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लेबनान में कारितास इंटरनैशनल लेबनान में कारितास इंटरनैशनल 

कारितास इंटरनैशनल ˸ हमेशा गरीबों एवं सबसे कमजोर लोगों के निकट

12 दिसम्बर को कारितास इंटरनैशनल अपनी स्थापना की 70वीँ वर्षगांठ मनायेगा। इसके महासचिव अलोइस जॉन ने वाटिकन मीडिया से बातें करते हुए इस वर्षगाँठ के महत्व पर प्रकाश डाला तथा महामारी के समय में कारितास परिसंघ की सबसे बड़ी चुनौतियों को उजागर किया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 26 अक्तूबर 2021 (वीएनएस)- संत पापा पीयुस 12वें ने जब 12 दिसम्बर 1951 को इसकी स्थापना की थी तब द्वितीय विश्व युद्ध के अंत में उत्पन्न मानवीय आवश्यकताओं का सामना एवं संघर्ष के शिकार लोगों की मदद करना ही कारितास इंटरनैशनल का मुख्य उद्देश्य था। यह राष्ट्रीय कारितास संगठनों का समूह है। जिसमें शुरू में 13 संगठन थे जो अब बढ़कर 162 हो गये हैं। 70 सालों की इस अवधि में इसके कार्यों एवं क्षेत्रों में वृद्धि हुई है। शुरू के समान आज भी इसके केंद्र में ठोस उदारता का साक्ष्य है ताकि खासकर कमजोर लोग ईश्वर के करुणामय प्रेम का एहसास कर सकें। कारितास इंटरनैशनल ने कुछ पहलों और प्रयासों की घोषणा की है जिनके द्वारा इसकी स्थापना की 70वीं वर्षगाँठ मनायी जायेगी। कारितास इंटरनैशनल के महासचिव अलोएसियुस जॉन ने कारितास की चुनौतियों पर प्रकाश डाला-     

द्वितीय विश्व युद्ध के अंत के कुछ सालों बाद कारितास इंटरनैशनल का जन्म हुआ था। इसकी स्थापना के 70 साल बाद कौन से मूल्य हैं जो पहले की तरह आज भी संघ को बनाए रखते हैं?  

कारितास इंटरनैशनल का जन्म कलीसिया की "मदद और प्यार करनेवाले हाथ के रूप में हुआ था ताकि मानव व्यक्ति को सेवा और प्रोत्साहन दिया जा सके, खासकर, समाज में जो गरीब है, हाशिये पर जीवनयापन करते एवं सबसे कमजोर हैं। इन 70 सालों में हमारा संघ मानव प्रतिष्ठा, मौलिक अधिकार और सामाजिक न्याय की रक्षा करने से प्रेरित रहा है। इन मूल्यों ने हमेशा हमारे काम के मूल की याद दिलायी है जो समय के संकेतों का पालन करते और जरूरतमंद पड़ोसियों की बेहतर सेवा के लिए निरंतर विकास की मांग करते हुए इन वर्षों में विकसित हुआ है। हमारे मिशन के केंद्र में गरीबों के साथ मुलाकात रहा है और रहेगा। जैसा कि संत पापा ने 2019 के अंतिम आमदर्शन समारोह में याद दिलाया है। "गरीबों के साथ पारस्परिक संबंध बनाए बिना कोई दान नहीं कर सकता है," क्योंकि गरीबों के साथ रहते हुए ही हम निर्धनता की भावना से उदारता का अभ्यास कर सकते हैं। हम सीखते हैं कि परोपकार एक बांटना है।

इन 70 सालों में कारितास इनटरनैशनल हर बड़े मानवीय आपात स्थिति में मौजूद रहा है। तेजी से और गहन परिवर्तनों से चिह्नित दुनिया में आज आपके सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है?

मानवीय सहायता का कार्य 1951 से महत्वपूर्ण रूप से बदला है और आज हम जटिल एवं लम्बे समय तक चलनेवाले प्राकृतिक एवं मानव निर्मित संकट से जूझ रहे हैं। राजनीतिक विभाजन, युद्ध और धार्मिक संघर्ष, जलवायु परिवर्तन आदि के कारण शरणार्थियों एवं आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों की संख्या बहुत अधिक बढ़ गई है। हम बहुत अधिक असमानता एवं गरीबी तथा दुर्बलता के नये नियमों की अति आवश्यकता महसूस कर रहे हैं। जब हम उनसे पीड़ित लोगों की सेवा करना एवं उनका साथ देना जारी रखते हैं, हम अपने आधुनिक समाज में उनके साथ एकजुटता की भावना को बढ़ावा देने की चुनौती का सामना कर रहे हैं। दूसरी ओर, अपार मानवीय पीड़ा का सामना करते हुए, हमारे मिशन को पूरा करने हेतु आवश्यक संसाधनों को जुटाना सबसे जरूरी चुनौती है।

कोविड-19 ने परोपकारी एवं मानवीय क्रिया कलापों को सम्पन्न करने में भी तनाव उत्पन्न की है। कारितास इंटरनैशनल किस तरह संकट का सामना कर रहा है और कोविड के बाद की स्थिति के लिए किस तरह तैयारी कर रहा है?

हमारे संघ ने एक अभूतपूर्व संकट को झेला, जिसमें विश्व के करीब सभी कारितास संगठन को महामारी का सामना करना पड़ा। समर्थन और आशा का एक ठोस संकेत संत पापा की ओर से आया। उन्होंने कारितास इंटरनैशनल को वाटिकन कोविड-19 आयोग से जोड़ा। पोप के आदेश और समग्र मानव विकास के लिए गठित परमधर्मपीठीय परिषद के सहयोग से 40 कारितास योजनाओं के समर्थन हेतु एक कोष बनायी गईं। एकजुटता के इस भाव ने अन्य स्थानीय अभिनेताओं को समर्थन की पेशकश में कारितास में शामिल होने के लिए प्रेरित किया है। उदाहरण के लिए बंगलादेश के रेस्टॉरेंट के मालिक ने शर्णार्थियों को भोजन देकर स्थानीय कारितास संगठन का समर्थन किया है।

एक वर्षगांठ मूल्यांकन करने का अवसर है, लेकिन यह फिर से लॉन्च करने का भी अवसर है। आने वाले वर्षों में कारितास इंटरनैशनल किस पर ध्यान केंद्रित करेगा? क्या आप इस वर्षगांठ के लिए कोई विशेष अभियान शुरू कर रहे हैं?

इस महामारी ने हमें दिखाया है कि मानवता और सृष्टि की देखभाल के बिना हम अधिक कमजोर हो जाएँगे। आज दुनिया को पहले से कहीं अधिक हृदय एवं मन के मौलिक परिवर्तन की और सृष्टि के साथ मेल-मिलाप की जरूरत है। जब हम अपने उदार कार्यों को कर रहे हैं हमें खास रूप से प्रेम की सभ्यता एवं मानवता और आमघर की देखभाल करने की जरूरत है, इन्हीं बिंदुओं पर हमारा वैश्विक अभियान है, जिसे हम अपनी वर्षगांठ के अवसर पर शुरू करेंगे और जो 2024 तक चलेगा।

26 October 2021, 16:55