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नाईजीरिया में बाढ़ नाईजीरिया में बाढ़  (AFP or licensors)

परमधर्मपीठ: पर्यावरण संकट का सामना करने हेतु संयुक्त प्रयासों की आवश्यकता

परमधर्मपीठ ने यूक्रेन में युद्ध के प्रभाव के कारण वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में आकस्मिक परिवर्तन के मद्देनजर पारिस्थितिक और सामाजिक संकटों से निपटने के लिए सभी यूरोपीय देशों के संयुक्त प्रयासों को प्रोत्साहित किया है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 25 अक्टूबर 2022 (रेई)˸ सभी देशों; चाहे वे विकसित अथवा विकासशील, परमधर्मपीठ ने समान रूप से, पर्यावरण की देखभाल करने और समाज में गरीबी को कम करने की चुनौतियों का समाधान करने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया है।

परमधर्मपीठ के प्रतिनिधि मोनसिन्योर मौरो लल्ली ने यह अपील यूरोप में सुरक्षा और सहयोग संगठन (ओएससीई) के 2022 के भूमध्यसागरीय सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए की, जो जॉर्डन में 24-25 अक्टूबर को जारी है। सम्मेलन की विषयवस्तु है, "भूमध्यसागरीय क्षेत्र में सुरक्षा और सहयोग को आगे बढ़ाना: सहयोग के लिए ओएससीई भूमध्यसागरीय भागीदारों के साथ बातचीत को बढ़ावा देना।"

सुरक्षा परिदृश्य में बदलाव

जॉर्डन में प्रेरितिक राजदूतावास के प्रभारी मोनसिन्योर लल्ली ने वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में आकस्मिक परिवर्तन का उल्लेख किया, जो रूस द्वारा फरवरी में यूक्रेन पर युद्ध शुरू करने के कारण हुआ है जिसमें ऊर्जा और जलवायु सुरक्षा के मामले शामिल हैं।

मोनसिन्योर ने गौर किया कि ओएससीई क्षेत्र " ऊर्जा आपूर्ति की गंभीर कमी के कारण अभूतपूर्व और बढ़ती चुनौतियों का सामना कर रहा है, जो संभवतः आर्थिक संकट से पहले से प्रभावित कई परिवारों और उद्योगों पर अधिक दबाव डालेगा।"  

इसके अलावा, यह परमाणु युद्ध का खतरा, साथ ही साथ परमाणु सुविधाओं के आसपास के क्षेत्रों में सैन्य गतिविधियों, गंभीर मानवीय और पर्यावरणीय परिणामों के बढ़ते जोखिम के साथ, वर्तमान की अस्थिर सुरक्षा और ऊर्जा की स्थिति के कारण कई चिंताओं को बढ़ा रहा है।

पर्यावरणीय परिवर्तन

यही कारण है कि संत पापा फ्राँसिस ने जीवाश्म ईंधन से दूर ऊर्जा सुरक्षा एवं इसके वितरण को स्थापित करने हेतु एक साथ प्रयास करने की आवश्यकता पर बल दिया है। उन्होंने राष्ट्रों से अपील की है कि वे राजनीतिक, वैज्ञानिक और तकनीकी स्तर पर एक साथ काम करें जिससे कि आर्थिक स्थायित्व, सार्वजनिक स्वास्थ्यलाभ, पर्यावरण की सुरक्षा और समग्र मानव विकास को बढ़ावा दिया जा सकें।

संत पापा ने जोर दिया है कि यह एक ऐसी चुनौती है जो "पारिस्थितिक मन-परिवर्तन" की मांग करती है जिसके लिए हमें उपभोग के मॉडल के साथ-साथ जीवनशैली को इस तरह से परिवर्तित करने की आवश्यकता है जो "सृष्टि के प्रति अधिक सम्मानजनक हो और सभी लोगों के समग्र मानव विकास, वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के लिए चिंता, जिम्मेदारी, विवेक, एकजुटता, गरीबों पर ध्यान आदि पर आधारित विकास हो।

उन्होंने कहा है कि "पर्यावरण की देखभाल एवं गरीबी दूर करना दो अलग-अलग चुनौतियाँ नहीं हैं लेकिन बड़े वैश्विक चुनौती के हिस्से हैं, ताकि सम्पूर्ण एवं प्रमाणिक मानव विकास किया जा सके।"

एक साथ प्रयास किये जाने की जरूरत

ओएससीई में वाटिकन के प्रतिनिधि ने सभी नेताओं का आह्वान किया कि वे जटिल सामाजिक एवं पर्यावरणीय संकटों का सामना करने के लिए एक साथ काम करें, यह देखते हुए कि पेरिस समझौते जैसे बहुपक्षीय समझौते "राजनीति, नीतियों और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के पूर्व महत्वपूर्ण परिवर्तन" के बिना आवश्यक परिवर्तन प्रदान नहीं करेंगे।

मोनसिन्योर लल्ली ने कहा कि इस तरह के बदलाव की शुरूआत हमारे हृदय, मन, जीवनशैली और मानव परिवार में एक-दूसरे के साथ हमारे मुलाकात के तरीकों से होती है।

अंततः वाटिकन प्रतिनिधि ने भूमध्यसागरीय क्षेत्र में, यूरोप के सुरक्षा और सहयोग संगठन के कार्यों के लिए अपने सहयोग की पुष्टि की, विशेष रूप से, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को दूर करने के लिए सहयोग को गहन करने में, जो आम सुरक्षा को भी आगे बढ़ाता है।

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25 October 2022, 16:47