33वें विश्व रोगी दिवस पर पोप फ्राँसिस का संदेश
वाटिकन न्यूज
वाटिकन सिटी, मंगलवार, 28 जनवरी 2025 (रेई) : 33वें विश्व रोगी दिवस के लिए अपने संदेश में, पोप फ्राँसिस ने उन गंभीर सवालों पर प्रकाश डाला है जो पीड़ितों और उनकी देखभाल करनेवालों के सामने आते हैं। "हम कैसे मजबूत हो सकते हैं जब हमारा शरीर गंभीर, दुर्बल करनेवाली बीमारियों का शिकार हो जाता है जिसके लिए महंगे उपचार की आवश्यकता होती है जिसे हम वहन नहीं कर सकते? हम कैसे मजबूती दिखा सकते हैं जब, अपने दुःखों के साथ साथ, हम अपने उन प्रियजनों को देखते हैं जो हमारा समर्थन करते हैं लेकिन हमारी मदद करने में असमर्थ महसूस करते हैं?"
हालाँकि सच्ची आशा “निराश नहीं करती” और वास्तव में “हमें परीक्षा के समय में मजबूत बनाती है”, लेकिन यह भरोसा अक्सर दुःख की वास्तविक स्थितियों में उलझन भरा साबित हो सकता है। पोप कहते हैं, “ऐसी स्थितियों में, हमें अपनी खुद की तुलना में ज़्यादा ताकत की ज़रूरत महसूस होती है। हमें एहसास होता है कि हमें ईश्वर की मदद, उनकी कृपा, उनकी दया और उनकी आत्मा के वरदान के रूप में बल की जरूरत है।”
संत पापा ने पीड़ितों के करीब रहने के लिए विश्वासियों को तीन खास तरीकों : "मुलाकात, उपहार और साझा करने” पर चिंतन करने हेतु आमंत्रित किये हैं।
मुलाकात
पोप याद करते हैं कि जब येसु ने 72 शिष्यों को मिशन पर भेजा, तो उन्होंने उन्हें रोगियों से कहने के लिए कहा, "ईश्वर का राज्य तुम्हारे करीब आ गया है," अर्थात्, "रोगियों को उनकी दुर्बलता को प्रभु से मिलने का एक अवसर के रूप में देखना।
उन्होंने बताया कि यह मुलाकात परिवर्तनकारी हो सकती है, जो हमें “एक मजबूत चट्टान खोजने में मदद करती है जिससे हम जीवन के तूफानों के बीच चिपके रह सकते हैं, एक ऐसा अनुभव जो… हमें और भी मजबूत बनाता है क्योंकि यह हमें सिखाता है कि हम अकेले नहीं हैं।”
उपहार
पोप कहते हैं कि यह हमें हमारे दुःख में ईश्वर की निकटता को एक उपहार के रूप में अनुभव करने की ओर ले जाता है। "किसी भी अन्य चीज से ज्यादा, दुःख हमें यह एहसास कराता है कि आशा प्रभु से आती है। इसलिए, सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण, यह एक उपहार है जिसे 'ईश्वर की निष्ठा के प्रति वफादार' बने रहकर प्राप्त किया जाना और विकसित किया जाना चाहिए।"
पोप आगे बताते हैं कि “केवल मसीह के पुनरुत्थान में ही हमारा अपना जीवन और भाग्य अनंत काल के अनंत क्षितिज में अपना स्थान पाता है।” पोप फ्राँसिस अपने पूर्वाधिकारी बेनेडिक्ट सोलहवें का हवाला देते हुए बताते हैं कि एक “महान आशा” है कि कुछ भी हमें मसीह से अलग नहीं कर सकता, “प्रकाश की उन सभी छोटी-छोटी झलकियों का स्रोत है जो हमें जीवन की परीक्षाओं और बाधाओं के माध्यम से अपना रास्ता देखने में मदद करती हैं।”
साझा करना
अंत में, बांटने (शेरिंग) करने के माध्यम से ईश्वर हमारे करीब है, जिसे अक्सर दुःख के स्थानों में देखा जाता है। "कितनी बार, बीमारों के बिस्तर के पास, हम आशा करना सीखते हैं!" "कितनी बार, पीड़ित लोगों के साथ हमारी निकटता से, हम विश्वास करना सीखते हैं! कितनी बार, जब हम जरूरतमंदों की देखभाल करते हैं, तो हम प्यार पाते हैं!"
संत पापा हमें रोगियों, डॉक्टरों, देखभाल करनेवालों, परिवार और दोस्तों के बीच "इन अनुग्रह से भरे मुलाकातों की सुंदरता और महत्व की सराहना करना सीखने" की आवश्यकता पर जोर देते हैं। "ये सभी संजोए जानेवाले प्रकाश की किरणें हैं; विपत्ति की अंधेरी रात में भी, वे हमें शक्ति देते हैं, साथ ही साथ हमें प्रेम और निकटता में जीवन का गहरा अर्थ सिखाते हैं।"
जयंती में महत्वपूर्ण भूमिका
पोप फ्राँसिस ने अपने संदेश का समापन बीमार और पीड़ित लोगों के लिए एक विशेष शब्द के साथ किया, जिसमें उन्होंने उन्हें याद दिलाया कि जयंती में उनकी भूमिका “विशेष रूप से महत्वपूर्ण” है। “आपकी एक साथ यात्रा सभी के लिए आशा का प्रतीक है, ‘सम्मान का एक भजन, आशा का एक गीत है।’”
उन्होंने उन्हें पूरी कलीसिया एवं अपने नाम पर उनकी गवाही के लिए धन्यवाद देते हैं तथा आश्वस्त करते हैं कि वे हमेशा उनके लिए प्रार्थना करते हैं, और उन्हें अपना आशीर्वाद देते हैं।
विश्व रोगी दिवस 2025
विश्व रोगी दिवस प्रत्येक वर्ष 11 फरवरी को मनाया जाता है, जब लूर्द की धन्य कुँवारी मरियम का पर्व मनाया जाता है, तथा हर तीन साल में लूर्द के मरियम तीर्थ स्थल एक विशेष उत्सव मनाया जाता है।
हालांकि, जयंती वर्ष 2025 को देखते हुए, पोप फ्राँसिस ने इस समारोह को एक वर्ष के लिए स्थगित करने का निर्णय लिया है, । अब विश्व रोगी दिवस का उत्सव 2026 में पेरू के अरेक्विपा में चेपी की कुँवारी मरियम के तीर्थस्थल पर मनाया जाएगा।
पोप के इस निर्णय की घोषणा सोमवार की सुबह वाटिकन के समग्र मानव विकास को बढ़ावा देने के लिए गठित विभाग द्वारा प्रकाशित एक प्रेस विज्ञप्ति में की गई। बयान में कहा गया है कि जुबली वर्ष के लिए, बीमारों का विश्व दिवस 11 फरवरी को हमेशा की तरह धर्मप्रांतीय स्तर पर सामान्य तरीके से मनाया जाएगा; साथ ही 5-6 अप्रैल को बीमारों और स्वास्थ्य सेवा कर्मियों की आगामी जयंती और 28-29 अप्रैल को विकलांग लोगों की जयंती का भी उल्लेख किया गया है।
Thank you for reading our article. You can keep up-to-date by subscribing to our daily newsletter. Just click here