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सभी मृत विश्वासियों की यादगारी दिवस सभी मृत विश्वासियों की यादगारी दिवस 

नवम्बर माह में मृत विश्वासियों के लिए दण्डमोचन का अध्यादेश

प्रेरितिक सुधारगृह ने मृत विश्वासियों के लिए नवम्बर माह में पूर्ण दण्डमोचन प्राप्ति में सुधार की घोषणा की।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार, 24 अक्टूबर 2020 (वीएन) – कलीसिया के कई पुरोहितों ने नवम्बर माह में मृत विश्वासियों के लिए पूर्ण दण्डमोचन प्राप्त करने हेतु आग्रह किया था। संत पापा फ्राँसिस के विशेष अध्यादेश के द्वारा प्रेरितिक सुधारगृह ने शुक्रवार को सामान्य अभ्यास में परिवर्तन की घोषणा की। इन संशोधनों वाली डिक्री पर 22 अक्टूबर को संत पापा जॉन पौल द्वितीय के पर्व के दिन हस्ताक्षर किए गए थे।

नवम्बर माह के लिए पूर्ण दण्डमोचन

कोरोना वायरस महामारी एवं बड़े दलों में जमा होने की पबन्दी के कारण, 1 से 8 नवम्बर तक कब्रस्थान में मृतकों के लिए पूर्ण दण्डमोचन प्राप्त करने में बदलाव लाया गया है। इस साल उन सभी लोगों को दण्डमोचन प्राप्त होगा जो माह के किसी भी दिन कब्रस्थान जायेंगे, मानसिक रूप से ही सही और भक्ति से मृत विश्वासियों के लिए प्रार्थना करेंगे।

सभी मृत विश्वासियों की यादगारी दिवस के लिए पूर्ण दण्डमोचन

2 नवम्बर से जुड़े दण्डमोचन को इस साल न केवल पहले और बाद वाले रविवार या पर्व के दिन प्राप्त किया जा सकेगा, बल्कि माह के किसी भी दिन, जिसको विश्वासी प्रार्थना के रूप में चुनेंगे। इस संबंध में दण्डमोचन किसी गिरजाघर का दौरा करने, एक हे हमारे पिता की प्रार्थना, प्रेरितों का धर्मसार और दण्डमोचन के लिए आवश्यक शर्तों को भक्तिपूर्वक पूरा करने के द्वारा प्राप्त किया जा सकता है।

घर तक सीमित

उन लोगों के लिए जो किसी कारण से चाहे कोविड-19 के कारण प्रतिबंध ही क्यों न हो घर से बाहर नहीं निकल सकते, दूसरे विश्वासियों के साथ आध्यात्मिक रूप से प्रार्थना में जुड़ने के द्वारा दण्डमोचन प्राप्त कर सकते हैं। इस मामले में, शर्त है कि पाप से पूरी तरह अनासक्त होना और दण्डमोचन के लिए अन्य सभी आवश्कताओं को पूरा करना चाहिए। इसके लिए शर्ते हैं, पापस्वीकार संस्कार में भाग लेना, परमप्रसाद ग्रहण करना और संत पापा के मतलब के लिए प्रार्थना करना।

अध्यादेश में सलाह दी गई है कि इस प्रकार की प्रार्थना येसु या धन्य कुँवारी मरियम की तस्वीर के सामने की जाए। अन्य प्रार्थनाएँ जिनको करने की सलाह दी गई है वे हैं, मृतक के लिए प्रार्थना, मृतकों को समर्पित शाम या सुबह की प्रार्थना करना, रोजरी विन्ती, दिव्य करुणा की रोजरी, धर्मविधि के अनुसार दिये गये सुसमाचार पाठों पर चिंतन, अपने जीवन की पीड़ा और परेशानी को ईश्वर को चढ़ाते हुए दया के कार्यों पर चिंतन करना।

पुरोहितों को निमंत्रण

पुरोहितों को सम्बोधित करते हुए अध्यादेश में कहा गया है कि वे पापस्वीकार संस्कार के लिए उदारतापूर्वक अपने आपको उपलब्ध करें और बीमार लोगों के लिए परमप्रसाद पहुँचायें। साथ ही, सभी पुरोहितों से आग्रह किया गया है कि वे मृत विश्वासियों के पर्व के दिन तीन मिस्सा अर्पित करें।  

24 October 2020, 15:25