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महाधर्माध्यक्ष पौल गालाघार सन्त पापा फ्राँसिस के साथ, फाईल तस्वीर महाधर्माध्यक्ष पौल गालाघार सन्त पापा फ्राँसिस के साथ, फाईल तस्वीर  (Vatican Media)

जलवायु परिवर्तन के संकट को उजागर करने हेतु सम्मेलन, वाटिकन

वाटिकन, इटली और यूनाईटेड किंगडन, गलास्गो में जलवायु परिवर्तन पर आगामी नवम्बर माह के लिये निर्धारित, कॉप 26 विश्व सम्मेलन से पहले, एक बैठक में भाग ले रहे हैं। इस बैठक का लक्ष्य जलवायु परिवर्तन के संकट से उभरने के लिये धर्म, विश्वास और नैतिकता पर आधारित योगदान देना है।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर, वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 18 जून 2021 (रेई, वाटिकन रेडियो): वाटिकन, इटली और यूनाईटेड किंगडन, गलास्गो में जलवायु परिवर्तन पर आगामी नवम्बर माह के लिये निर्धारित, कॉप 26 विश्व सम्मेलन से पहले, एक बैठक में भाग ले रहे हैं। इस बैठक का लक्ष्य जलवायु परिवर्तन के संकट से उभरने के लिये धर्म, विश्वास और नैतिकता पर आधारित योगदान देना है।

महान चुनौती

गुरुवार को परमधर्मपीठीय प्रेस ने एक संवाददाता सम्मेलन में "विश्वास और विज्ञान" शीर्षक से, 04 अक्टूबर के लिये निर्धारित, उक्त बैठक की घोषणा की जिसमें सम्भवतः सन्त पापा फ्राँसिस भी शामिल होंगे। बैठक का आयोजन परमधर्मपीठ के लिये यू.के. तथा इटली के राजदूतावासों द्वारा किया जा रहा है, जिसमें कई धार्मिक नेता एवं वैज्ञानिकों के भाग लेने का अनुमान है।  

बैठक में परमधर्मपीठ की भूमिका की प्रस्तावना करते हुए, गुरुवार को, वाटिकन राज्य के विदेश हाधर्माध्यक्ष पौल गालाघार ने पत्रकारों से कहा कि सन्त पापा फ्राँसिस ने जलवायु परिवर्तन संकट को हमेशा से गम्भीरतापूर्वक लिया है, इसलिये ऐसा सम्भव है कि वे भी बैठक में भाग लें। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन वर्तमानकाल के समक्ष प्रस्तुत एक महान चुनौती है, जिसके प्रति उदासीन नहीं रहा जा सकता।

जलवायु समाधानों में विश्वास की भूमिका

महाधर्माध्यक्ष गालाघार ने कहा, "इन चुनौतियों का सामना करने के लिये समस्त संसाधनों को आकर्षित करना होगा तथा इनमें विश्वास, धर्म और मानवता के आध्यात्मिक आयाम, निश्चित्त रूप से, शामिल हैं।" उन्होंने कहा यदि इन आयामों को नज़रअन्दाज़ कर दिया जाये तथा केवल राजनीति एवं विज्ञान पर निर्भर रहा जाये तो हम सफलता कदापि नहीं पा सकेंगे।

महाधर्माध्यक्ष ने इस बात पर बल दिया कि जलवायु परिवर्तन का सामना करने की आवश्यकता के बारे में जागरुकता सघन हुई है तथा विगत कुछ समय से विश्व पर छाये महामारी के संकट ने दर्शा दिया है विभिन्न आर्थिक, सामाजिक और आहार संबंधी संकट पृथ्वी के सभी लोगों को प्रभावित करते हैं।

सन्त पापा फ्राँसिस के शब्दों को उद्धृत कर उन्होंने कहा, "सबकुछ अन्तरसम्बन्धित है, इसलिये इन चुनौतियों का सामना केवल एकजुट होकर ही किया जा सकता है, जिसमें धर्म और विश्वास अद्वितीय ढंग से योगदान प्रदान कर सकते हैं।" उन्होंने कहा कि धर्म जीवन, विश्व और जो कुछ उसमें है उसकी अखण्ड दृष्टि है, क्योंकि धर्म उन सब मुद्दों का आलिंगन करता है जो मानवीय अस्तित्व एवं मानव जीवन को प्रभावित करते हैं।   

ग़ौरतलब है कि संयुक्त राष्ट्र संघ के तत्वाधान में आयोजित जलवायु परिवर्तन पर विश्व सम्मेलन कॉप-26 आगामी नवम्बर माह में ग्लास्गो शहर में होनेवाला है, जिसमें विश्व के राष्ट्र प्रतिनिधि भाग लेनेवाले हैं।  

18 June 2021, 10:50