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ग्रीस के लेसबोस स्थित अस्थायी शरणर्थी शिविर , 12.05.2021  ग्रीस के लेसबोस स्थित अस्थायी शरणर्थी शिविर , 12.05.2021  

शरणार्थियों एवं आप्रवासियों की सुरक्षा का वाटिकन ने किया आह्वान

संयुक्त राष्ट्र संघ में परमधर्मपीठ के स्थायी पर्यवेक्षक महाधर्माध्यक्ष इवान यूरकोविट्स ने शरणार्थियों एवं आप्रवासियों की सुरक्षा हेतु राष्ट्रों की साझा ज़िम्मेदारी का आह्वान किया है।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

जिनिवा, शुक्रवार, 9 जुलाई 2021 (रेई,वाटिकन रेडियो): संयुक्त राष्ट्र संघ में परमधर्मपीठ के स्थायी पर्यवेक्षक महाधर्माध्यक्ष इवान यूरकोविट्स ने शरणार्थियों एवं आप्रवासियों की सुरक्षा हेतु राष्ट्रों की साझा ज़िम्मेदारी का आह्वान किया है।  

परमधर्मपीठीय पर्यवेक्षक ने कहा, "चूँकि विश्व के विभिन्न क्षेत्रों में बलात प्रवास, नाटकीय रूप से बढ़ रहा है, अधिक उदार पुनर्वास नीतियों की और, साथ ही, साझा ज़िम्मेदारी के लिये मज़बूत प्रतिबद्धता की नितान्त आवश्यकता है।"

केवल संख्या नहीं

शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र संघीय उच्चायुक्त (यूएनएचसीआर) के अनुसार, 2020 में समस्त विश्व में युद्ध, हिंसा और मानवाधिकारों के उल्लंघन के साथ-साथ प्राकृतिक आपदाओं से जबरन विस्थापित लोगों की संख्या बढ़कर 8 करोड़ 24 लाख हो गई है।

जिनिवा स्थित संयुक्त राष्ट्र संघीय उच्चायुक्त (यूएनएचसीआर) की कार्यकारी समिति की 81 वीं स्थायी समिति को सम्बोधित एक वकत्व्य में इस सप्ताह वाटिकन के स्थायी पर्यवेक्षक मिशन ने स्मरण दिलाया कि शरणार्थी एवं आप्रवासी केवल संख्या नहीं हैं, अपितु वे हमारे भाई-बहन हैं, इसलिये किसी को भी पीछे नहीं जा सकता।     

टिकाऊ समाधान की जरूरत

वाटिकन के वकतव्य में कहा गया कि यह बेहद दुख का विषय है कि कोविद-19 महामारी टिकाऊ समाधान की उपलब्धि में बाधा बनी है। इस बात पर भी चिन्ता व्यक्त की गई कि महामारी ने शरणार्थी सम्बन्धी मूलभूत कानूनों को चुनौती दी है, विशेष रूप से, शरण लेने के अधिकार को और ग़ैर-प्रतिशोध के मुख्य सिद्धांत को। तथापि, यह स्मरण दिलाया गया कि शरण लेने का अधिकार जिनिवा की संविदा में निहित है, जो "आखिरकार यह स्वीकार करता है कि हम एक मानव परिवार हैं"।     

अनुपयुक्त प्रत्युत्तर

वकतव्य में इस तथ्य की पुनरावृत्ति की गई कि महामारी बढ़ती चली जा रही है तथा साथ ही शरणार्थियों एवं आप्रवासियों की समस्याओं का भी उपयुक्त उत्तर नहीं मिल पा रहा है। ऐसी स्थिति में शरणार्थियों एवं आप्रवासियों की प्राथमिक आवश्यकताओं जैसे स्वास्थ्य एवं शिक्षा ज़रूरतों पर भी दुष्प्रभाव पड़ा है।   

सहयोग और एकात्मता बढ़ाने की ज़रूरत

वाटिकन मिशन ने और अधिक मज़बूत सहयोग एवं एकात्मता का आह्वान करते हुए कहा कि इस समय यह अनिवार्य है कि बड़ी संख्या में शरणार्थियों एवं विस्थापितों को शरण देनेवाले मेज़बान देशों की मदद की जाये तथा यह याद रखा जाये कि शरणार्थी और विस्थापित व्यक्ति "केवल सहायता मांगनेवाली वस्तुएं नहीं हैं", बल्कि "अधिकारों और कर्तव्यों के विषय" हैं जो मेजबान देशों को सकारात्मक योगदान दे सकते हैं।  

09 July 2021, 10:57