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एक कलीसिया, एक घर, एक परिवार – आप्रवासी व शरणार्थी दिवस हेतु पोप का संदेश

107वें विश्व आप्रवासी एवं शरणार्थी दिवस के पूर्व जारी एक वीडियो में कई आप्रवासियों ने पल्ली समुदाय में स्वागत किये गये अपने व्यक्तिगत अनुभव को साझा किया है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार, 5 जून 2021 (रेई) – संत पापा फ्राँसिस ने विश्व आप्रवासी एवं शरणार्थी दिवस 2021 के लिए प्रकाशित अपने संदेश में भ्रातृत्व एवं समावेश के महत्व पर प्रकाश डाला है, जिसको 26 सितम्बर को मनाया जाएगा।

संत पापा ने कहा है कि "यह मायने नहीं रखता कि आप कहाँ हैं और क्यों वहाँ हैं, हर बपतिस्मा प्राप्त व्यक्ति स्थानीय कलीसियाई समुदाय का पूर्ण सदस्य है, एक कलीसिया का सदस्य, एक घर का निवासी, एक परिवार का हिस्सा है।"

आप्रवासियों एवं शरणार्थियों के लिए विश्व दिवस के संदेश को 3 मई को प्रकाशित किया गया। इसकी विषयवस्तु है, "एक वृहद "हम" की ओर, दुनिया में हमारी साझा यात्रा के लिए एक स्पष्ट क्षितिज का संकेत।"

इस अवसर से पहले वाटिकन के आप्रवासी एवं शरणार्थी विभाग ने शुक्रवार को अपने वीडियो की श्रृंखला में एक वीडियो प्रकाशित किया। जिसका शीर्षक है, "एक कलीसिया, एक घर, एक परिवार।"

यह कई आप्रवासियों के अनुभवों को साझा करता है जिन्हें पल्ली में एक सदस्य के रूप में स्वागत किया गया है।

क्वेबेक के जीन फ्राँसिस ने कहा, "मैं यहाँ संत लूकस पल्ली में बहुत अपनापन महसूस करता हूँ। यह सचमुच आत्मीयता का समुदाय है।"  

फिलीपींस के मेलेने रेयेस ने कहा, "हमें हमेशा स्वीकारा जाता है और हम अन्य पल्लीवातियों से कभी भी अलग महसूस नहीं करते। आपको हमेशा मुस्कान, आलिंगन मिलेगा और आप पुछने के लिए किसी के पास भी जा सकते हैं।"

उन्होंने कहा, "यह एक विशेष पल्ली है क्योंकि हम बहुत अधिक अपनापन महसूस करते हैं, यह मायने नहीं रखता कि हमारी पृष्टभूमि क्या है और मैं किनसे बात कर रहा हूँ।"

कोलोम्बिया की लिना मारिया ने कहा कि पल्ली के लोग विभिन्न स्थानों से आये हुए हैं फिर भी वे विकसित हो चुके हैं क्योंकि वहाँ बहुत अधिक विविधता है।

उन्होंने कहा कि यद्यपि पलायन करनेवाले लोग अपने मूल स्थान के लोगों से अलग हो जाते हैं, वे मित्रों को पाते हैं जो कलीसिया में एक सच्चे भाई अथवा बहन के रूप में होते हैं जो सचमुच एक परिवार (और) एक घर है। 

 

05 June 2021, 16:03