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अमाजोन धर्मसभा की क्रार्यवाही अमाजोन धर्मसभा की क्रार्यवाही   (Vatican Media)

अमाजोन प्रेस विज्ञाप्तिः आदिवासियों की धर्मविधि और आध्यात्मिकता

अमाजोन पर चल रही धर्मसभा के अंतिम चरण पर धर्माध्यक्षों ने अंतिम दस्तावेज पर अपने विचार-मंथन जारी रखा जिस पर मतदान शानिवार को होगा। वहीं धर्मसभा में सहभागी हो रहे पाँच प्रतिभागियों ने अपने अनुभवों को साझा किया।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 25 अक्टूबर 2019 (रेई) 24 अक्टूबर की प्रेस विज्ञप्ति में अमाजोन धर्मसभा में सहभागी हो रहें पांच प्रतिभागियो ने धर्मसभा पर अपनी अनुभूतियों को साझा किया।

सि. मारिलूचे दोस संतोस मेसक्वीता, एफएमए मरियम ख्रीस्तियों की सहायता धर्मसमाज की सदस्य है जो ब्राजील के बारास्साना आदिवासी समुदाय से आती है। उन्होंने कहा कि वह अमाजोन के उस धर्मप्रांत से आती है जहां  सबसे अधिक आदिवासी रहते हैं।

पुरोहित एलियाजार लोपेज हेरनादेंज मेक्सिको के जावोतेका समुदाय से आते हैं जो आदिवासी ईशशास्त्र में विशेषज्ञ हैं। उन्होंने कहा, “धर्मसभा का अंग होना सपने साकार होने के समान है। यह एक नये तरह के संबंध को प्रदर्शित करता है जो मिलन पर आधारित है।” आदिवासियों की संस्कृति की समझ के बारे में उन्होंने कहा कि उनके लोग ईश्वर और जीवन को एक दूसरे से अलग नहीं कर सकते हैं। ईशशास्त्र, विज्ञान और जीवन उनके लिए आपस में एक दूसरे से जुड़े हुए हैं।

देलियो सितिकोनातीजी कामैतेरी पेरू के अशानिनका आदिवासी समुदाय से आते हैं। उन्होंने कहा कि अमाजोन की धर्मसभा में सहभागिता के द्वारा वे पृथ्वी की सुरक्षा की महत्वपूर्णता को सुदृढ़ करना चाहते थे जहाँ हम सभी रहते हैं। धर्मसभा के अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि यह आदिवासियों की आशा का स्रोत है जहाँ उन्होंने अपने अधिकारों की सुरक्षा की बात व्यक्त की है। “हमारी परिस्थिति में ऐसा करने पर हम मार डाले जाते हैं।” धर्मसभा ने हमें आपसी वार्ता और मिलन हेतु एक माहौल प्रदान किया है जिसके बदौलत हम अमाजोन और दुनिया दोनों को बचा सकते हैं। 

धर्माध्यक्ष अलबेर्तो तेभियेरा कोर्रेया, ब्राजील के बेलेम दो पारा धर्मप्रांत के महाधर्माध्यक्ष हैं। यहाँ धर्मप्रांत नदी समुदायों (नदी में रहने वाले )को अपने में समाहित करता है जो शहर की सभी चुनौतियों से प्रभावित है। महाधर्माध्यक्ष ने कहा कि धर्मसभा में उनकी सहभागिता का उद्देश्य यही है कि उन्हें आदिवासियों के जीवन और मूल्यों की सच्चाई का उत्तर मिले। अपने दस सालों के महाधर्माध्यक्षीय कार्यकाल के दौरान वे इस बात का साक्ष्य दे सकते हैं कि उनके धर्मप्रांत और निकटवर्ती धर्मप्रांतों में “बुलहाटीय वृद्धि” हुई है।

कार्डिनल बेनियामीनो स्तेला लोकधर्मियों के धर्मसंघ के अधिकारी हैं। जब वे कोलाम्बिया में प्रेरितिक कार्य के अधिकारी थे उन्हें कई बार अमाजोन प्रांतों का दौरा करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि उन्होंने संचार और दूरी की समस्या का एहसास किया है। यही कारण है कि वे “धर्माध्यक्षों को प्रेरितिक हृदय” के “साहसी प्रेरित” की संज्ञा देते हैं क्योंकि वे अपने प्रांतों के लिए समर्पित हैं। धर्मसभा ने उन्हें लातीनी अमेरीका के अनुभवों के पुनः एक बार जीने में मदद किया है।

अमाजोन की धर्मविधि पर प्रश्न

कार्डिनल स्तेला को अमाजोन की धर्मविधि के बारे में प्रथम सवाल पूछा गया। इसके उत्तर में उन्होंने कहा कि अमाजोनवासियों के लिए यह स्वाभाविक है कि वे अपने को अपनी स्थानीय भाषा, निशानियों, रंगों और कहानियों में व्यक्त करने की चाह रखते हैं। उन्होंने इस बात को चिन्हित किया कि कैसे अमाजोन प्रांत के धर्माध्यक्षगण “विभिन्न सच्चाइयों” को, जो अलग-अलग समुदायों और जातियों की हैं न्यायसंगत रुप में उपयोग करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “कोई भी धर्मविधि इतिहास और लोगों की आध्यात्मिकता को व्यक्त करती है।”

