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वाटिकन राज्य सचिव, कार्डिनल पिएत्रो पारोलिन वाटिकन राज्य सचिव, कार्डिनल पिएत्रो पारोलिन   (Vatican Media)

अफ्रीका में संत पापा, आशा के साक्षी : कार्डिनल पारोलिन

अगले सप्ताह से शुरू होने वाली मोजाम्बिक, मडागास्कर और मॉरीशस की प्रेरितिक यात्रा में संत पापा फ्राँसिस शांति, सृष्टि की देखभाल और मुलाकात की एक संस्कृति को प्रोत्साहित करेंगे।

सुनीता माग्रेट मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार 31 अगस्त 2019 (रेई) :  संत पापा फ्राँसिस अगले बुधवार को इटली से बाहर अपनी 31वीं प्रेरितिक यात्रा शुरु करेंगे। वे 4 से 10 सितम्बर तक मोजाम्बिक, मडागास्कर और मॉरीशस का दौरा करेंगे।

वाटिकन न्यूज के साथ एक साक्षात्कार में, वाटिकन राज्य सचिव, कार्डिनल पिएत्रो पारोलिन ने बताया कि संत पापा इस यात्रा के दौरान शांति और संवाद को एक मजबूत प्रोत्साहन देंगे। भले ही आमतौर पर अफ्रीका को संघर्ष और महामारी जैसी समस्याओं के साथ जोड़ा जाता है , परंतु कार्डिनल का मानना है कि "अफ्रीका मानवता, मूल्यों, संस्कृति और विश्वास की समृद्ध भूमि" है और उन्हें लगता है कि संत पापा फ्राँसिस इन भावनाओं के साथ अपनी यात्रा पर जा रहे हैं।

आशा को बढ़ावा देना

उनके अनुसार, संत पापा अपनी यात्रा में आशा के तीन विशेष आयामों पर जोर देंगे। "पहला शांति, दूसरा सृष्टि की देखभाल, जिसे उन्होंने अपने प्रेरितिक उद्बोधन ‘लौदातो सी’ में लिखा है। तीसरा मुद्दा होगा मुलाकात या संवाद की संस्कृति को बढ़ावा देना।

संत पापा पॉल छठे  की अभिव्यक्ति का उपयोग करते हुए, कार्डिनल पारोलिन ने कहा, "अफ्रीका अभिन्न विकास की प्रयोगशाला की तरह है।" उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर प्रकाश डाला कि "आशा के आयाम और भविष्य की तलाश, कई सकारात्मक संकेतों से शुरू होती है जो महाद्वीप के भीतर हैं।"

मोज़ाम्बिक का "नया पृष्ठ"

कार्डिनल पारोलिन ने कहा कि अगस्त 2018 में मोजाम्बिक की सरकार और पूर्व की रेनमो विद्रोहियों के बीच शांति का समझौता, आशा की निशानी है, जो अब मुख्य विपक्षी पार्टी है।

कार्डिनल ने इसे एक बहुत ही जटिल और दुखद अतीत के बाद"मोजाम्बिक के इतिहास में एक नया पृष्ठ" माना है, । पुर्तगाली शासन के खिलाफ स्वतंत्रता की लड़ाई के तुरंत बाद, फ्रीलामो और रेनमो गुटों के बीच एक गृह युद्ध छिड़ गया जो रोम जनरल शांति समझौते सन् 1992 तक चला।

कार्डिनल पारोलिन ने बताया कि इन सब में, कलीसिया को बहुत नुकसान हुआ है, लेकिन वह आशावादी है और अब कलीसिया प्रगति, विकास, धार्मिक स्वतंत्रता और शांति की स्पष्ट इच्छा रखती है।

संत पापा फ्राँसिस 4 सितम्बर बुधवार शाम मोजाम्बिक राजधानी मापुतो पहुंचेंगे। शुक्रवार सुबह वे मडागास्कर की राजधानी एंटानानारिवो के लिए उड़ान भरेंगे।

मडागास्कर के युवाओं के लिए आशा

मडागास्कर में, आबादी का एक तिहाई काथलिक हैं। अपने विविध जीवों और वनस्पतियों के लिए जाना जाने वाला द्वीप राष्ट्र न केवल वनों की कटाई और सूखे के साथ बल्कि राजनीतिक समस्याओं से भी घिरा हुआ है।

वाटिकन सचिव का कहना है कि "संत पापा की यात्रा विशेष रूप से युवाओं को विकास और भविष्य की संभावना के प्रयास को गति प्रदान करेगी।" इस संबंध में, कलीसिया अपनी गरीबी के बावजूद, अपनी उपस्थिति को उल्लेखनीय रूप से महसूस करती है, विशेष रूप से अपने उदार कार्यों और शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से, "आबादी के लिए आशा का संकेत" है। कार्डिनल ने कहा कि संत पापा फ्राँसिस "कलीसिया की ओर से इस प्रतिबद्धता और प्रयास को और मजबूत करेंगे।"

मॉरीशस - मुलाकात की संस्कृति, सहयोग

मडागास्कर से, संत पापा फ्राँसिस 9 सितंबर को हिंद महासागर द्वीप राष्ट्र मॉरीशस के लिए उड़ान भरेंगे। देश की मिश्रित आबादी बड़े पैमाने पर हिंदू, ख्रीस्तीय और इस्लाम धर्मों को मानते हैं,। संत पापा फ्राँसिस अपनी यात्रा के दौरान आशा के "तीसरे आयाम", "मुलाकात की संस्कृति" को बढ़ावा देंगे, जो स्वाभाविक रूप से सभी देशों और राष्ट्रों पर लागू होते हैं।

अफ्रीकी महाद्वीप

अफ्रीकी महाद्वीप के बारे में बोलते हुए, कार्डिनल पारोलिन कहते हैं कि सबसे पहले अफ्रीकी लोगों को अपने समाजों और अपने राज्यों के भीतर अफ्रीकी समस्याओं के समाधान की अपनी जिम्मेदारी के बारे में जागरूक होना चाहिए। उन्हें यह जानने की जरूरत है कि अफ्रीका का भाग्य और भविष्य उनके हाथों में है और उन्हें विकास और शांति में बाधा डालने वाली हर चीज से लड़ने की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।

31 August 2019, 14:14