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फ्राँस में एक वृद्धाश्रम का दृश्य,  तस्वीरः 01.010.2020 फ्राँस में एक वृद्धाश्रम का दृश्य, तस्वीरः 01.010.2020  (AFP or licensors)

वाटिकन ने प्रकाशित की वयोवृद्धों पर ई-बुक

"जीवन के कई वर्षों की समृद्धि", शीर्षक से वाटिकन ने एक ई-बुक प्रकाशित की है, जिसमें लोकधर्मियों, परिवार एवं जीवन सम्बन्धी परमधर्मपीठीय समिति के तत्वाधान में वयोवृद्धों की प्रेरितिक देख-रेख पर जनवरी 2020 में सम्पन्न अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन के विचाराधीन विषयों एवं चिन्तनों का संग्रह सम्मिलित है।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2020 (रेई, वाटिकन रेडियो): "जीवन के कई वर्षों की समृद्धि", शीर्षक से वाटिकन ने एक ई-बुक प्रकाशित की है, जिसमें लोकधर्मियों, परिवार एवं जीवन सम्बन्धी परमधर्मपीठीय समिति के तत्वाधान में वयोवृद्धों की प्रेरितिक देख-रेख पर जनवरी 2020 में सम्पन्न अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन के विचाराधीन विषयों एवं चिन्तनों का संग्रह सम्मिलित है।  

सम्मेलन 2020

वाटिकन प्रेस द्वारा गुरुवार को प्रकाशित एक वकतव्य में कहा गया कि जनवरी में सम्पन्न अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्देश्य प्रत्येक कलीसियाई समुदाय में वयोवृद्धों की देख-रेख के प्रति नवीकृत उत्कंठा को प्रोत्साहन देना था। हालांकि, जनवरी माह में कोविद-19 महामारी की समस्या सामने नहीं आई थी तथापि, उक्त सम्मेलन में विचाराधीन विषय लॉडाऊन के समय सामयिक एवं अर्थपूर्ण सिद्ध हुए।  

सम्मेलन में इस तथ्य की ओर ध्यान आकर्षित कराया गया था कि वर्तमान विश्व में वयोवृद्ध व्यक्ति एकाकीपन एवं अलगाव के शिकार हैं, हालांकि, यह भी मानना होगा कि वयोवृद्ध लोगों के बिना नवीन पीढ़ियों की कोई जड़ें, पहचान अथवा अस्मिता नहीं है। यही कारण है कि कलीसिया वृद्धावस्था के विषय में लगभग सभी समाजों में जड़ीभूत मिथ्या विचारों को सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक प्रशिक्षण द्वारा दूर करना अपना दायित्व समझती है तथा इस प्रक्रिया में नवीन पीढ़ियों को एकीकृत करना चाहती है।  

ई-बुक का लक्ष्य

लोकधर्मियों, परिवार एवं जीवन सम्बन्धी परमधर्मपीठीय समिति हाल में प्रकाशित ई-बुक के द्वारा वृद्धावस्था के मूल्य को पहचानने हेतु सभी को आमंत्रित करती है तथा इस बात की ओर ध्यान आकर्षित कराना चाहती है कि वयोवृद्ध व्यक्ति कलीसियाई गतिविधियों में ज़िम्मेदारी के साथ सक्रिय भाग ले सकते हैं। वाटिकन के वकत्व्य में कहा गया कि कलीसिया के सदस्य होने के नाते हम सब धर्मप्रान्तों, पल्लियों, लोकधर्मी संस्थाओं, कलीसियाई संगठनों एवं काथलिक परिवारों के बीच, समन्वय एवं सहयोग द्वारा, वयोवृद्धों के प्रति उत्कंठा को अपने समर्पण का केन्द्र बना सकते हैं।  

02 October 2020, 10:59