परमधर्मपीठीय न्यायाधिकरण के सदस्यों से सन्त पापा फ्राँसिस
वाटिकन सिटी
वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 31 जनवरी 2025 (रेई, वाटिकन रेडियो): वाटिकन स्थित परमधर्मपीठीय न्यायाधिकरण के न्यायिक वर्ष के उद्घाटन के अवसर पर शुक्रवार को सन्त पापा फ्राँसिस ने न्यायाधिकरण के अभिवक्ताओं एवं न्यायिक अधिकारियों के कार्य के प्रति अपनी प्रशंसा और कृतज्ञता व्यक्त की।
विवाह शून्यन सम्बन्धी
सन्त पापा ने स्मरण दिलाया कि इस वर्ष दो मोतू प्रोप्रियो यानि स्वप्रेरणा से रचित परमाध्यक्षीय पत्रों, मितिस इयूदेक्स दोमिनस इयसस और मितिस एत मिसेरिकोर्स इयसस की दसवीं वर्षगांठ है, जिसके साथ उन्होंने विवाह की अमान्यता की घोषणा करने की प्रक्रिया में सुधार किया था और जिसे न्यायाधिकरकण ने सभी श्रद्धालुओं के लाभ के लिए योग्यता और परिश्रम के साथ लागू किया।
सन्त पापा ने कहा कि उक्त मोतू प्रोप्रियो का लक्ष्य धर्मप्रान्तीय धर्माध्यक्षों की भूमिका को केन्द्र में रखना था. जो परमधर्मपीठीय न्यायाधिकरण के समीप रहकर प्रकरणों की भली प्रकार जाँच कर सकें तथा उचित निर्णय दे सकें। इन मोतू प्रोप्रियो द्वारा धर्माध्यक्षों को यह सुनिश्चित करने का दायित्व सौंपा गया है कि विश्वासियों को इस प्रक्रिया के अस्तित्व के बारे में पूरी जानकारी रहे, जो कि उनकी आवश्यकता की स्थिति के लिए एक संभावित समाधान हो सकता है।
प्रक्रियाएं निःशुल्क हों
सन्त पापा ने कहा कि दुर्भाग्यवश कभी-कभी श्रद्धालु इस समाधान के अस्तित्व से अनभिज्ञ रहते हैं। इसके अलावा, यह महत्वपूर्ण है कि "प्रक्रियाओं को निःशुल्क होने की गारंटी दी जाए, ताकि कलीसिया मसीह के नि:शुल्क प्रेम को प्रकट कर सके जिनके द्वारा हम सभी को मुक्ति प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से, धर्माध्यक्ष की चिंता कानून द्वारा अपने धर्मप्रांत में एक न्यायाधिकरण की स्थापना सुनिश्चित करने में व्यक्त की गई है, जिसमें इस कार्य के लिए उपयुक्त और अच्छी तरह से प्रशिक्षित लोग, चाहे वे पुरोहित हों या लोकधर्मी, सभी कार्यरत हों। धर्माध्यक्ष का काम यह भी सुनिश्चित करना है कि धर्मप्रान्त में इस कार्य के लिये ज़िम्मेदार लोग अपना काम निष्पक्षता और लगन के साथ करें।
मौलिक अधिकारों की गारंटी
सन्त पापा ने कहा कि विवाह शून्यन की प्रक्रिया में उक्त सुधारों की आवश्यकता इसलिये पड़ी कि हम उन अनेक विश्वासियों की पीड़ा और आशा की उपेक्षा नहीं कर सके, जो अपनी व्यक्तिगत स्थिति की सच्चाई के बारे में स्पष्टता चाहते हैं और परिणामस्वरूप, धार्मिक जीवन में पूर्ण भागीदारी की संभावना के बारे में भी। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने "दुखद वैवाहिक अनुभव जिया है, उनके लिए विवाह की वैधता की पुष्टि करना एक महत्वपूर्ण संभावना का प्रतिनिधित्व करता है;" और इन लोगों को इस मार्ग पर यथासंभव आसानी से यात्रा करने में मदद की जानी चाहिए।"
सन्त पापा बेनेडिक्ट 16 वें द्वारा 2006 में कहे गये शब्दों को उद्धृत कर सन्त पापा फ्राँसिस ने कहा, प्रक्रियाओं को स्थापित करने वाले नियमों में कुछ मौलिक अधिकारों और सिद्धांतों की गारंटी होनी चाहिए, विशेष रूप से बचाव का अधिकार और विवाह की वैधता की धारणा। इस प्रक्रिया का उद्देश्य "श्रद्धालुओं के जीवन को अनावश्यक रूप से जटिल बनाना या उनकी मुकदमेबाजी को बढ़ाना नहीं है, बल्कि केवल सत्य की सेवा करना है।"
अविच्छेद्यता का उपहार
सन्त पापा ने कहा, परिवार प्रेम के मिलन का जीवंत उपहार है, ऐसा प्रेम जो त्रियेक ईश्वर में प्रतिबिम्बित होता है। इसके अलावा, विवाह में जुड़े हुए पति-पत्नी को अविच्छेद्यता का उपहार मिला है, जो कि उनके अपने प्रयास से प्राप्त किया जाने वाला लक्ष्य नहीं है, न ही उनकी स्वतंत्रता की सीमा है, बल्कि यह ईश्वर का वादा है, जिसपर अटल विश्वास मनुष्य के लिये इस लक्ष्य की प्राप्ति को सम्भव बनाती है। जैसा कि सन्त जॉन पौल द्वितीय ने कहा है, वास्तव में, "विवाह की वैधता या अमान्यता का प्रत्येक न्यायोचित निर्णय, कलीसिया और विश्व दोनों में अविच्छेद्यता की संस्कृति में योगदान है।"
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