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क्रूस का रास्ता 2020 क्रूस का रास्ता 2020 

क्रूस रास्ता का चिंतन, क्रूसितों द्वारा

पुण्य सप्ताह क्रूस रास्ता की चिंतन प्रार्थनाएँ इस वर्ष उत्तरी इटली के कैदियों, स्वयंसेवियों, परिवार के सदस्यों और अन्य सुधारगृह के सदस्यों द्वारा तैयारी की गई है।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

हर चिंतन प्रार्थना अपने में जीवन की एक कहानी है। क्रूस रास्ता के चौदह स्थानों में हम व्यक्तिगत रुप से व्यक्तियों को संयुक्त पाते हैं। क्रूस रास्ता की धर्मविधि का यह चिंतन हमें पादुआ और उत्तरी इटली के सुधार गृहों में जीवन व्यतीत कर रहे लोगों के जीवन से पिरोता है जिससे कैदखाने के चैपलिन पुरोहित मार्को पोज्जा ने पत्रकार तातियाना मारियो से मिलकर संग्रहित किया है।

कोरोना वारयस के फैलाव में रोकथाम हेतु लॉकडाऊन की शुरूआत इटली में 8 मार्च से हुई। कैदियों में इस खबर के प्रसार ने कि वे अपने परिजनों से मुलाकात नहीं कर सकते एक तरह की खलबली उत्पन्न कर दी। दो दिनों की भगदड़ के उपरांत संत पापा ने कैदियों के लिए मिस्सा बलिदान अर्पित किया, “मैं उन लोगों के लिए प्रार्थना करना चाहता हूँ जो कैदखानों में हैं”, संत पापा ने कहा। “वे अपने में दुःखित हैं और हमें अपनी प्रार्थनाओं में उनके निकट रहने की जरूरत है जिससे कि ईश्वर इस कठिन परिस्थिति में उनकी सहायता करें और उन्हें सांत्वना प्रदान करें।”  

पहला स्थानः येसु को प्राणदंड की आज्ञा मिलती है

इस स्थान पर अपना चिंतन लिखने वाला व्यक्ति अपने में मृत्युदंड की सजा काट रहा है। “मेरा क्रूसित होना मेरे बचपन से ही शुरू हुआ।” वह लिखता है कि उसके टूटेपन ने उसे अपने में परित्यक्त होने की अनुभूति प्रदान की। वह कहता है कि वह अपने में येसु से अधिक बराबस होने के अनुभव से गुजर रहा है। वह अपने में रोता है। “अपने 29 सालों के कैदी जीवन के बावजूद मैंने अपने रो पाने की क्षमता को नहीं खोई है, अपने अतीत के प्रति और अपने द्वारा किये गये बुराई के प्रति मैं शर्मिगी महसूस करता हूँ।” अपने पहले के निर्जीव जीवन में मैंने जीवन की खोज की। “आज, मुझे अपने में विचित्र लगता है, जेल मेरे लिए मुक्ति का स्रोत लगता है।”

कुछ लोगों के लिए, यदि मैं आज भी बराबस लगता हूँ, तो यह मुझे क्रोधित नहीं करताः मैं हृदय में यह जानता हूँ कि निर्दोष व्यक्तिों को मेरी तरह सजा मिली है, वे कैदखाने में मुझसे मिलने आते औऱ मुझे जीवन के बारे में शिक्षा देते हैं।

