पोप: ‘हम ख्रीस्तीयों के बिना इराक की कल्पना नहीं कर सकते’
पोप फ्राँसिस
संत पापा लिखते हैं, “मैं कृतज्ञता के साथ इराक की अपनी प्रेरितिक यात्रा को याद करता हूँ, जो मैंने मार्च 2021 में की थी। महामारी और सुरक्षा चिंताओं के बावजूद, मैंने ख्रीस्तीयों और उस देश के सभी भले लोगों के प्रति अपना स्नेह और एकजुटता व्यक्त करने के लिए यात्रा की। वे मेरे दिल और प्रार्थनाओं में एक निरंतर और स्थायी स्थान रखते हैं।
इराक के सामने आनेवाली कई चुनौतियों के बावजूद, मैं इस देश को आशा की दृष्टि से देखता हूँ, क्योंकि इसमें असाधारण क्षमता है। यह क्षमता, सबसे बढ़कर, इराक के लोगों में निहित है - वे सभी जो नागरिक समाज के पुनर्निर्माण में योगदान दे रहे हैं, देश में लोकतंत्र को बढ़ावा दे रहे हैं, और धर्मों के बीच एक ईमानदार और यथार्थवादी संवाद के लिए प्रतिबद्ध हैं।
यही कारण है कि नजफ़ के ग्रैंड अयातुल्ला, सैय्यद अली अल-सिस्तानी से मेरी मुलाकात महत्वपूर्ण और सार्थक थी। उस मुलाकात का उद्देश्य पूरी दुनिया को यह संदेश देना था: धर्म के नाम पर हिंसा धर्म का दुरुपयोग है।
धर्मों के रूप में, हमारा कर्तव्य शांति बनाए रखना है, और हमें इस शांति को जीना, सिखाना और आगे बढ़ाना चाहिए। इस संदर्भ में, मैं दक्षिणी इराक में उर की अपनी यात्रा के बारे में भी सोचता हूँ, जहाँ विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों के रूप में, हमने एक साथ बात की और प्रार्थना की - उन्हीं सितारों के नीचे जिन्हें हमारे पिता अब्राहम ने हज़ारों साल पहले देखा था जब उन्होंने आसमान की ओर आँखें उठायी थी।
ईसाई धर्म के दो हज़ार साल के इतिहास की समृद्ध विरासत अभी भी वैज्ञानिक रूप से काफी हद तक अज्ञात है। मैं मेसोपोटामिया में प्रोटो-ईसाई ईशशास्त्रीय स्कूलों, यूफ्रेट्स और टिगरिस नदियों के किनारे ख्रीस्तीयों और मुसलमानों के बीच सदियों से चले आ रहे शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व, क्षेत्र में विभिन्न काथलिक संस्कारों, विभिन्न ख्रीस्तीय समुदायों के बीच संघर्षों, 20वीं सदी की शुरुआत में उत्पीड़न के समय और अन्य राजनीतिक प्रतिशोधों तथा आज तक ख्रीस्तीयों की उपस्थिति की निरंतरता के बारे में सोचता हूँ।
इसलिए यह संतोषजनक है कि मैथियास कोप की इस कृति में इस विरासत और इतिहास को विभिन्न धार्मिक अध्ययनों और विशाल साहित्य के संदर्भ में चित्रित किया गया है। लेखक इराक में कलीसिया की भागीदारी और अपने राजनयिक प्रतिनिधियों के माध्यम से वाटिकन की गतिविधियों पर विशेष ध्यान देता है, जो इराक और वहाँ रहनेवाले ख्रीस्तीयों के लिए पोप की कई तरह की चिंताओं को दर्शाता है।
इस प्रकार, एक महान भित्तीचित्र बनाया गया है - जैसा कि लेखक स्वयं लिखते हैं, इराक के ख्रीस्तीयों को सलाम, जो अपने समृद्ध इतिहास और विरासत के संरक्षण में गहरी रुचि रखते हैं - एक ऐसे भविष्य के लिए जो आज भी, प्रवासन और राजनीतिक अनिश्चितता से खतरे में है।
मैं अपनी गहरी धारणा व्यक्त करते हुए कहना चाहूँगा कि ख्रीस्तीयों के बिना इराक की कल्पना करना असंभव है, क्योंकि वे, अन्य विश्वासियों के साथ, देश की अनूठी पहचान में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं जो शुरू से सह-अस्तित्व, सहिष्णुता और आपसी स्वीकृति का स्थान रहा है।
इराक और उसके लोगों को यह अनुग्रह प्रदान किया जाए कि वे मध्य पूर्व और दुनिया में यह स्पष्ट कर सकें कि सभी मतभेदों के बावजूद एक साथ शांतिपूर्वक रहना संभव है (1)।
(1) प्रेरितिक यात्रा की पहली वर्षगांठ (28 फरवरी, 2022) के अवसर पर इराक में ख्रीस्तीय कलीसियाओं के प्रतिनिधियों को संबोधन।
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