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सिनोड कार्यवाही पर संचार विभाग के अधिकारी पावलो रूफीनी की प्रेस विज्ञप्ति सिनोड कार्यवाही पर संचार विभाग के अधिकारी पावलो रूफीनी की प्रेस विज्ञप्ति  

धर्मसभा पर रूफीनीः कलीसिया गहराई से सब की सुनती है

संचार माध्यम और पत्रकारों को वाटिकन विभाग के अधिकारी पावलो रूफीनी ने बुधवार को एक प्रेस विज्ञप्ति में सिनोड कार्यवाही की बातें स्पष्ट कीं।

वाटिकन सिटी

वाटिकन संचार विभाग के अधिकारी पावलो रूफीनी ने कार्यवाही दलों (सर्कुली माइनर्स) की कार्यप्रणाली को समझाने हेतु पत्रकारों के संग एक प्रेस विज्ञप्ति किया, साथ ही धर्मसभा प्रतिभागियों के साथ प्रत्येक मॉड्यूल के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस की योजना बनाई।

सिनोड हेतु गठित सूचना आयोग के अध्यक्ष वाटिकन संचार विभाग के अधिकारी पावलो रूफिनी ने बुधवार हो संचार माध्यमों और पत्रकारों से संग हुए एक प्रेस विज्ञाप्ति में कहा कि धर्मसभा के 35 कार्यवाहक समूहों ने बुधवार को अपने कार्यों की शुरूआत कर दी है। कार्यवाही दलों में, उन्होंने कहा, प्रतिभागी एक दूसरे को बेहतर रूप से जानने हेतु अपने परिचय से शुरूआत करते हुए सिनोड के संबंध में व्यक्तिगत अनुभावों को साझा करेंगे। दल में दूसरों को सुनने के क्रम में वे अपनी उन बातों को साझा करेंगे जिससे वे अपने को प्रभावित पाते हैं। पावलो रूफीनी ने धर्मसभा की कार्यप्रणाली के विभिन्न पहलू का भी जिक्र किया। 

संत पापा फ्रांसिस ने बुधवार को धर्मसभा को संबोधित करते हुए सिनोड के शुरुआती चरण में होने वाली कार्यवाही की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने सुनने को प्राथमिकता दिया, वहीं बोलने से “परहेज” करने पर जोर देते हुए (विशेष रूप से सार्वजनिक रूप से), आपसी परिचय, विवेक, और गोपनीयता के सम्मान का आहृवान किया। इस भांति वैश्विक कलीसिया, इन चार सप्ताहों के सम्मेलन में एक तरह से “ठहर” सी जाती है।

डॉ. रूफीनी ने कहा, “शांत, सम्मानजनक ढंग से सुनने का यह समय, जैसा कि संत पापा ने अपनी इच्छा जाहिर की है, दुनिया के अन्य मोर्चों के लिए भी मददगार सिद्ध हो सकता है जहाँ हम युद्ध, जलवायु संकट को पाते हैं, हमें रुकने और एक-दूसरे को सुनने की जरुरत है।”  

वाटिकन संचार विभाग के अधिकारी ने संत पापा के आभार भरे शब्दों की याद की जिसे उन्होंने संचार माध्यम में कार्यरत लोगों और पत्रकारों के प्रति व्यक्त किया जो इन दिनों सिनोड में हो रही कार्यवाही को विभन्न माध्यमों में प्रकाशित करेंगे।

धर्मग्रंथ और सुसमाचार-आधारित “मौन”

उन्होंने कहा कि आज “समाचार” मुख्य रुप से “मौन” रहना है जो हमें सुनने और आत्मपरीक्षण करने हेतु मदद करता है जिसे हम धर्मग्रंथ और सुसमाचार में पाते हैं। कलीसिया एक संस्थान के रुप में जिस तरह अपने को विश्वास, एकता और प्रार्थनामय शांति में व्यतीत करती है हमारे लिए समाचार बनता है। उन्होंने पत्रकारों को यह भी बताया कि सभा के प्रत्येक मॉड्यूल के अंत में धर्मसभा प्रतिभागियों के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी।     

कार्यवाही की प्रक्रिया

दक्षिण अफ़्रीकी धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के सूचना और संचार आयोग के सचिव शीला पिरेस के संग मिलकर डॉ. रुफिनी ने बतलाया कि कैसे, तकनीकी और पद्धतिगत स्तर पर, 35 कार्यवाहक दल अपनी भाषा-दल के सदस्यों संग काम करेंगे।

वर्तमान में विचारमंथन का क्रेन्द-विन्दु इनस्त्रेमेन्तु लबोरिस का खण्ड अ है जहाँ हम “एक धर्मसभा को कलीसिया के विशिष्ट निशानियों और “पवित्र आत्मा से वार्ता” करते हुए पाते हैं। यह धर्मसभा के पहले स्तर को अभिव्यक्त करता है।