दूसरा स्थानः येसु अपना क्रूस ढ़ोते हैं

एक लड़की के माता-पिता जिसकी हत्या बेरहमी से कर दी गई उसके बारे वे कहते हैं, “ हमारा जीवन और परिवार, कार्य हेतु त्याग पर आधारित था।” वे अपने में पूछते हैं, “ हमें क्यों इस बुराई का शिकार होना पड़ाॽ” वे अपने में शांति की अनुभूति नहीं करते हैं। वे कहते हैं, “जब हमें ऐसा लगाता है कि हम जीवन के निराशा भरे क्षणों से होकर गुजर रहे हैं, तो ऐसी परिस्थति में ईश्वर विभिन्न रूपों में हमसे मिलने आते हैं”। “वे हमें नव-दंपतियों की भांति एक- दूसरे को प्रेम करने, यहां तक की कठिनाइयों में भी एक-दूसरे को सहारा देने की कृपा प्रदान करते हैं।”  वे आज, अपने को सदैव उनके लिए खुला रखते हैं जिन्हें उनकी सहायता की आवश्यकता है।

करूणा के कार्यों का निष्पादन करना हमारे लिए एक तरह से मुक्ति का एहसास प्रदान करता है-हम बुराई के आगे अपने को हताश नहीं पाते। ईश्वर का प्रेम जीवन को नवीन बनाने की सच्ची क्षमता रखता है क्योंकि हमारे सामने उनका पुत्र येसु ख्रीस्त घोर दुःख से होकर गुजरे जिससे वे हमें अपने सच्ची करूणा का एहसास प्रदान कर सकें।

तीसरा स्थानः येसु ख्रीस्त पहली बार क्रूस के नीचे गिरते हैं

“यह पहली बार था जब मैं गिरा था। लेकिन वह मेरी लिए मौत थी।” यह तीसरा चिंतन एक कैदी के द्वारा लिखा गया है। उसे अपने में यह पता नहीं चला कि उसके अंदर बुराई पनप रही है, वह बतलाता है। एक शाम, अपने कठिन जीवन के कारण, “हिमस्खलन की तरह... क्रोध ने मेरी दयालुता को मार डाला... मैंने किसी का कत्ल कर दिया।”  मैंने कैदखाने में रहते हुए अपनी खुदकुशी करनी चाही लेकिन मैंने उन लोगों को पाया जिन्होंने मेरे खोये विश्वास को पुनः जगा दिया।

इस दुनिया में अच्छाई है, इस बात को अनुभव करने की असफलता, मेरा पहला गिरना था। दूसरा इसका प्रतिफल, हत्या करना था, क्योंकि मैं अपने अंदर पहले ही मर चुका था।  

चौथा स्थानः येसु और उनकी दुःखित माता की भेंट

चौथे चिंतन की लेखिका एक माता है जिसका पुत्र कैदखाने में है। वह लिखती है कि सजा पाये अपने पुत्र का परित्याग करने की परीक्षा “एक सेकेंड” भी उसके जेहन में नहीं आयी। वह कहती है, “उस दिन, पूरा परिवार उसके साथ जेल गया।” उन्होंने अपने हाथों को चाकू और घाव की तरह इंगित करते हुए लोगों से कहा, “हर ढ़लते दिन के साथ आगे बढ़ो।” उन्होंने अपने पुत्र को माता मरियम के हाथों में सुपूर्द कर दिया है औऱ वह कहती है कि उसे उनकी निकटता का एहसास होता है। “मैं अपने भय को मरियम को चढ़ा देती हूँ, क्योंकि उन्होंने कलवारी की राह में स्वयं उसका अनुभव किया।”

वह अपने हृदय में यह जानती है कि उसका बेटा मानव बुराई से नहीं बच सकता , फिर भी उसने उसे नहीं छोड़ा। वह अपने बेटे के साथ उसके हर दुःख में खड़ी रही और अपनी उपस्थिति द्वारा साथ देती रही। मैं अपनी आंखों को ऊपर उठाते हुए येसु को सोचती  हूँ, जिनकी आंखें प्रेम से भरी हैं, मैं अपने में अकेला महसूस नहीं करती। मैं हमेशा ऐसा करती रहूँगी।

