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मंगोलिया की राजधानी उलानबातार के प्रेरितिक प्रशासक फादर जोर्जो मारेंगो और बौद्ध प्रतिनिधिमंडल मंगोलिया की राजधानी उलानबातार के प्रेरितिक प्रशासक फादर जोर्जो मारेंगो और बौद्ध प्रतिनिधिमंडल   (Afmc (Archivio fotografico Missioni Consolata))

परमधर्मपीठ एवं मंगोलिया ˸ 30 वर्षों का अच्छा संबंध

मंगोलिया के बौद्ध प्रतिनिधिमंडल ने परमधर्मपीठ एवं मंगोलियाई सरकार के बीच राजनयिक संबंध स्थापित किये जाने के 30 साल बाद पहली बार 28 मई को वाटिकन का दौरा कर, संत पापा फ्राँसिस से मुलाकात की।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

एक साक्षात्कार में मंगोलिया की राजधानी उलानबातार के प्रेरितिक प्रशासक ने सकारात्मक और सहयोगी संबंधों पर प्रकाश डाला।

मंगोलिया के बौद्ध प्रतिनिधिमंडल ने परमधर्मपीठ एवं मंगोलिया के बीच राजनयिक संबंध स्थापित किये जाने के 30 साल बाद पहली बार वाटिकन का दौरा किया है,  जो देश में काथलिक कलीसिया के 30 वर्षों के अस्तित्व को चिन्हित करता है।   

शुक्रवार को बौद्ध प्रतिनिधिमंडल का स्वागत अंतरधार्मिक वार्ता हेतु गठित परमधर्मपीठीय समिति ने की और दूसरी बेला सदस्यों ने वाटिकन संग्रहालय का दौरा किया जबकि प्रतिनिधि मंडल ने शनिवार को संत पापा फ्राँसिस से मुलाकात की।

वाटिकन रेडियो से बातें करते हुए उलानबातार के प्रेरितिक प्रशासक फादर जोर्जो मारेंगो ने मुलाकात को अंतरधार्मिक वार्ता हेतु एक महत्वपूर्ण कदम बतलाया।

उन्होंने कहा, "हम इस घटना से बहुत खुश हैं, जिसके लिए हम अंतरधार्मिक वार्ता हेतु गठित परमधर्मपीठीय समिति के साथ बड़े सहयोग और समर्थन के साथ करीब दो सालों से काम कर रहे थे।" उन्होंने याद किया कि मंगोलियाई बौद्ध के विशिष्ठ लोगों ने पहले भी वाटिकन की यात्रा की थी किन्तु वे आधिकारिक यात्रा नहीं थीं।    

प्रेरितिक प्रशासक ने कहा कि यह पहली बार है जब प्रतिनिधि मंडल ने संत पापा से मुलाकात की है, "अतः यह अंतरधार्मिक वार्ता का एक महत्वपूर्ण अध्याय है, जिसपर मंगोलिया की कलीसिया विशेष ध्यान देती है।"

मंगोलिया में काथलिक कलीसिया की उपस्थिति

मध्य एशियाई देश में करीब 1,400 काथलिक और 8 पल्लियाँ हैं। फादर मोरेंगो ने सच्चाई बतलाते हुए कहा कि "हम कलीसिया की इस छवि को पसंद करते हैं जो प्रेरित चरित की कलीसिया के समान है।"

"दुनिया में कुछ ही देश ऐसे हैं जहाँ ख्रीस्तीय जो हमारे समुदायों के सदस्य हैं, पहली या दूसरी पीढ़ी के हैं। यह महान मिशनरी उत्साह का परिणाम है जिसके नायक के रूप में, स्वर्गीय धर्माध्यक्ष वेंसस्लॉस पाडिला हैं जो इन दशकों में से कम से कम दो दशकों के लिए, इस कलीसिया के वास्तविक संस्थापक हैं। "

फादर मोरेंग ने बतलाया कि पहले दशक में, साम्यवादी शासन के अंत के बाद मिशनरियों के पहले दल ने सुसमाचार प्रचार का कार्य किया, जिसने देश में धार्मिक स्वतंत्रता को वातानुकूलित किया था।

दूसरे दशक को फादर मारेंगो ने पहले ख्रीस्तीय समुदाय की स्थापना और स्थानीय लोगों द्वारा विश्वास यात्रा की शुरुआत के रूप में वर्णित किया।

तीसरे दशक में पहले पुरोहित का अभिषेक 2016 में सम्पन्न हुआ जिसे वे एक उभरती हुई कलीसिया के लिए पवित्र आत्मा का एक महान वरदान मानते हैं।"   

उन्होंने कहा कि उनके साथ आज हमारे बीच एक दूसरा स्थानीय पुरोहित है जिनका पुरोहिताभिषेक पिछले साल अक्टूबर में हुआ है।  

राजनयिक संबंध

फादर मोरेंगो ने कहा, "इन फलप्रद वर्षों में हमने सकारात्मक वार्ता एवं सहयोग के बढ़ने का अनुभव किया है हम उम्मीद करते हैं कि यह ठोस कदम की ओर आगे बढ़ेगा जो मंगोलिया में कलीसिया की वैध स्थिति को मजबूत करेगा, साथ ही आपसी सहयोग को स्वीकार और पुष्ट करेगा।"

मुख्य चुनौती

मंगोलिया एक ऐसा राष्ट्र है जो उत्तर में पर्वत श्रृंखलाओं और दक्षिण में शुष्क विस्तार के बीच फैला हुआ है। इसकी आबादी का 30 प्रतिशत खानाबदोश है। ऐसे क्षेत्र में प्रेरितिक चुनौतियाँ जहाँ 3 मिलियन से अधिक की कुल आबादी में से केवल 1,400 लोगों ने बपतिस्मा लिया है।  

फादर मारेंगो ने कहा कि सबसे पहले उन लोगों की मदद करने की चुनौती पर प्रकाश डाला, जिन्होंने अपने विश्वास को गहरा करने और इसे रोजमर्रा की जिंदगी से अधिक से अधिक जोड़ने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

उन्होंने कहा, "इसके लिए बहुत ध्यान देने और साथ देने की आवश्यकता है।"

दूसरी चुनौती है एकता और भाईचारा का, विभिन्न धर्मसंघों के मिशनरियों के बीच और ख्रीस्तीय समुदायों के बीच।

तीसरा आयाम है सुसमाचार प्रचार एवं साक्ष्य देना जिसकी आवश्यकता इस कलीसिया को है जिसका अधिकांश हिस्सा बाहर जा रहा है।  

फादर मोरेंग ने कहा, "यह कभी न भूलें कि हम अपने आपमें नहीं रुक सकते या पीछे नहीं हट सकते हैं, क्योंकि सुसमाचार जीने और देखने एवं साहस और विनम्रता के साथ साक्ष्य देने के लिए है।"

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28 May 2022, 15:08