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अप्रीका के बुरकीना फासो में आन्तरिक रूप से विस्थापित लोग अप्रीका के बुरकीना फासो में आन्तरिक रूप से विस्थापित लोग  (AFP or licensors)

कोविद पीड़ित देशों में निर्धनता के विरुद्ध कार्यवाही की आवश्यकता

जिनिवा स्थित संयुक्त राष्ट्र संघीय कार्यालय में, परमधर्मपीठ के स्थायी पर्यवेक्षक, वाटिकन के वरिष्ठ महाधर्माध्यक्ष ईवान यूरकोविट्स ने, कम विकसित राष्ट्रों के प्रति, एकात्मता का आह्वान किया।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

जिनिवा, शुक्रवार, 5 फरवरी 2021 (रेई, वाटिकन रेडियो): संयुक्त राष्ट्र संघीय व्यापार एवं विकास बोर्ड (यूएनसीटीएडी) के 70 वें कार्यकारी सदन में राष्ट्रों के प्रतिनिधियों को सम्बोधित जिनिवा स्थित संयुक्त राष्ट्र संघीय कार्यालय में, परमधर्मपीठ के स्थायी पर्यवेक्षक, वाटिकन के वरिष्ठ महाधर्माध्यक्ष ईवान यूरकोविट्स ने, कम विकसित राष्ट्रों के प्रति, एकात्मता का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि कोविद महामारी की पृष्ठभूमि में "जनकल्याण का निर्माण सरकारों की एकजुटता और भ्रातृभाव में कार्य करने की इच्छा पर निर्भर करता है।"

मदद का आह्वान

उन्नत अर्थव्यवस्थाओं की ज़िम्मेदारियों की पुनरावृत्ति करते हुए महाधर्माध्यक्ष यूरकोविट्स ने कम विकसित एवं विकासशील देशों में निर्धनता निवारण हेतु उपयुक्त कदन उठाये जाने की मांग की।  उन्होंने कहा कि वर्तमान संकट के सन्दर्भ में विकसित एवं धनी राष्ट्रों का दायित्व है कि वे कोविद महामारी से प्रभावित अर्थव्यवस्थाओं की मदद करें।

बढ़ती विषमता

एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, कोविद महामारी के कारण निर्धन देशों ने, 2020 में, विगत 30 वर्षों में अपना सबसे ख़राब आर्थिक प्रदर्शन देखा है। आय के स्तर में गिरावट आई है, व्यापक रूप से रोज़गारी का नुकसान हुआ है तथा राजकोषीय घाटा गहरा गया है।

महाधर्माध्यक्ष ईवान यूरकोविट्स  ने कहा, "निर्धन एवं विकासशील देशों में निपट निर्धनता में जीवन यापन करनेवाले लोगों की संख्या तीन करोड़ बीस लाख तक बढ़ सकती है, जिससे ग़रीबी की दर 32.5% से 35.7% हो जायेगी। इस प्रकार, उन्होंने सचेत किया, इन देशों द्वारा संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने की संभावनाएँ सीमित हो जायेंगी।

इस तथ्य की ओर ध्यान आकर्षित कराते हुए कि "आर्थिक नियम विकास के लिए प्रभावी साबित हुए हैं, लेकिन अभिन्न मानव विकास के लिए नहीं" महाधर्माध्यक्ष यूरकोविट्स ने कहा कि "ग़रीबी का निर्धारण केवल, आर्थिक विकास की श्रेणी तक सीमित नहीं होना चाहिए।" सन्त फ्राँसिस को उद्धृत कर उन्होंने कहा, "धन में वृद्धि हुई है, लेकिन असमानता के साथ-साथ, 'गरीबी के नए रूप' भी उभर रहे हैं।

सुझाव

उन्होंने सुझाव रखा कि “उन्नत अर्थव्यवस्थाएँ निष्पक्ष और सहायक आर्थिक नीतियों के साथ-साथ बुनियादी ढाँचों पर खर्च करने के द्वारा सक्रिय राजकोषीय नीति के संयोजन से विश्वव्यापी विकास को शुरु करने में मदद कर सकती हैं।

इस तरह, "कम विकसित देशों को घरेलू मांग का निर्माण करने और अपने घरेलू संदर्भों में वित्तीयकरण के जोखिमों से बचाने के लिए विनियमन का उपयोग करने तथा किसी अन्य अप्रत्याशित झटके से निपटने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकेगा।

“उन्नत अर्थव्यवस्थाएँ निष्पक्ष और सहायक आर्थिक नीतियों के साथ-साथ बुनियादी ढाँचे पर खर्च सहित सक्रिय राजकोषीय नीति के संयोजन से सतत वैश्विक विकास को किक-स्टार्ट करने में मदद कर सकती हैं।

महाधर्माध्यक्ष ने कहा कि कम विकसित देशों की मदद के लिये, संरचनात्मक परिवर्तन का एक समान पैटर्न, "लागू नहीं किया जा सकता"। उन्होंने कहा कि प्रत्येक कम विकसित राष्ट्र को "अपनी विशिष्ट संस्कृति के मूल्यों का सम्मान करते हुए, अपने अलग तरीके से विकसित होने और नवीकरण हेतु अपनी क्षमता को विकसित करने में मदद मिलनी चाहिए।"

05 February 2021, 11:43