पांचवाँ स्थानः सिरीनी सिमोन येसु को क्रूस ढोने में मदद करते हैं

पांचवें स्थान का चिंतन प्रस्तुत करने वाला भी एक कैदी है। वह कहता है कि वह किसी दिन किसी के जीवन में खुशी लाने की चाह रखता है। “हर कोई सिरीनी के सिमोन को जानता है।” यह उन लोगों के लिए एक उपनाम है जो कलवारी पहाड़ पर अपना क्रूस ढ़ाते हुए भी दूसरों को क्रूस ढ़ोने में मदद करते हैं। वह अपने सह-कैदी को सिरीनी का सिमोन कहता है- जो आवासहीन या चीजों की कमी में अपना जीवनयापन किया।

उसका एकमात्र धन कैंडी का एक बॉक्स था। उसके मीठे दाँत हैं, लेकिन उसने जोर देकर कहा कि मैं इसे अपनी पत्नी के पास पहली बार लाया जब वह मुझसे मुलाकात की थी, वह उस अप्रत्याशित और विचारशील प्रेम की निशानी से फूट-फूटकर रो पड़ी थी।

छटवाँ स्थानः बेरोनिका येसु का चेहरा पोंछती है

छटवें चिंतन के प्रस्तुत कर्ता एक प्रचारक, बेरोनिका की भांति बहुतों के आंसू पोंछते हैं। वे कहते हैं, “टूटे हृदय अपने आप से सांत्वना प्राप्त नहीं कर सकते हैं।” कैदखाने की अंधेरी सच्चाई को व्यक्त करते हुए वे कहते हैं कि वे हताश हृदयों से मिलते और बुराई की उपस्थिति को समझने की कोशिश करते हैं। उनका कहना है कि इसका उत्तर पाना अपने में कठिन है। वे कहते हैं कि यदि येसु ख्रीस्त उसके स्थान पर होते तो कैसे लोगों के आँसू पोंछते। येसु कैसे इन लोगों के दुःख में ढ़ढस प्रदान करते। वे अपने विश्वास में उनके साथ वही करने का प्रयास करते हैं जैसा येसु ख्रीस्त उनके साथ करते।

येसु ख्रीस्त हमारी कमजोरियों और गुनाहों के बावजूद हमारी ओर प्रेम भरी निगाहों से देखते हैं। हर कोई यहाँ तक की कैदी भी, रोज दिन अपने को नया बनाने का अवसर प्राप्त करता है। हम येसु ख्रीस्त की नजरों के प्रति आभारी है जो हमें न्यायपूर्ण दृष्टि से नहीं देखते बल्कि हमें जीवन और आशा प्रदान करते हैं।  

सातवाँ स्थानः येसु दूसरी बार गिरते हैं

सातवाँ स्थान पर चिंतन प्रस्तुत करने वाला कहते हैं कि वह कई बार इस जेल से होकर गुजरा यही सोचते हुए कि वह यहाँ और “कभी नहीं आयेगा”। लेकिन वह अपने को मादक प्रदार्थ के व्यापार का दोषी पाया, वह कैदखाने को “जीवितों की क्रबगाह” कहता है। वह कहता है कि उसे नहीं पता की अभी वह क्या कर रहा है।

मैं ईश्वर के सहायता से अपने जीवन निर्माण की कोशिश कर रहा हूँ। मैं अपने माता-पिता का कर्जदार हूँ... इससे भी बढ़कर मैं खुद का ऋणी हूँ, यह विचार कि बुराई सदैव मेरे जीवन में बनी रहती है अपने में असहनीय अनुभूति लाती है। यह मेरे लिए क्रूस बन गया है।  

आठवाँ स्थानः येसु येरुसालेम की नारियों से मिलते हैं

आठवें चिंतन को लिखने वाली अपने जीवन की चर्चा करते हुए कहती है कि किस तरह उसका जीवन अपने में बिखर गया जब उसके पिता को उम्र कैद की सजा सुनाई गई। जहाँ-जहाँ उनके पिता को इटली के एक जेल से दूसरे जेल में लिया जाता है, वहाँ-वहाँ वह पिछले 28 सालों से भ्रमण कर रही है। वह अपने को अपने पिता के प्रेम से वंचित पाती है, उसके विवाह में उसकी उपस्थिति बहुत खली, उसे अपनी माता के अस्वाद भरी जिन्दगी का भी सामना करना पड़ रहा है।

