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सूडान के बाल सैनिक सूडान के बाल सैनिक  (AFP or licensors)

बच्चों को बचाने के लिए वाटिकन द्वारा प्रयासों का आह्वान

अमरीका के लिए वाटिकन के स्थायी पर्यवेक्षक महाधर्माध्यक्ष बेरनादितो औजा ने 2 अगस्त को बच्चों और सशस्त्र संघर्ष पर एक सुरक्षा परिषद की खुली बहस को संबोधित किया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन प्रतिनिधि ने संघर्ष की विभिन्न स्थितियों में हिंसा एवं अधिकारों के दुरूपयोग के कारण पीड़ित बच्चों के लिए आवाज उठायी तथा अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वह उनकी रक्षा हेतु प्रयास तेज करे, विशेषकर, बाल सैनिकों को रिहा करने और अन्य गंभीर उल्लंघनों में फंसे युवाओं के समाज में पुनःएकीकरण के लिए।

स्कूलों से बाहर

उन्होंने बच्चों के लिए चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बच्चे जब बढ़ रहे होते हैं उन्हें शिक्षा प्राप्त करने और खेलने की स्वतंत्रता होना चाहिए जबकि वे गंभीर अतिक्रमण के शिकार बनते हैं। यह न केवल उनके बचपन की खुशियाँ को छीन लेता है बल्कि उनपर लम्बे समय के लिए शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक क्षति का खतरा उत्पन्न करता है।

उन्होंने कहा कि अफीकी देशों में कई बच्चे और युवा खानों में काम करने के लिए स्कूल छोड़ देते हैं और उससे भी बुरा है कि उन्हें युद्धों में लड़ने के लिए मजबूर किया जाता है। गरीब परिवारों की मदद करने का प्रलोभन देकर उनकी भर्ती बाल सैनिक के रूप में की जाती है।

महाधर्माध्यक्ष औजा ने सामाजिक आर्थिक नुकसान और संभावनाओं की कमी की ओर इशारा किया जिसके कारण युवाओं के लिए सशस्त्र संघर्ष ही एक विकल्प है।

शांति की शिक्षिकाओं के रूप में महिलाएँ

औजा ने कहा "परिवार एवं स्कूलों में शांति की शिक्षा देने में महिलाओं की एक विशेष भूमिका है।" संघर्ष के दौरान स्कूल, अस्पतालों और शरण स्थानों को निशाने पर रखना, अंतरराष्ट्रीय कानून और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के खिलाफ है अतः उसे रोका जाना चाहिए। इस संबंध में, उन्होंने सीरिया के इदलिब में बमबारी में पकड़े गए बच्चों के लिए पोप फ्रांसिस की चिंता को याद किया। वाटिकन प्रतिनिधि ने यूएन द्वारा शांति के प्रयासों की सराहना की।

चेतना जागृत करना

महाधर्माध्यक्ष ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वह बाल सैनिकों को रिहा करने का प्रयास करे तथा अन्य गंभीर उल्लंघन के शिकार युवाओं को समाज में पुनः एकीकरण हेतु समर्थन दिया जाए। इस तरह के समर्थन में, उन बच्चों को भी शामिल किया जाए, जिन्होंने संघर्ष में यौन हिंसा के परिणामस्वरूप गर्भधारण किया है। उन परिस्थितियों में भी उन बच्चों की प्रतिष्ठा कम नहीं होती, अतः उन्हें हिंसा और मौत से बचाया जाना चाहिए।

06 August 2019, 16:11