorgensen Photography)

परमधर्मपीठ ने प्रवासियों के खिलाफ नस्लवाद और धार्मिक भेदभाव की निंदा की

न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में परमधर्मपीठ के स्थायी पर्यवेक्षक, महाधर्माध्यक्ष गाब्रिएल कैसिया, प्रवासियों और शरणार्थियों के खिलाफ बढ़ते नस्लीय भेदभाव और धार्मिक असहिष्णुता में वृद्धि की निंदा की।

वाटिकन न्यूज

न्यूयार्क, बुधवार, 1 नवम्बर 2023 : परमधर्मपीठ ने अपने सभी रूपों में "नस्लवाद की खतरनाक और घृणित बुराई" को "निर्णायक रूप से" संबोधित करने और संबंधित धार्मिक असहिष्णुता, भेदभाव और उत्पीड़न को रोकने के लिए अपने आह्वान को दोहराया है।

संयुक्त राष्ट्र में परमधर्मपीठ के स्थायी पर्यवेक्षक, महाधर्माध्यक्ष गाब्रियल कैसिया ने सोमवार को शोक व्यक्त करते हुए कहा, "स्पष्ट प्रगति और यहां तक कि कानून में महत्वपूर्ण बदलावों के बावजूद, नस्लवाद की वास्तविकता बनी हुई है।"

प्रत्येक मनुष्य की अंतर्निहित गरिमा का अपमान

इस विषय पर संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) की तीसरी समिति को संबोधित एक बयान में, वाटिकन राजदूत ने याद दिलाया कि नस्लवाद को रेखांकित करने वाली "गलत धारणा" है कि "एक व्यक्ति, केवल एक विशेषता तक सीमित होकर, दूसरे से श्रेष्ठ है", यह "प्रत्येक मनुष्य की अंतर्निहित गरिमा का अपमान" है

"मानव परिवार के सभी सदस्यों के मूल अधिकार और कर्तव्य समान हैं, क्योंकि उनके पास ईश्वर प्रदत्त समान गरिमा है।"

प्रवासी कोई राजनीतिक समस्या नहीं, बल्कि इंसान हैं

उन्होंने विशेष रूप से नस्लवाद, ज़ेनोफोबिया और प्रवासियों, शरणार्थियों और शरण चाहने वालों के खिलाफ भेदभाव के "निंदनीय" कृत्यों का उल्लेख किया जो "नस्लवादी मानसिकता का स्पष्ट प्रकटीकरण" हैं। महाधर्माधअयक्ष कैसिया ने निंदा करते हुए कहा, "प्रवासियों को किसी अन्यों की तरह समान आंतरिक गरिमा से संपन्न व्यक्ति के रुप में नहीं देखा जाता है और इसलिए उन्हें खुले तौर पर अस्वीकार कर दिया जाता है।"

उन्होंने कहा कि "प्रवासन भय और आशंका पैदा कर सकता है, जिसे अक्सर राजनीतिक उद्देश्यों के लिए बढ़ावा दिया जाता है और शोषण किया जाता है।" इसलिए इस विशेष मुद्दे को "निर्णायक ढंग से" संबोधित करने की तत्काल आवश्यकता है।

"प्रवासियों को आसानी से निपटाई जाने वाली राजनीतिक समस्या के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि उन्हें ऐसे इंसान के रूप में देखा जाना चाहिए जो प्रत्येक व्यक्ति के समान आंतरिक गरिमा और मूल्य साझा करते हैं।"

धार्मिक भेदभाव का बढ़ना चिंताजनक

वाटिकन के स्थायी पर्यवेक्षक ने धार्मिक असहिष्णुता, भेदभाव और उत्पीड़न के मामलों में निरंतर वृद्धि के लिए परमधर्मपीठ की गहरी चिंता भी व्यक्त की।

ऐसे कई स्थानों पर विचार करते हुए जहां धार्मिक स्वतंत्रता गंभीर रूप से प्रतिबंधित है, उन्होंने याद दिलाया कि सरकारों का कर्तव्य है कि "अपने नागरिकों के इस अधिकार की रक्षा करें, क्योंकि यह गरिमा में रहने के लिए आवश्यक न्यूनतम आवश्यकताओं में से एक है।" महाधर्माध्यक्ष कैसिया ने "अन्यता" के डर के प्रति आगे चेतावनी दी कि "एक आयामी एकरूपता की खोज हो सकती है जो एकता की सतही खोज की आड़ में सभी मतभेदों और परंपराओं को खत्म करना चाहती है।"

संवाद की संस्कृति "अन्यता" के डर का इलाज करती है

उन्होंने अपने विश्व पत्र 'फ्रातेल्ली तुत्ती' में संत पापा फ्राँसिस के शब्दों को दोहराते हुए टिप्पणी की, इस "झूठी सार्वभौमिकता" का प्रतिकार संवाद की संस्कृति में पाया जा सकता है जो "प्रत्येक व्यक्ति और प्रत्येक समुदाय के समृद्ध उपहार और विशिष्टता को पहचानता है।" ”

अंत में, महाधर्माध्यक्ष कैसिया ने पुष्टि की कि 1948 में मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा में निहित सभी मनुष्यों की समान गरिमा की मांग है कि हम कभी भी नस्लवाद या बहिष्कार से आंखें नहीं मूंदें, बल्कि हम हर व्यक्ति के साथ खुलेपन, एकजुटता और प्रेम के साथ संपर्क करें।”

“नस्लवाद एक खतरनाक और घृणित बुराई है जो मानवीय गरिमा को नकारती है और मानव परिवार को विभाजित करती है। किसी के भी साथ, कानून में या वास्तव में, उसकी जाति, रंग, लिंग, भाषा, धर्म, राजनीतिक या अन्य राय, राष्ट्रीय या सामाजिक मूल, संपत्ति, जन्म या अन्य स्थिति के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए।

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01 November 2023, 15:54