यह सत्य हैः बहुत से माता-पिता हैं जो प्रेम में अपनी संतानों के बड़े होने का इंतजार करते हैं। मेरी परिस्थिति यह है कि मैं अपने पिता के वापस आने का इंतजार कर रही हूँ। मेरे जैसे लोगों के लिए प्रतीक्षा करना, एक कर्तव्य के समान है

नौवां स्थानः येसु तीसरी बार गिरते हैं

नौवें स्थान के बारे में चिंतन लिखने वाला अपने में इस बात का अनुभव करता है कि वह अपने जीवन में बहुत बार गिरा है। वह अनेक बार गिरकर खड़ा हुआ है। वह कहता है कि पेत्रुस की तरह वह अपनी गलतियों के लिए हजारों बहाने खोजता  है जिससे वह अपनी गलतियों को जायज ठहरा सकें।

यह सत्य है कि मेरे जीवन के एक हजार टुकड़े हो गये, लेकिन आश्चर्य की बात यही है कि वे हजारों टुकड़ों को पुनः एक साथ जमा किया जा सकता है। यह सहज नहीं है, लेकिन केवल यही बात यहां अबतक मायने रखती है।

दसवाँ स्थानः येसु के कपड़ों को उतारा जाता हैं

दसवें चिंतन के लेखक एक शिक्षक हैं। जैसे की येसु के कपड़ों को उतारा जाता है वैसे ही उसने बहुत से अपने विद्यार्थियों को देखा है जिन्होंने दूसरों के सम्मान और आदर हेतु अपनी इज्जत को नंगा कर दिया...। वे अपने में असहाय हैं, वे अपनी कमजोरियों से हताश हैं, वे बहुत बार अपने किये गये बुरे कार्यों को समझ पाने में असमर्थ हैं। फिर भी, कई बार वे उन नवजात शिशुओं की तरह हैं जिन्हें पुनः पढ़ाया जा सकता है।

यद्यपि मैं इस शिक्षण कार्य से प्रेम करता हूँ, मुझे कभी-कभी इस कार्य को करने हेतु साहस की जरुरत होती है। इस संवेदनशील कार्य में हमें यह अनुभव करना चाहिए कि हमें छोड़ा नहीं गया है वरन बहुत सारे जीवन को बनाने की जिम्मेदारी हमें दी गयी है जो हर दिन बिगड़ने की जोखिम में होते हैं।

ग्यारहवाँ स्थानः येसु क्रूस पर ठोके जाते हैं

ग्यारहवें स्थान हेतु चिंतन प्रस्तुत करने वाले एक पुरोहित हैं जिन पर झूठा दोष लगाया गया और बाद में उन्हें बरी कर दिया गया। उसके जीवन में “क्रूस का रास्ता” दस सालों तक चलता रहा, वे कहते हैं कि इस अवधि में उनपर संदेह किया गया, दोषारोपण किया गया और उनकी बेईज्जती की गई। भग्यावश, उन्हें भी एक सिरीनी सिमोन की भांति एक सहायक मिला जिसने क्रूस के भारी बोझ को ढ़ोने में उनकी मदद की। उन्होंने कहा, “मेरे साथ बहुत से लोगों ने उस युवक के लिए प्रार्थना की जिसने मुझ पर झूठा दोष लगाया था।”

उस दिन जब मैं पूरी तरह बरी हो गया, मैंने अपने में बहुत अधिक खुशी का अनुभव किया जिससे मैं इन दस सालों से पहले कभी नहीं किया था, मुझे ईश्वर से अपने साक्षत्कार की अनूभूति हुई। क्रूस पर लटकते हुए मैं अपने पुरोहिताई जीवन के अर्थ को पाया।

