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जीवन सम्बन्धी परमधर्मपीठीय अकादमी के अध्यक्ष महाधर्माध्यक्ष विन्चेन्सो पालिया जीवन सम्बन्धी परमधर्मपीठीय अकादमी के अध्यक्ष महाधर्माध्यक्ष विन्चेन्सो पालिया 

कृत्रिम बुद्धिमत्ता का लक्ष्य होना चाहिये मानव जीवन की सेवा

रोम स्थित विश्व खाद्य एवं कृषि संगठन के तत्वाधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं सबके लिये भोजन शीर्षक से आयोजित एक वेब सम्मेलन में जीवन सम्बन्धी परमधर्मपीठीय अकादमी के अध्यक्ष एवं वाटिकन के वरिष्ठ महाधर्माध्यक्ष विन्चेन्सो पालिया ने भोजन एवं पेय जल को प्रत्येक व्यक्ति का अधिकार बताया।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर- वाटिकन सिटी

रोम, शुक्रवार, 25 सितम्बर 2020 (रेई,वाटिकन रेडियो): रोम स्थित विश्व खाद्य एवं कृषि संगठन के तत्वाधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं सबके लिये भोजन शीर्षक से आयोजित एक वेब सम्मेलन में जीवन सम्बन्धी परमधर्मपीठीय अकादमी के अध्यक्ष एवं वाटिकन के वरिष्ठ महाधर्माध्यक्ष विन्चेन्सो पालिया ने भोजन एवं पेय जल को प्रत्येक व्यक्ति का अधिकार बताया।  

जीवन डीएनए से श्रेष्ठकर

उन्होंने कहा कि जैविकी अथवा आनुवंशिकी ने हमें जीवन के रहस्य के बारे में एक नई झलक दी है। हर जीवित कोशिका के दिल में बंद डीएनए की लंबी श्रृंखला एक परिष्कृत, शक्तिशाली और डेटा का बेजोड़ भंडार है जिसे लगातार संसाधित, दोहराया, प्रसारित और मरम्मत किया जा रहा है। जीवन की सेवा में इसके उपयोग को प्रसारित करना नितान्त आवश्यक है, इसलिये कि यह जीवन को पोषित करनेवाले भोजन की सूचना प्रदान करता है। तथापि, महाधर्माध्यक्ष पालिया ने कहा कि हमें यह कदापि नहीं भूलना चाहिये कि जीवन डीएनए में निहित जानकारी से कहीं अधिक श्रेष्ठकर है।

महाधर्माध्यक्ष ने कहा, "सर्वाधिक महान बुद्धिमत्ता, यहाँ तक कि डिजिटल या सबसे शक्तिशाली मशीन सीखने की प्रणाली भी जीवन से अधिक महत्वपूर्ण अथवा शक्तिशाली नहीं है। उन्होंने कहा कि हालांकि यहह बेहद सुरुचिपूर्ण है, मानव जीवन को एक एल्गोरिथ्म तक सीमित नहीं किया जा सकता। जीवन जितना हम समझ सकते हैं, उससे कहीं अधिक है, वह हमारी उम्मीद से भी कहीं अधिक बढ़कर है।"

उन्होंने कहा कि इसीलिये यह स्पष्ट है कि ज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों और विभिन्न कौशलों को साझा करने तथा इसकी तुलना करने के लिए सामान्य मंच होना चाहिये ताकि सभी को पारस्परिक सहायता के अवसर मिल सकें।  

मानव जीवन की गरिमा

महाधर्माध्यक्ष ने चेतावनी दी कि समकालीन अनुसंधान, अर्थशास्त्र की सांस्कृतिक प्रबलता तथा किसी भी मानवतावादी चिन्तन को हाशिये पर रखनेवाली वैज्ञानिक अति-विशेषज्ञता गम्भीर जोखिम उत्पन्न करती है, जिससे हम अपने लक्ष्य से चूक जायेंगे तथा उन उत्तरों को स्वीकार करेंगे जो मानव जीवन की गरिमा का सम्मान नहीं करते हैं।

इस बात की ओर ध्यान आकर्षित कराते हुए कि प्रौद्योगिकी के विकास के साथ ही भोजन की प्रणाली परिष्कृत हुई है, उन्होंने कहा कि मानवतावाद एवं उच्च तकनीकी की जब बात आती है तब यह प्रश्न करना नितान्त आवश्यक हो जाता है कि नैतिक रूप से उचित है क्या और क्या नहीं?

25 September 2020, 11:02