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वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल पीयेत्रो परोलिन वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल पीयेत्रो परोलिन 

कार्डिनल परोलिन ˸ सुसमाचार का साक्ष्य देने हेतु कलीसिया एकजुट हो

वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल पियेत्रो परोलिन ने स्पानी रेडियो नेटवर्क सीओपीई को दिये एक साक्षात्कार में अपनी पुरोहितीय बुलाहट से लेकर पोप फ्राँसिस के साथ मुलाकात के विभिन्न मुद्दों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कलीसिया में विभाजन और चीन की कलीसिया की सच्चाई पर प्रकाश डाला।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 6 अप्रैल 2021 (रेई)- कार्डिनल परोलिन ने कहा, "हम एकता की सेवा में हैं" कलीसिया की स्वतंत्रता, धार्मिक स्वतंत्रता एवं साथ ही साथ, विश्व शांति की रक्षा करने एवं उसे बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत हैं। आप गौर कीजिये कि कलीसिया शांति के लिए कितना अधिक कार्य करती है। मैं कूटनीति को इस नजरिये से देखता हूँ।"

स्पानी रेडियो नेटवर्क सीओपीई के सम्पादक जोश लुईस रेस्तान को दिये साक्षात्कार में कार्डिनल ने कई मुद्दों पर प्रकाश डाला, जैसे- राज्य सचिव की जिम्मेदारी और पोप की सेवा, रोमी कार्यालय, कलीसिया के भीतर तनाव, चीन की कलीसिया की सच्चाई, इराक की प्रेरितिक यात्रा और यूरोप में कलीसिया की प्रेरिताई।

परमधर्मपीठ एवं स्थानीय कलीसिया के बीच संबंध मजबूत करना

कार्डिनल परोलिन जिन्हें विश्वभर की कलीसिया की विस्तृत समझ है उन्होंने अपनी बुलाहट और 40 वर्षों पहले पोप की सेवा करने के अवसर मिलने के बारे बतलाया।

उन्होंने कहा, "मैं मानता हूँ कि मेरी मौलिक बुलाहट एक पुरोहित के रूप में है। मैं बुलाहट को महसूस किया है और अब भी एक पुरोहित, प्रभु के सेवक के रूप में बुलाहट को महसूस करता हूँ जो कलीसिया में आत्माओं की सेवा करता है।" उन्होंने याद किया कि पुरोहिताई को जीने के कई रास्ते हैं और कलीसियाई कूटनीति उनमें से एक है।

"मैंने एक पुरोहित एवं एक कूटनीतिज्ञ के बीच कभी विरोधाभास नहीं पाया है क्योंकि द्वितीय वाटिकन महासभा के अनुसार प्रेरितिक राजदूत का कार्य एक प्रेरितिक कार्य है जिसका उद्देश्य परमधर्मपीठ एवं स्थानीय कलीसिया के बीच संबंध को मजबूत करना है।

रोमी कार्यालय में सुधार

वाटिकन राज्य सचिव का कार्य पोप द्वारा रोमी कार्यालय (रोमन कूरिया) के सुधार कार्य पूरा हो जाने के बाद भी जारी रहेगा। कूरिया में एक नया प्रेरितिक संविधान को लागू किया जाएगा, संभवतया उसके पहले शब्द "प्रेदिकाते एवंजेलियुम" के शीर्षक के साथ।

इस तरह वाटिकन राज्य सचिव, राज्य के सचिवालय के तीन विभागों : आम मामले, राज्य के साथ संबंध और कूटनीतिक कर्मचारियों के द्वारा सहयोग करेगा, जो कलीसिया के संचालन में पोप को नजदीकी से सहयोग देते हैं।

पोप फ्राँसिस के साथ कार्य

संत पापा फ्राँसिस के प्रशासन के एक असाधारण साक्षी के रूप में कार्डिनल परोलिन याद करते हैं कि 8 साल पहले वे आश्चर्यचकित हुए थे जब वे वेनेजुएला में प्रेरितिक राजदूत के रूप में कार्य कर रहे थे, संत पापा फ्राँसिस अपने पोप चुने जाने के दो माह बाद ही उन्हें वाटिकन राज्य सचिव के लिए पूछा था।

वे बतलाते हैं कि संत पापा फ्राँसिस के व्यक्तित्व में विविधता किस तरह कलीसिया की सेवा में लाभदायक है। जैसा कि वे स्वयं कहते हैं, "यह हमारी विविधताओं को दुनिया के लिए समृद्धि में बदलना है। यह असहमति का कारण न बने बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के दृष्टिकोण, शैली, संवेदनशीलता, संस्कृति और आध्यात्मिकता के सहयोग से एक साथ काम किया जा सके।"  