बारहवाँ स्थानः येसु ख्रीस्त क्रूस पर मर जाते हैं

बारहवें स्थान हेतु चिंतन प्रस्तुत करने वाले एक न्यायधीश हैं। वे कहते हैं, “कोई भी न्यायधीश किसी व्यक्ति को सूली पर नहीं चढ़ा सकता है... जिसकी सजा वह काट रहा है।” उसने कहा कि सच्चा न्याय केवल दया के द्वारा संभंव है। सभी बुराइयों के बावजूद, दया हमें अच्छाई की खोज हेतु मदद करती है जो अपने में कभी खत्म नहीं होती। इसके लिए हमें “उस व्यक्ति की खोज करने की जरुरत है जो अपराध के पीछे छुपा हुआ है।”

इस प्रक्रिया में, कभी-कभी एक क्षितिज को देखना संभव हो जाता है जो उस व्यक्ति में आशा पैदा कर सकता है, और एक बार उसकी सजा समाप्त होती, वह समाज में लौटने को तैयार होता और आशा करता है कि लोग उसे अस्वीकार करते हुए उसका स्वागत करेंगे। हम सभी के लिए, यहां तक कि अपराधी ठहराए गए लोग भी, एक ही मानव परिवार की संतान हैं।

तेराहवां स्थानः येसु क्रूस पर से उतारे जाते हैं

“कैदी सदा मेरे लिए शिक्षकों के समान रहे हैं।”  तेरहवें स्थान हेतु चिंतन प्रस्तुत करते हुए एक धर्मसंघी बंधु लिखते हैं। कैदखाने में छः सालों तक स्वयंसेवक के रूप में सेवा देते हुए वे कहते हैं, “हम ख्रीस्तीय अपने को सदा दूसरों से बेहतर समझने की गलती करते हैं।” अपने जीवनकाल में येसु कमजोर लोगों के साथ खड़े होने का चुनाव किये। “कैदखाने में एक कमरे से दूसरे कमरे का दौर, मैंने जीवन को मरते देखा है।” लेकिन येसु ख्रीस्त मुझे कहते हैं कि आगे बढ़ते जाओ, उन्हें सहारा दो। वे रुकते और उनकी बातों को सुनते हैं।

यह एकमात्र तरीका है जिसके द्वारा मैं उस व्यक्ति को स्वीकार करना जानता हूं, और उसने जो गलती की, उससे मेरी निगाहें हटती हैं। केवल इस तरह से वह ईश्वर में विश्वास करने और अपने को उनकी अच्छाई में आत्मसमर्पित करने हेतु सक्षम होता है।

चौदहवां स्थानः येसु कब्र में रखे जाते हैं

सुधारगृह अधिकारी इस साल के क्रूस रास्ता के चौदहावें चिंतन को लिखते हैं। वे रोज दिन जेल में रहने वाले व्यक्ति के दुःखों से अपने को रूबरू होता पाते हैं। वे कहते हैं, “एक अच्छा व्यक्ति अपने में क्रूर बन सकता है, और एक बुरा व्यक्ति अच्छा बन सकता है। यह व्यक्ति पर निर्भर करता है। लेकिन वे कहते हैं कि कैदखाना आप को बदल देता है। व्यक्तिगत रुप में वे व्यक्तियों को एक अवसर प्रदान करते हैं जिन्होंने अपने जीवन में गलती की है।

मैं लोगों में विश्वास को सजीव बनाये रखने हेतु कड़ी मेहना करता हूँ जो अपने में छोड दिये गये हैं। वे अपने में भयभीत नजर आते हैं यह सोच कर कि क्या समाज उन्हें पुनः स्वीकार करेगा।  जेल में, मैं उन्हें याद दिलाता हूं कि, भगवान के साथ, कोई भी पाप कभी भी अंतिम शब्द नहीं है। 

10 April 2020, 14:39