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"पवित्र आत्मा हमें एकता, सहमति, विविधता के सामंजस्य के लिए प्रेरित करता है" - पोप फ्रांसिस "पवित्र आत्मा हमें एकता, सहमति, विविधता के सामंजस्य के लिए प्रेरित करता है" - पोप फ्रांसिस  संपादकीय

विस्मय, आराधना और सिनॉड

ख्रीस्त के पावनतम शरीर और रक्त के महापर्व के अवसर पर अपने उपदेश में संत पापा फ्रांसिस ने हर सच्ची कलीसियाई यात्रा के स्रोत की ओर संकेत दिया।

अंद्रेया तोरनियेली

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 8 जून 2021 (वीएनएस)- "यदि विस्मय एवं आराधना न हो तो कोई दूसरा रास्ता नहीं है जो हमें प्रभु के पास ले जाए। सिनॉड भी नहीं ले सकता, कुछ भी नहीं...।" यह बात संत पापा फ्राँसिस ने रविवार को ख्रीस्त के पावनतम शरीर और रक्त के महापर्व के अवसर पर मिस्सा के दौरान उपदेश में कही। इसके द्वारा संत पापा आगामी सिनॉड एवं सिनॉडल यात्रा की ओर इशारा करते हैं। वे कहते हैं कि हर सच्ची कलीसियाई यात्रा के लिए, अपने आपके छोटे कमरे को छोड़ना तथा विस्मय एवं आराधना के महान स्थान में प्रवेश करना है। जिसको हम अक्सर छोड़ देते हैं। हम अपने क्रिया-कलापों में मुलाकात करना, पुनः एक साथ आना और प्रेरितिक देखभाल के लिए एक साथ सोचना नहीं चाहते हैं।"  

ला चिविल्ता कत्तोलिका में पिछले साल सितम्बर माह में प्रकाशित लेख में, संत पापा फ्रांसिस ने "विरी प्रोबाती" पर वर्षों पुराने सवाल तथा अमाजोन पर सिनॉड से जुड़े विवाहित व्यक्ति के अभिषेक के प्रस्ताव पर ध्यान दिया है। जिसमें एक बहस हुई...जोरदार बहस ...एक अनुभवी बहस किन्तु आत्मपरख नहीं जो एक अच्छी और उचित सहमति या सापेक्ष बहुमत पर पहुंचने के अलावा, कुछ नहीं है। हमें समझना चाहिए कि सिनॉड किसी संसद से बढ़कर है, और इस विशिष्ट मामले में वह इस गतिशीलता से नहीं बच सकता। इस विषय में यह सृजनात्मक है और एक आवश्यक संसद भी है किन्तु इससे बढ़कर नहीं।

बिना विस्मय के (जो कृपा द्वारा संभव है और आरोपण द्वारा नहीं) और बिना आराधना के कलीसिया दुनियावी बन जाती है और अंततः अभिमानी राजनीति एवं विचारधारा के जाल में फंस जाती है और नायक नहीं रह जाती बल्कि यह रणनीति, कार्यनीति, संचार विपणन की आतिशबाजी, दबाव समूह और अपने संबंधित एजेंडा के साथ एक संघ बन जाती है।

यह कुछ हद तक विकृत करना है जो किसी घाव और पाप से अधिक गंभीर है, क्योंकि यह कलीसिया को अंदर से खाली और सूखा कर देता है, जो पवित्र आत्मा को नहीं सुनती बल्कि हमें अपनी योजनाओं, संरचनाओं और सुधार योजनाओं की दक्षता पर छोड़ देती है। एक जोखिम जिससे संत पेत्रुस के उत्ताधिकारी कुछ समय से चेतावनी दे रहे हैं। पेंतेकोस्त के दिन के प्रवचन में भी संत पापा ने याद किया कि "दिलासा दाता सब कुछ में प्राथमिकता की पुष्टि करता है।" आज यदि हम पवित्र आत्मा की सुनते हैं, तब हम रूढ़िवादियों और प्रगतिवादियों, परंपरावादियों और नवप्रवर्तकों, दाएं और बाएं पर ध्यान केंद्रित नहीं करेंगे। यदि ये मानदंड हैं, तो इसका मतलब है कि कलीसिया में आत्मा को भुला दिया गया है। पवित्र आत्मा हमें एकता, सौहार्द, सामंज्य के लिए प्रेरित करता है। यह हमें भाइयों और बहनों के बीच एक ही शरीर के अंग के रूप में दिखाता है। आइये, हम पूरा को देखें, क्योंकि दुश्मन चाहता है कि विविधता विरोध में बदल जाए और इसी वजह से वह उन्हें विचारधाराओं में बदल देता है।”

 

08 June 2021, 16:17