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शंघाई का बंदरगाह शंघाई का बंदरगाह 

नाविकों की सफल घर वापसी हेतु वाटिकन की अपील

कोविड-19 के कारण लगाये गये प्रतिबंधों से करीब 3,00,000 से अधिक नाविक और समुद्रीकर्मी इस समय समुद्र में फंसे हुए हैं। समग्र मानव विकास को प्रोत्साहन देने हेतु गठित परमधर्मपीठीय परिषद के अध्यक्ष कार्डिनल पीटर टर्कसन ने उन फंसे हुए लोगों की सफल घर वापसी की अपील है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार, 29 सितम्बर 20 (वीएन)- जब काथलिक कलीसिया समुद्र की प्रेरिताई की 100वीं वर्षगाँठ मना रही है वाटिकन ने सरकारों, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगठनों एवं जहाज अधिकारियों से अपील की है कि जब कोविड-19 विश्वभर में फैला हुआ है वे सुरक्षित चालक दल के परिवर्तनों को सुविधाजनक बनाने के लिए सहयोग करें एवं विशेष चैनल बनायें। 

समुद्र में फंसे लोग

समग्र मानव विकास को प्रोत्साहन देने हेतु गठित परमधर्मपीठीय परिषद के अध्यक्ष कार्डिनल पीटर टर्कसन ने कहा, "हम चाहते हैं कि नाविक जो समुद्रों में फंसे हैं वे अपने देश वापस जा सकें एवं अपने प्रियजनों के साथ मिल सकें।"

महामारी के कारण यात्राओं पर प्रतिबंध, सीमा बंद और संघरोध उपाय आदि ने समुद्र में एक मानवीय आपातकालीन संकट पैदा कर दिया है। अनुमान लगाया जा रहा है कि करीब 3,00,000 नाविक और समुद्रकर्मी इस समय समुद्र में फंसे हुए हैं जिनके अनुबंध को समुद्री श्रम सम्मेलन में 11 महिनों के लिए बढ़ा दिया गया है जिसके कारण उन्हें अपने प्रियजनों से दूर, मानसिक तनाव एवं शारीरिक थकान में जीना पड़ रहा है।   

समुद्री प्रेरिताई के 100 साल

धर्माध्यक्षों, प्रोत्साहकों, प्रांतीय सहयोगियों, राष्ट्रीय निदेशकों, समुद्री प्रेरिताई में नियुक्त पुरोहितों और स्तेल्ला मारिस (विश्वस्तर पर नाविकों की प्रेरिताई में समर्पित काथलिक कलीसिया के स्वयंसेवकों) को प्रेषित एक पत्र में कार्डिनल ने अपील की है। यह पत्र उन्होंने स्तेल्ला मारिस के 25वें विश्व सम्मेलन को समुद्री प्रेरिताई की शतवर्षीय जयन्ती के पूर्व प्रेषित किया है जिसको स्कॉटलैंड के ग्लासगो में 4 अक्टूबर को मनाया जाएगा जहाँ इसकी शुरूआत हुई थी किन्तु महामारी के कारण समारोह को ऑनलाईन मनाया जाएगा।

समुद्र की प्रेरिताई की शुरूआत 4 अक्टूबर 1920 को ग्लासगो में एक काथलिक संस्था की सभा में राष्ट्र, धर्म, लिंग और जाति पर ध्यान दिये बिना की गई थी।  

1 मिलियन से अधिक समुद्रकर्मियों की सेवा

एक सौ वर्षों बाद अब 300 जहाजों पर सैंकड़ों पुरोहित एवं अनेक स्वंर्यसेवक उपस्थित हैं जो एक साल में करीब 70,000 बंदरगाहों का दौरा करते और लाखों नाविकों तक पहुँचते हैं।  

कार्डिनल टर्कसन ने समुद्र की प्रेरिताई में लगे विभिन्न देशों के सभी लोगों के प्रति अपना आभार प्रकट किया है जिन्होंने समुद्र के लोगों की सेवा में दशकों तक अपना जीवन अर्पित किया है।

दुनिया बदल रही है

कार्डिनल ने गौर किया कि समुद्र उद्योग में बहुत अधिक विकास हुआ है बड़े और कम्प्यूटरीकृत जहाजों को, बहु-राष्ट्रीय, बहु-सांस्कृतिक और बहु-धार्मिक दलों द्वारा संचालित किया जाता है। ऐसे समय में, चोरी, अपराध, त्याग और महामारी जैसे खतरों ने तनाव, थकान और चालक दल के एकाकीपन को बढ़ा दिया है। समुद्र की प्रेरिताई ने  नाविकों, मछुआरों और उनके परिवारों की भौतिक और आध्यात्मिक जरूरतों का प्रत्युत्तर देने के लिए नयी तकनीकियों को अपनाया है।

नाविकों की आवश्यकताएँ एक समान

कार्डिनल टर्कसन ने कहा कि जब जहाज की संरचनाओं एवं बनावट में परिवर्तन हुए हैं नाविकों एवं मछुआरों की आवश्यकताएँ नहीं बदली हैं। जब भी वे बंदरगाह पर आते हैं अपने परिवारों से मुलाकात करने के लिए तरसते हैं। वे अपनी समस्याएँ उनसे साझा करना चाहते हैं। कोविड-19 प्रतिबंधों के बावजूद समुद्र की प्रेरिताई में संलग्न लोगों की मुख्य सेवा है "उपस्थिति की प्रेरिताई"। कार्डिनल ने अपील की है कि जो भी तकनीकी सुविधाएँ उपलब्ध हैं उनके द्वारा मित्रता, समर्थन, प्रोत्साहन और निरंतर प्रार्थना द्वारा उन्हें प्रदान की जाएँ।  

29 September 2020, 15:21