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म्यांमार  यांगून में सैन्य बल के विरोध में प्रदर्शन करते नागरिक म्यांमार यांगून में सैन्य बल के विरोध में प्रदर्शन करते नागरिक  (ANSA)

वाटिकन द्वारा म्यांमार में शांति व सामाजिक न्याय का आग्रह

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार निकाय ने शुक्रवार को एक प्रस्ताव पास किया जिसमें, म्यांमार की सेना को देश के निर्वाचित नेताओं और अन्य अधिकारियों को रिहा करने और प्रदर्शनकारियों पर हिंसा का उपयोग करने से परहेज करने का आह्वान किया। परमधर्मपीठ ने लोगों के साथ अपनी निकटता व्यक्त की और उन्हें संकट के लिए एक शांतिपूर्ण संकल्प लेने हेतु आग्रह किया।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

जिनेवा,सोमवार 15 फरवरी 2021 (वाटिकन न्यूज) :  म्यांमार की नेता आंग सान सू की के समर्थक शुक्रवार को पुलिस के साथ भिड़ गए, क्योंकि देशभर में लोकतंत्र समर्थक सैकड़ों की तादाद में प्रदर्शनों में भाग लिया, हालांकि सैन्य जंता पांच या अधिक लोगों की सभाओं पर रोक लगा दी है। ज्यादातर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन अब तक का सबसे बड़ा प्रदर्शन था।

बड़े पैमाने पर सड़क प्रदर्शनों ने शनिवार को अपने दूसरे सप्ताह में प्रवेश किया, न तो प्रदर्शनकारियों और न ही सेना ने टकरावों से पीछे हटने के कोई संकेत दिखाए।

परमधर्मपीठ की आध्यात्मिक निकटता

“इन दिनों में, संत पापा फ्राँसिस बड़े ध्यान और गहरी चिंता के साथ म्यांमार में हो रही गतिविधियों का संज्ञान ले रहे हैं। जो कि 2017 में अपने प्रेरितिक यात्रा के समय से,संत पापा फ्राँसिस इस प्यारे देश को सस्नेह अपने हृदय में रखे हुए हैं।

जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र के लिए परमधर्मपीठ के स्थायी पर्यवेक्षक, महाधर्माध्यक्ष इवान जुरकोविच ने 12 फरवरी को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 29 वें विशेष सत्र में यह टिप्पणी की, जिसने दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्र में संकट को संबोधित किया। उन्होंने कहा, "इस सबसे नाजुक क्षण में, परमधर्मपीठ म्यांमार के लोगों के साथ एक बार फिर अपनी आध्यात्मिक निकटता, प्रार्थना और एकजुटता का आश्वासन देना चाहता है।"

संकट

1 फरवरी को म्यांमार की सेना ने अपने लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित नेताओं की सरकार (एनएलडी) से सत्ता कब्जा कर लिया। नागर सरकार और शक्तिशाली सेना के बीच बढ़ते तनाव के दिनों के बाद तख्तापलट हुआ, जिसमें दावा किया गया कि नवंबर का आम चुनाव, एनएलडी द्वारा धोखाधड़ी से भारी बहुमत से जीता गया था। तब से गिरफ्तारी बेरोकटोक जारी है।

म्यांमार के सैन्य तख्तापलट के विरोधियों ने शुक्रवार को लगातार सातवें दिन बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया। सू की की नजरबंदी पर रोष जताते हुए आलोचकों की लगातार गिरफ्तारी हुई।

जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने शुक्रवार को कहा कि तख्तापलट के बाद से म्यांमार में अधिकारियों, कार्यकर्ताओं और भिक्षुओं सहित 350 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें से कुछ "संदिग्ध आधार" पर आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे हैं। "रात में अपहरण बंद करो," यांगून में प्रदर्शनकारियों द्वारा हाल के दिनों में छापेमारी और गिरफ्तार करने के जवाब में किए गए संकेतों में से एक था।

संवाद और मानव गरिमा

महाधर्माध्यक्ष जुरकोविच ने कहा, ''परमधर्मपीठ का आग्रह है कि जो लोग देश की जिम्मेदारी  को संभालते हैं, वे खुद को और अपने कार्यों को सामाजिक और न्याय को बढ़ावा देने के लिए, मानवीय मूल एवं नागरिक अधिकारों की सेवा में एक सामंजस्यपूर्ण, लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए स्थिरता के लिए ईमानदारी और तत्परता के साथ करेंगे। "

उन्होंने "सभी से उन तत्वों को एक तरफ रखने के लिए आमंत्रित किया, जो संवाद की अपरिहार्य प्रक्रिया और मानवीय गरिमा के पारस्परिक सम्मान के रास्ते में आड़े आते हैं।" चल रहे तनावों के लिए एक शांतिपूर्ण और तेज संकल्प की उम्मीद करते हुए उन्होंने कहा कि परमधर्मपीठ का विश्वास है कि "आगे की बातचीत इस तरह की वांछित शांति ला सकती है।"

संत पापा फ्राँसिस

संत पापा फ्राँसिस ने म्यांमार के लोगों के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त की है और उन सत्ता के अधिकारियों से अपील की है कि वे आम लोगों की सेवा करने की अपनी इच्छा दिखाएं। 7 फरवरी को संत पेत्रुस प्रांगण में देवदूत प्रार्थना के दौरान बोलते हुए, उन्होंने प्रार्थना की कि जो लोग सत्ता में हैं, वे सौहार्दपूर्ण, लोकतांत्रिक सह-अस्तित्व के लिए सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने और जनहित की सेवा करने के लिए ईमानदारी से इच्छा का प्रदर्शन करें।

और फिर, अगले दिन राजनयिक कोर के अपने संबोधन में, संत पापा ने राष्ट्र के लोगों के प्रति अपना स्नेह और निकटता व्यक्त की। उन्होंने निराशा व्यक्त की कि "हाल के वर्षों में लोकतंत्र के लिए किया गया रास्ता क्रूरतापूर्वक बाधित हुआ"। उन्होंने उम्मीद जताई कि हिरासत में लिए गए राजनीतिक नेताओं को "देश की भलाई हेतु किए गए एक ईमानदार संवाद के प्रोत्साहन के संकेत के रूप में तुरंत रिहा किया जाएगा।"

15 February 2021, 14:15