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दीपावली महोत्लव से पूर्व दियों के धूप में सुखाती श्रमिक महिला, अहमदाबाद, 28-10-2020 दीपावली महोत्लव से पूर्व दियों के धूप में सुखाती श्रमिक महिला, अहमदाबाद, 28-10-2020   (AFP or licensors)

अन्तरधर्म परिसम्वाद परिषद का दीपावली सन्देश 2020 इस प्रकार है:

14 नवम्बर को मनाये जानेवाले दीपावली महापर्व के सुअवसर पर परमधर्मपीठीय अन्तरधार्मिक परिसम्वाद परिषद आप सबको हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनाएँ अर्पित करती है।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर- वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 6 नवम्बर 2020 (रेई, वाटिकन रेडियो): दीपावली सन्देश 2020 इस प्रकार है:

प्रिय हिंदू मित्रो,

14 नवम्बर को मनाये जानेवाले दीपावली महापर्व के सुअवसर पर परमधर्मपीठीय अन्तरधार्मिक परिसम्वाद परिषद आप सबको हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनाएँ अर्पित करती है। कोविद-19 महामारी से उत्पन्न कठिनाइयों के बीच हमारी मनोकामना है कि अति अर्थगर्भित यह महापर्व भय, उत्कंठा और चिंता के हर बादल को दूर करे तथा आपके हृदयों एवं मनोस्तिष्क को मैत्री, उदारता और एकात्मता के प्रकाश से भर दे!

इस वर्ष के दीपावली संदेश के साथ, परस्पर संवाद और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए गठित परमधर्मपीठीय अन्तरधार्मिक परिसम्वाद परिषद आपको महोत्सव की शुभकामनाओं सहित कुछेक सामयिक चिन्तन प्रेषित करने की अपनी संजोई हुई परम्परा को जारी रखती है। इस प्रकार का यह 25 वाँ सन्देश है जो हमारी धार्मिक परम्पराओं और आध्यात्मिक धरोहरों में समागत शुभ बातों को स्वीकार करने, बरकरार रखने तथा संजोए रखने की अभिलाषा रखता है (दे. नोस्त्रा एताते, 2)। यद्यपि यह अन्तरधर्म सम्वाद की सराहना एवं सहयोग की दिशा में एक छोटा-सा कदम है तथापि इन संदेशों ने, विगत वर्षों में, विभिन्न स्तरों पर हिंदू-ख्रीस्तीय सम्वाद और सद्भाव को बढ़ावा दिया है। हिंदुओं और ख्रीस्तीयों के बीच, आपसी सम्बन्धों को पोषित करते, बढ़ावा देते और संजोये रखते हुए, अपनी भलाई तथा सम्पूर्ण मानव कल्याण हेतु, एक साथ मिलकर काम करने के माध्यम के रूप में इस नेक परम्परा को जारी रखने के लिये हम तत्पर हैं।

इस वर्ष, कोविद-19 महामारी के मद्देनज़र सामाजिक-आर्थिक, राजनीतिक और आध्यात्मिक चुनौतियों एवं व्यापक चिंता, अनिश्चितता और भय की प्रतीयमानतः दुर्गम बाधाओं के समक्ष भी सकारात्मक भावना और भविष्य के प्रति आशा को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर हम आपके साथ कुछ विचार साझा करना चाहते हैं।

ऐसा करने के हमारे प्रयास निश्चित रूप से हमारे इस दृढ़ विश्वास पर आधारित हैं कि ईश्वर, जिन्होंने हमारी सृष्टि की है और जो हमारा पालन-पोषण करते हैं, हमारा परित्याग कदापि नहीं करेंगे। आशावादी होने का यह प्रोत्साहन उन लोगों के लिये अवास्तविक लग सकता है जिन्होंने अपने प्रियजनों अथवा आजीविका या दोनों को खो दिया है। वर्तमान महामारी और इसके कारण दैनिक जीवन, अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, शिक्षा और धार्मिक गतिविधियों पर पड़े गम्भीर प्रभावों की दुखद स्थितियों में निर्भीक से निर्भीक आशा एवं सकारात्मकता भी बिखर सकती है। तथापि, ईश्वर के विधान पर पूर्ण भरोसा ही हमें आशावादी बने रहने और समाजों के बीच पुनः आशा जगाने के लिये प्रेरित करता है।

इस महामारी से विश्व भर में उत्पन्न अभूतपूर्व पीड़ा और लॉकडाउन से जन-जीवन  के बाधित होने के बावजूद भी इसने हमारे सोचने और जीने के तौर-तरीकों में कई सकारात्मक परिवर्तन लाए हैं। दुख और एक दूसरे के प्रति ज़िम्मेदारी की भावना के अनुभवों ने हमारे समुदायों को एकात्मता  एवं उत्कंठा के भाव से पीड़ितों एवं ज़रूरतमन्दों के लिये दया और करुणा के कार्यों में एकजुट किया है। एकात्मता के इन कार्यों ने सह-अस्तित्व के महत्व को और अधिक गहराई से सराहने के लिए हमें अग्रसर किया है कि हम एक दूसरे के हैं तथा सबके एवं हमारे ‘सामान्य धाम’ के कल्याण के लिये हमें एक दूसरे की ज़रूरत है, इस तथ्य की ओर हमारा ध्यान आकर्षित कराया है। जैसा कि सन्त पापा फ्राँसिस ने उचित ही कहा है, "एकात्मता आज वह मार्ग है जो महामारी के परे दुनिया की ओर, हमारी अन्तर-वैयक्तिक एवं सामाजिक बुराइयों से स्वस्थ होने की ओर, तथा बेहतर ढंग से संकट से बाहर आने के तरीके की ओर ले जायेगा" (साप्ताहिक आम दर्शन, 2 सितम्बर 2020)।

हमारी अपनी-अपनी धार्मिक परम्पराएँ, प्रतिकूल परिस्थितियों के बीच भी हमें सकारात्मक और आशावान रहना सिखाती हैं। उन धार्मिक परंपराओं और शिक्षाओं को संजोकर रखते हुए हम इस विश्व्यापी संकट के बीच कोरोनोवायरस से कहीं अधिक संक्रामक, देखभाल, स्नेह, दया, सौम्यता और करुणा के कृत्यों के माध्यम से फैलाने का जिसे सन्त पापा फ्राँसिस "आशा का संक्रमण" कहते हैं, प्रयास करें (रोम शहर एवं विश्व के नाम सन्देश, 12 अप्रैल 2020)।

उन धार्मिक परम्पराओं एवं शिक्षाओं तथा हमारे साझा मूल्यों एवं मानवता की समुन्नति के प्रति समपर्ण के आधार पर, आइए, हम ख्रीस्तीय एवं हिन्दू, न केवल इन कठिन दिनों में अपितु हमारे समक्ष प्रस्तुत भविष्य में भी अपने समाजों के हृदय में सकारात्मकता और आशा की संस्कृति का निर्माण करने के लिए समस्त शुभचिन्तकों के साथ संयुक्त होकर कार्य करें।   

आप सबको दीपावली की मंगलकामनाएं!

        

कार्डिनल मिगेल आन्गेल अयुसो गिक्सो, एमसीसीजे                                                                                       

अध्यक्ष

                                मोन्सिन्योर इन्दुनिल जनकरतने कोडिथुवाक्कु कंकनमलगे

                                                                  सचिव

06 November 2020, 11:24