पुरोहित एलियाजार ने इस बात पर जोर दिया कि लातीनी अमेरीकी कलीसिया को चाहिए कि वह अपने विश्वास को अपनी परंपराओं के अनुसार व्यक्त करे। अमाजोन की धर्मविधि हेतु यह एक प्रस्ताव के रुप में रखी गई है। हमें उन चीजों की खोज करने की जरुरत है जो स्थानीय परंपरा से संबंधित है। “हमारे लोगों की अपनी भाषा है जो उनके जीवन को अर्थपूर्ण बनाती है।” उन्होंने कहा कि हम एकल संस्कृति और एकल मार्ग का चुनाव नहीं कर सकते हैं।

सि. मारीलुचे दोस सांतोस ने इस मुद्दे पर अपने विचारों को व्यक्त करते हुए कहा कि आदिवासियों के रूप में वे यहाँ इस बात को व्यक्त करते हैं कि उनकी अपनी आध्यात्मिकता है। “हम अपनी धर्मविधियों का संचालन करते और अपनी संस्कृति मूल्यों और परपंराओं से साथ जीवनयापन करते हैं। हम सुसमाचार प्रचार के कारण हैं लेकिन हम अपने जीवन में समारोहों में चिन्हों का उयोग करते हैं जो येसु ख्रीस्त के संदेशानुसार हैं। हमें ईश वचन के अनुसार अपनी आध्यात्मिकता की गहराई में जाने की आवश्यकता है जो जीवन को एक-दूसरे से बांटने, भ्रातृत्व और एकता के निशानी में झलकती है।”  

देलियो ने इस संदर्भ में कहा कि आदिवासियों के अपने विश्व दर्शन हैं जो अपने में प्रकृति को सम्माहित करता है जिसके फलस्वरुप हम “ईश्वर के निकट” आते हैं। आदिवासियों के रुप में हम अपने जीवन में सभी चीजों के साथ  एकात्मकता का अनुभव करते हैं। हमारे रीति-रिवाजों का केन्द्रविन्दु और कुछ नहीं वरन येसु ख्रीस्त हैं।

आशा पर सवाल

महाधर्माध्यक्ष कोर्रेया से पूछा गया कि क्या आपको इस बात का भय तो नहीं की धर्मसभा के दस्तावेज आपको निराश करेंगे। उन्होंने इसके उत्तर में कहा कि धर्मसभा के धर्माध्यक्षों के पास “चाहतों की सूची” नहीं है। हम एक साथ अपने विचारों को साझा करते हुए चल रहे हैं जो धनी वार्ता है। संत पापा फ्रांसिस की बातों को उद्दृत करते हुए उन्होंने कहा “पवित्र आत्मा के बिना धर्मसभा नहीं है।”  

मरियम पर सवाल

अमाजोन के लोगों के बीच माता मरियम की भक्ति पर पूछे गये सावल पर पुरोहित एलियाजार ने कहा कि आदिवासी पंरपरा के अनुसार ईश्वर के साथ संबंध अपने में “मातृत्व के भाव को व्यक्त करता है।” जीवन की मजबूती और विकास नर और नारी दोनों रुपों में निहित है। ईश्वर करूणावान हैं और इस करूणा को हम “नारी सुलभ करूणा” में व्यक्त होता पाते हैं। यही कारण है कि लातीनी अमेरीका में मरियम की एक महत्वपूर्ण भूमिका है। हमें लोगों में चर्चित धार्मिकता को नवीकृत करने की जरूरत है।  

महाधर्माध्यक्ष ने कहा कि मातृत्व, परिवार, करूणा ये सारी बातें हमें माता मरियम से संयुक्त करती है।

ब्रह्मचर्य पर सवाल

ब्रह्मचर्य के सवाल का उत्तर देते हुए कार्डिनल स्तेला ने कहा कि किसी पुरोहिताई अभिषेक के पूर्व हमें उसकी पुरोहिताई परिशिक्षण की सुदृढ़ता को देखते की जरुरत है। “कलीसिया ही वह संस्थान है जहाँ हम जीवन के प्रति निष्ठा के पाठ को सुनते हैं।” ब्रह्मचर्य अपने में “अति सुन्दर उपहार” जिसे हमें व्यक्तिगत रुप में अनुशासन, आध्यात्मिकता और प्रार्थना में विकास करते हुए स्वीकारने की जरुरत है। यह एक बड़ी चुनौती है। इस तरह ब्रह्मचर्य अपने में अर्थपूर्ण और प्रभावकारी होता जो सत्यता को व्यक्त करता है। “इस ईश्वरीय उपहार को हमें मिट्टी के परात में एक निधि स्वरूप सहेज कर रखने की जरूरत है।”   

धन पर सवाल

सिनॉड के खर्च पर पूछे गये सवाल का उत्तर देते हुए संचार विभाग के अधिकारी पॉलो रूफीनी ने कहा कि यह कलीसियाई कार्यवाही हैं जिसका खर्च वाटिकन वहन करता है।

25 October 2019, 16:50