प्रतिभागियों को दिया गया चार मिनट का समय, परिचय और प्रथम चरण में धर्मसभा के मार्ग में अपनी अनुभूतियों को साझा करने में विभाजित किया गया है। यह अपने में “इसकी शुरूआत कैसे हुए, इसका विकास कैसे हुआ, इसमें कठिनाइयाँ और स्थानीय कलीसिया और वैश्विक कलीसिया के संग संबंध” को सम्माहित करता है।

डॉ. रूफीनी ने कहा कि दल के सदस्यों के विचारों को संग्रहित करने हेतु एक सचिव का चुनाव बहुमत मतदान द्वारा किया गया है जो दल की बातों, विचार-मंथनों का एक रिपोर्ट तैयार करते हुए उसे सम्मेलन के समक्ष साझा करेगा।

इसके साथ ही “कोई भी धर्मसभा में अपने विचारों को रख सकता है और उन्हें लिखित रूप में सिनोड सचिवालय को भेज सकता है”, रूफीनी ने जोर देते हुए कहा “इसमें बहुत स्वतंत्रता है” जहाँ व्यक्ति शांतिमय तरीके से अपने विचारों को एक-दूसरे के संग साझा कर सकता है, इस भांति सभी अपने में एक तरह से गहरी आध्यात्मिकता के अनुभव से होकर गुजरते हैं।”

उन्होंने कहा कि यहाँ हम “एकता” को पाते हैं। “यह महत्वपूर्ण नहीं कि इस व्यक्ति या उस प्रतिभागी ने क्या कहा, बल्कि कलीसिया एकतामय तरीके से किन बातों पर निर्णय लेती है।” यह अपने में एक जटिल प्रक्रिया है लेकिन हम यह इस बात को सुनिश्चित पाते हैं कि हर कोई अपने विचारों को व्यक्त कर सकता है।

कदम दर कदम बढ़ने की जरुरत

“पत्रकारों के रुप में, यह सामान्य बात है कि हम किसी भी चीज़ के अंत की कल्पना करने की कोशिश करते हैं- यह या तो फ़ुटबॉल खेल या राजनीतिक चुनाव हो सकता है।” “लेकिन आप इसका उत्तर नहीं दे सकते कि इसका अंत क्या होगा क्योंकि हम वास्तव में केवल शुरुआती दौर में हैं।” जैसा कि संत पापा फ्रांसिस ने हमेशा कहा है, धर्मसभा एक प्रक्रिया है, खासकर यह धर्मसभा 2024 तक जारी रहेगी।

“आइए कदम दर कदम आगे बढ़ने का प्रयास करें”, सूचना आयोग के अध्यक्ष ने आग्रह किया कि यह धर्मसभा की कार्यप्रणाली है जिसके लिए हमें कदम-दर-कदम यात्रा करने की आवश्यकता है। “यह कोई विचार-विमर्श करने वाली धर्मसभा नहीं है। हम बीच में हैं, इसलिए आप इस सभा से अगली सभा के लिए भविष्यवाणी करने की बात नहीं कह सकते हैं।”

अंतिम रिपोर्ट का स्वरूप

रूफीनी ने आगे कहा कि अंतिम रिपोर्ट अक्टूबर के अंत में तैयार की जाएगी, उसमें “समानताओं  और विभिन्नातो” का आंकलन किया जायेगा यद्यपि यह किसी बिंदु तक पहुंचने को नहीं बल्कि “एक प्रक्रिया का अनुसरण करेगा।” उन्होंने कहा, “इसलिए यह पिछले धर्मसभा के अंतिम दस्तावेज़ की अपेक्षा एक इंस्ट्रुमेंटम लेबोरिस के जैसा कुछ होगा।”

इसलिए धर्मसभा “एक निकाय” है, जिसमें किसी को भी बाहर नहीं रखा गया है। “कार्यकारी दल के प्रत्येक सदस्य की सक्रिय भागीदारी के साथ आम विचार-विमर्श आगे बढ़ रहे हैं, ताकि पूरे सम्मेलन को समानता और विभिन्नता, उभरते हुए तनाव और सवाल जो अपने में खुले हों, ठोस कदमों के संग अंतर्दृष्टि और प्रस्ताव प्रदान किया जा सके, जो विभिन्न मुद्दों को संबोधित करेगा।

उन्होंने कहा, “जो सदस्य यहाँ हैं वे ऐसा करने के लिए ही यहाँ हैं। या तो हम इस पर विश्वास करते हैं, या हम धर्मसभा को कोई मूल्य नहीं देते हैं। हम प्रत्येक सदस्य की राय पर चर्चा नहीं कर रहे हैं। यह हाँ या न नहीं है, बल्कि यह पूरी कलीसिया है जो सुनते हुए आत्ममंथन कर रही है।”

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07 October 2023, 16:48