सुसमाचार की घोषणा में विश्वस्त कलीसिया

संत पापा फ्राँसिस के साथ काम करने का अनुभव बतलाते हुए कार्डिनल ने कहा कि उनमें सबसे प्रभावित करनेवाली बात है उनकी महान सादगी।

"यदि आप उनके करीब आयेंगे तब आप महसूस करेंगे कि वे एक सरल बिना औपचारिकता के व्यक्ति हैं। वे एक ऐसे व्यक्ति हैं जो संबंधों एवं दूसरों के साथ सामीप्य पर ध्यान देते हैं। वे लोगों के साथ मुलाकात करने की कोशिश करते हैं। उनके कार्य करने की विशेषता है कि वे सुसमाचार की घोषणा में कलीसिया को अधिक विश्वसनीय बनाना चाहते हैं।

कलीसिया में विभाजन पर चिंता

कलीसिया में विभाजन का विषय, जिसको रूढ़िवादी पक्ष और प्रगतिशील पक्ष कहा जा सकता है, कार्डिनल परोलिन ने जोर दिया कि यह स्थिति कलीसिया को केवल हानि पहुँचा सकता है जबकि ख्रीस्त ने इसकी एकता के लिए प्रार्थना की है।  

उन्होंने कहा कि यह चिंता का विषय है, समस्या किस तरह की है उसपर चिंतन करना है, शायद यह कलीसिया के सुधार पर संत पापा के जोर देने से उत्पन्न हुई है और इसमें बहुत अधिक उलझन है।

कलीसिया की संरचना, विश्वास के भंडार, संस्कारों और प्रेरितिक मिशन को बदला नहीं जा सकता किन्तु कलीसिया के जीवन को नवीकृत किया जा सकता है उन क्षेत्रों में जहाँ हम अपनी कमजोरियों के कारण संघर्ष करते हैं परन्तु इसके लिए लगातार नवीनीकरण की आवश्यकता है।

उन्होंने गौर किया कि मूल और अपरिवर्तनीय तथा जो मौलिक नहीं है एवं बदला जा सकता है उनके बीच फर्क नहीं कर पाने की असमर्थता के कारण विभाजन एवं प्रतिरोध कभी-कभी उलझन उत्पन्न करते हैं जबकि बदलाव सुसमाचार की भावना के अनुरूप होनी चाहिए।

चीन की कलीसिया के लिए आशा

चीन में कलीसिया की वास्तविकता पर प्रकाश डालते हुए कार्डिनल परोलिन ने कहा कि परमधर्मपीठ इसे बड़े सम्मान के साथ देखता है, इसके इतिहास की पीड़ा को समझता है परन्तु उससे महान आशा रखता है।

जो कदम उठाया गया है वह कलीसिया में सही दिशा में है यद्यपि सभी समस्याओं का हल नहीं किया गया है एवं वे अभी भी हैं और उन्हें दूर करने में समय लगेगा।

इराक की कलीसिया का महान साक्ष्य

इराक में संत पापा की प्रेरितिक यात्रा एवं पीड़ित कलीसिया से मुलाकात की याद करते हुए कार्डिनल ने कहा कि यह अब भी संघर्ष कर रही है एवं अविश्वास और अनिश्चितता की स्थिति में जी रही है जो ख्रीस्तियों को देश में अपने भविष्य को देखने नहीं देती।

कार्डिनल ने कहा, "उन्होंने हमें जो सीख दी है वह है विश्वास का साक्ष्य, शहीद होने तक। यह महान सीख है जिसको हम इराक की कलीसिया से सीख सकते हैं। आक्रमण एवं हत्याओं के बावजूद ख्रीस्तीय अपने काथलिक विश्वास को बड़े साहस के साथ प्रकट करते रहे। यह महान सीख है एवं एकात्मता के लिए एक आह्वान भी। वे हमें सभी कठिनाइयों के बावजूद निष्ठावान बने रहने की सीख देते हैं किन्तु साथ ही अधिक एकात्मता की मांग करते हैं।"

प्रार्थना की आवश्यकता

कार्डिनल ने कहा कि आज हमें पहले से कहीं अधिक प्रार्थना की जरूरत है। हम सभी को प्रार्थना में एकजुट होना है ताकि प्रभु हमें सुसमाचार प्रचार के मिशन के लिए विश्वस्त रहने एवं आधुनिक विश्व में कलीसिया के सदस्य बने रहने में मदद दें।

06 April 2021, 13:46