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न्यू यॉर्क स्थित राष्ट्र संघीय मुख्यालय में देशों के प्रतिनिधियों की बैठक, 22.09.2022 न्यू यॉर्क स्थित राष्ट्र संघीय मुख्यालय में देशों के प्रतिनिधियों की बैठक, 22.09.2022  (Copyright The Associated Press 2018)

परमधर्मपीठ, व्यापक परमाणु परीक्षण-प्रतिबंध संधि की पुनर्पुष्टि

न्यू यॉर्क में जारी संयुक्त राष्ट्र संघीय महासभा में गुरुवार को राष्ट्रों के प्रतिनिधियों को सम्बोधित कर वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल पियेत्रो पारोलीन ने व्यापक परमाणु परीक्षण-प्रतिबंध संधि की पुनर्पुष्टि की।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

न्यू यॉर्क, शुक्रवार, 23 सितम्बर 2022 (रेई, वाटिकन रेडियो): न्यू यॉर्क में जारी संयुक्त राष्ट्र संघीय महासभा में गुरुवार को राष्ट्रों के प्रतिनिधियों को सम्बोधित कर वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल पियेत्रो पारोलीन ने व्यापक परमाणु परीक्षण-प्रतिबंध संधि की पुनर्पुष्टि की तथा विश्व के समस्त राष्ट्रों का आह्वान किया कि वे दूषित क्षेत्रों का बहाली और रेडियोधर्मी परमाणु परीक्षण के पीड़ितों की सहायता करने के लिए उचित कार्रवाई करें।

कार्डिनल पारोलीन ने कहा कि रेडियो धर्मी परमाणु परीक्षणों द्वारा छोड़े जाने वाले दूषित पदार्थ "महिलाओं, लड़कियों और अजन्मे बच्चों पर प्रतिकूल प्रभाव डालते तथा दुनिया भर में दूषित वातावरण फैलाते हैं।"

सीटीबीटी

राष्टसंघीय महासभा में गुरुवार के सत्र में व्यापक परमाणु परीक्षण-प्रतिबंध संधि (सीटीबीटी) पर चली एक उच्च स्तरीय बैठक के प्रतिभागियों को सम्बोधित कर कार्डिनल महोदय ने कहा कि हस्ताक्षर के लिए खोले जाने के 26 साल बाद, आज भी उक्त संधि परमाणु निरस्त्रीकरण को प्रशासित करने का एक महत्वपूर्ण घटक बनी हुई है।

बुधवार को हुई बैठक में छह देशों यानि जापान, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जर्मनी, फ़िनलैंड और नीदरलैंड्स के प्रतिनिधियों ने सहमति व्यक्त की कि व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि "बिना किसी देरी के" प्रभावी होनी चाहिए और "इसके प्रवेश को आगे बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्प" व्यक्त करना सभी राज्यों के हित में है।”

विश्व के विभिन्न देशों को सभी प्रकार के परमाणु विस्फोटक परीक्षण करने से रोकने वाली उक्त संयुक्त राष्ट्र संधि के प्रभावी होने के लिए, उन सभी 44 देशों द्वारा हस्ताक्षरित और अनुसमर्थित होना ज़रूरी है जिनके पास अनुसंधान या बिजली उत्पादन के लिए परमाणु रिएक्टर्स हैं, किन्तु इन देशों में से आठ देशों ने यानि चीन, मिस्र, भारत, ईरान, इज़राइल, उत्तर कोरिया, पाकिस्तान और संयुक्त राज्य अमेरिका ने अभी तक ऐसा नहीं किया है।

दूषित वातावरण को ठीक करें

सभी देशों द्वारा संधि के अनुसमर्थन का आह्वान कर कार्डिनल पारोलीन ने कहा, "वैश्विक तनावों के बढ़ते तथा परमाणु हथियारों के उपयोग की धमकी देने वाली बयानबाज़ी के मद्देनज़र सीटीबीटी को लागू करना पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है।"

उन्होंने उन लोगों की सहायता का आह्वान किया जो परमाणु परीक्षण द्वारा जारी रेडियोधर्मिता से प्रभावित हुए हैं और पर्यावरण के परिशोधन के लिए काम करते हैं। उन्होंने कहा, "परमधर्मपीठ सभी राष्ट्रों को, विशेष रूप से, उन राज्यों को प्रोत्साहित करती है जो परमाणु निरोध पर भरोसा करते हैं ताकि वे उन प्रयासों में योगदान करें जो दूषित वातावरण को ठीक करने की कोशिश करते तथा उन पीड़ितों की सहायता में लगे हैं जिन्हें नुकसान पहुँचा है।"

उन्होंने कहा, "हालांकि इस तरह के प्रयासों में योगदान करने की इन राज्यों की कानूनी जिम्मेदारी नहीं है, तथापि, उनका नैतिक दायित्व है कि वे परमाणु परीक्षण से होने वाले नुकसान को दूर करने का हर सम्भव प्रयास करें।"

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23 September 2022, 11:21