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इन्डोनेशिया जावा के बौद्ध भिक्षु मंदिर  समारोह के लिए जाते हुए इन्डोनेशिया जावा के बौद्ध भिक्षु मंदिर समारोह के लिए जाते हुए 

वाटिकन द्वारा बौद्धों से देखभाल व एकजुटता की संस्कृति का आग्रह

वाटिकन की अंतरधार्मिक वार्ता के लिए बनी परमधर्मपीठीय परिषद (पीसीआईडी) ने 26 मई को वेसाख के बौद्ध उत्सव के लिए एक संदेश जारी किया।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बुधवार 19 मई 2021 (वाटिकन न्यूज) : दुनिया भर के बौद्ध समुदाय बुधवार, 26 मई को वेसाख का पर्व मनाते हैं। इसे बुद्ध दिवस भी कहा जाता है क्योंकि यह गौतम बुद्ध के जन्मदिन का प्रतीक है, हालांकि यह पर्व बुद्ध के जीवन के तीन महत्वपूर्ण चरणों का जश्न मनाता है - उनका जन्म, ज्ञान प्रप्ति और निधन। कहा जाता है कि सभी पांचवें महीने की पूर्णिमा को हुए थे।

हर साल वाटिकन की अंतरधार्मिक वार्ता के लिए परमधर्मपीठीय परिषद (पीसीआईडी) बौद्धों को एकजुटता और भाईचारे के संवाद को बढ़ावा देने के लिए अभिवादन का संदेश भेजती है। इस वर्ष, अंतरधार्मिक वार्ता के लिए बने परमधर्मपीठीय परिषद की ओर से परिषद के अध्यक्ष, कार्डिनल मिगुएल एंजेल आयुसो ने बौद्ध समुदाय को वेसाख पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए संदेश में लिखा कि गौतम बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति और निधन का यह वार्षिक पर्व दुनिया भर के बौद्धों के दिलों में खुशी, शांति और आशा लाए।

महामारी के बीच सार्वभौमिक एकजुटता

पीसीआईडी ने संदेश में कहा, कि "वर्तमान विश्व की स्थिति, जिसे कोविड -19 महामारी द्वारा दुखद रूप से चिह्नित किया गया है, सभी धर्मों के अनुयायियों को मानव समुदाय की सेवा में नए तरीकों से सहयोग करने की चुनौती देता है।" पीसीआईडी ने संत पापा फ्राँसिस को याद किया जहाँ उन्होंने अपने विश्वुत्र में ‘फ्रातेल्ली तुत्ती’ में, एक सार्वभौमिक एकजुटता की आवश्यकता को दोहराया जो मानवता को उन कठिन संकटों को एक साथ दूर करने की अनुमति देता है जो इसे खतरे में डालते हैं, क्योंकि "कोई भी अकेला अपने को नहीं बचा सकता है।"

पिछले साल के वेसाख अभिवादन में, पीसीआईडी ने दो धर्मों के सामान्य मूल्यों और ज्ञान को रेखांकित किया जो महामारी के कारण कठिन समय को संबोधित करने में सहयोग का आह्वान करते हैं। पीसीआईडी नोट करता है, "कोविद -19 महामारी के कारण होने वाली पीड़ा ने हमें अपनी साझा लाचारी और अन्योन्याश्रितता से अवगत कराया है।" "हम अपनी धार्मिक परंपराओं में निहित एकजुटता की खोज और अभ्यास करने के लिए बुलाये गये हैं।"

पीसीआईडी ने संत पापा फ्राँसिस के 2021 विश्व शांति दिवस के संदेश को याद किया, जहाँ उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि "सब कुछ आपस में जुड़ा हुआ है और यह कि हमारे अपने जीवन और प्रकृति के साथ हमारे संबंधों की वास्तविक देखभाल भाईचारे, न्याय और दूसरों के प्रति विश्वास से अविभाज्य है।"

सभी के लिए असीम प्रेम

"एकजुटता और सक्रिय देखभाल" के बारे में बोलते हुए, कार्डिनल आयुसो ने बौद्ध शिक्षण "मेट्टा" (प्रेमपूर्ण दयालुता) को याद किया, जो बौद्धों को "सभी के लिए असीम प्रेम" का विस्तार करने के लिए प्रोत्साहित करता है। ‘मेट्टा सुट्टा’ के अनुसार, "जैसे एक माँ दिलोजान से अपने इकलौते बच्चे की रक्षा करती है, उसी तरह सभी जीवों के प्रति अथाह प्रेम का भाव पैदा करें।"

महात्मा बुद्ध ने अपने अनुयायियों से "अच्छे काम जल्दी-जल्दी" करने का आग्रह किया और उन्होंने चेतावनी दी, “मनुष्य को बुराई से बचना चाहिए, क्योंकि जो अच्छा करने में धीमा होता है उसका मन बुराई करने में प्रसन्न होता है।"  

एक साथ मानव परिवार की सेवा करना

पीसीआईडी आग्रह करता है कि महामारी संकट मानव परिवार की सेवा में बौद्धों और ख्रीस्तियों के बीच दोस्ती के बंधन को मजबूत करता है। वे "संवाद की संस्कृति को मार्ग के रूप में, विधि और मानक के रूप में पारस्परिक समझ," और आपसी सहयोग को आचार संहिता के रूप में अपनाकर ऐसा कर सकते हैं, जैसा कि फ्रातेल्ली तुत्ती में संत पापा फ्राँसिस द्वारा आग्रह किया गया था।

पीसीआईडी विभिन्न धार्मिक परंपराओं के प्रमुख त्योहारों जैसे रमजान (इस्लाम), वेसाख (बौद्ध धर्म), दिवाली (हिंदू धर्म), गुरु नानक प्रकाश दिवस (सिख धर्म) और महावीर जन्म कल्याणक दिवस (जैन धर्म) के अवसर पर संदेश जारी करता है। ख्रीस्तीय एकता को बढ़ावा देने के लिए बने परमधर्मपीठीय परिषद द्वारा यहूदी धर्म के साथ काथलिक कलीसिया के संबंधों पर ध्यान रखा जाता है।

26 May 2021, 15:41