नेत्रहीन एवं दृष्टिबाधित लोगों से सन्त पापा फ्राँसिस
वाटिकन सिटी
दृष्टिबाधित युवा संगठन के सदस्यों ने सन्त पापा फ्राँसिस से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर सन्त पापा ने उन्हें जयन्ती वर्ष के आदर्शवाक्य का स्मरण दिलाते हुए कहा कि वे भी आशा के तीर्थयात्री बनें।
चलते रहें
सन्त पापा ने युवाओं से कहा कि उनकी मंगलकामना है कि वे विश्वास में अनवरत आगे बढ़ते जायें। उन्होंने कहा, "तीर्थयात्री" शब्द हमें पैदल चलने के बारे में चिन्तन का आग्रह करता है, इसलिए मेरी मंगलकामना है कि आप हमेशा चलते रहने वाले लोग बने रहें, हर उम्र में: बच्चे, युवा, वयस्क, बुजुर्ग, हमेशा आगे बढ़ने की इच्छा के साथ, कभी न रुकते हुए चलते रहें।
तीर्थयात्री का लक्ष्य
सन्त पापा ने कहा कि तीर्थयात्री का एक लक्ष्य होता है, यह लक्ष्य उसे एक पवित्रस्थल की ओर आकर्षित करता तथा थकान के क्षणों में उसे राहत प्रदान करता है, उसी प्रकार जयन्ती वर्ष के हम तीर्थयात्रियों का लक्ष्य है पवित्र द्वार। यह प्रभु येसु ख्रीस्त एवं उनके मुक्तिरहस्य का प्रतिनिधित्व करता है, जो हमें पाप की गुलामी से मुक्ति दिलाते तथा ईश्वर और पड़ोसी प्रेम करने एवं उनकी सेवा के प्रति स्वतंत्र रूप से नवजीवन में प्रवेश करने की अनुमति प्रदान करते हैं।
सन्त पापा ने युवाओं से कहा कि वे बिना लक्ष्य के नहीं चलें बल्कि जीवन के तीर्थयात्री बनें, अपने मन में येसु से साक्षात्कार की इच्छा रखें, उनके वचनों को सुनने के लिये उत्सुक रहें, जो जीवन को अर्थ देते हैं। उन्होंने कहा कि येसु के शब्द हमें आनन्द, शांति, अच्छाई और कोमलता से भर देते हैं जो अन्य कोई हमें नहीं दे सकता।
सुसमाचार के महान "चैंपियन"
येसु के वचनों से प्रभावित होकर सुसमाचार प्रचार के सन्देशवाहक बनें अनेक सन्तों की गवाही का स्मरण दिलाकर सन्त पापा ने कहा कि युवा भी ट्यूरिन के युवासन्त पियर जियोर्जियो फ्रासाती या मिलान के कार्लो एक्यूटिस की तरह बनें जिन्होंने सुसमाचार प्रचार के प्रति समर्पित होकर अपना जीवन व्यतीत कर दिया था। इसी तरह सन्त पापा ने कहा कि असीसी के सन्त फ्राँसिस और सन्त क्लेयर, 19वीं शताब्दी की बालक येसु की तेरेसा जैसे सुसमाचार के महान तीर्थयात्री और "चैंपियन" भी हैं, जिनका आप आदर्श ग्रहण करें तथा अपने जीवन को अर्थपूर्ण बनायें।
सन्त पापा ने युवाओं को आमंत्रित किया वे भी इन सन्तों के पद चिन्हों पर चलकर उन सभी लोगों के लिये आशा के तीर्थयात्री बनकर उम्मीद की छोटी-छोटी निशानियाँ बनें जिनसे वे अपने दैनिक जीवन में मिलते हैं।
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