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2025.01.27धर्माध्यक्षओं, संचार के लिए धर्माध्यक्षीय आयोगों के अध्यक्षों और  संचार कार्यालयों के निदेशकों के साथ संत पापा फ्राँसिस 2025.01.27धर्माध्यक्षओं, संचार के लिए धर्माध्यक्षीय आयोगों के अध्यक्षों और संचार कार्यालयों के निदेशकों के साथ संत पापा फ्राँसिस  (Vatican Media)

संत पापा ने काथलिक संचारकों से आशा लाने के लिए नेटवर्क बनाने का आग्रह किया

संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन में लगभग 250 धर्माध्यक्षों, संचार के लिए धर्माध्यक्षीय आयोगों के अध्यक्ष और धर्माध्यक्षीय सम्मेलनों के संचार कार्यालयों के निदेशकों से मुलाकात की। एक "सिम्फोनिक" कार्य करने का निमंत्रण जिसमें "हर कोई" और हर भाषा के साथ शामिल हो: संचार करना "तैयार किए गए वाक्यांशों या नारों को दोहराना नहीं है" बल्कि "प्रेम का कार्य" है।

वाटिकन न्यूज

वाटिकन सिटी, सोमवार 27 जनवरी 2025 : “सभी को शामिल करते हुए” संवाद करने, “भविष्य को एक साथ लिखने” के लिए प्रोत्साहन, क्योंकि “केवल एक साथ” ही “हमारे सामने आई सुंदरता” को प्रसारित करना संभव है और “ऑनलाइन” खुद को “निराशा और गलत सूचना के समुद्र से” बचाना है। संत पापा फ्राँसिस ने आज सुबह, 27 जनवरी को संत क्लेमेंटीन सभागार में धर्माध्यक्षओं, संचार के लिए धर्माध्यक्षीय आयोगों के अध्यक्षों और धर्माध्यक्षीय सम्मेलनों के संचार कार्यालयों के निदेशकों को संबोधित किया।

संत पापा ने उपस्थित लोगों का स्वागत किया, जो आज से बुधवार तक संचार की जयंती के हिस्से के रूप में काथलिक संस्थागत संचारकों के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेंगे। संत पापा ने कहा कि हमें इस बात पर चिंतन करने की जरुरत है कि हम किस तरह से संवाद करते हैं, किस तरह से हम "इतनी निराशा के बीच आशा बोते हैं", किस तरह से "विभाजन के वायरस" का इलाज किया जाता है और क्या कलीसिया केवल "कॉर्पोरेट मार्केटिंग के नियमों" के अनुसार संवाद करता है। संत पापा ने आत्मपरीक्षण हेतु कई सवाल भी पूछा: "क्या हम यह प्रमाणित करने में सक्षम हैं कि मानव इतिहास एक गतिरोध पर समाप्त नहीं हुआ है? र हम भविष्य के प्रति एक अलग दृष्टिकोण कैसे इंगित कर सकते हैं जो पहले से ही लिखा नहीं गया है? मुझे यह अभिव्यक्ति पसंद है कि भविष्य लिखना। भविष्य लिखना हमारे ऊपर है।"

सामान्य बातों, पूर्वाग्रहों और रूढ़ियों से परे

संत पापा फ्राँसिस ने कहा, "ख्रीस्तीय संचार यह दर्शाता है कि ईश्वर का राज्य निकट है, एक चमत्कार के रूप में जिसे हर व्यक्ति, हर कोई अनुभव कर सकता है" और इसे बताया जाना चाहिए "सामान्य बातों से परे, बुराई से परे, पूर्वाग्रहों से परे, रूढ़ियों से परे, खुद से परे देखने की कुंजी प्रदान करना। ईश्वर का राज्य हमसे परे है" और "हमारी अपूर्णता के माध्यम से भी आता है।" ईश्वर का राज्य दूसरों के लिए आरक्षित सावधानीपूर्वक देखभाल में आता है। यह अच्छाई के लिए आशा बोने की क्षमता में आता है।

अच्छाई देखने और बताने का आह्वान

धर्माध्यक्षीय संचार आयोगों के अध्यक्षों और संचार कार्यालयों के निदेशकों के लिए जो "एक संस्थागत सेवा है, यह प्रत्येक बपतिस्मा प्राप्त व्यक्ति की बुलाहट भी है", संत पापा ने स्पष्ट किया: "प्रत्येक ख्रीस्तीय को उन अच्छी कहानियों को देखने और बताने के लिए बुलाया जाता है जो एक व्यक्ति के लिए उपयोगी है, जिसे खराब पत्रकारिता मिटाने की कोशिश करती है और केवल बुराई को जगह देती है।"

हमेशा संवाद करें, सबको शामिल करें

संत पापा फ्राँसिस की चेतावनी है कि बुराई को छिपाएं नहीं - जो मौजूद है - बल्कि "उकसाना चाहिए, सवाल और जवाब उत्पन्न करना चाहिए": इस कारण से, आपका कार्य महान है और आपको खुद से बाहर निकलकर, एक "सिम्फोनिक" कार्य करने की आवश्यकता है, जिसमें सभी, सभी को शामिल किया जाए, बुजुर्गों और युवाओं, महिलाओं और पुरुषों को महत्व दिया जाए; हर भाषा के साथ, शब्दों, कला, संगीत, पेंटिंग, छवियों के साथ। हमेशा संवाद करें।

संत पापा ने तब संचारात्मक कार्य की मौलिकता पर जोर दिया: "जब हम संवाद करते हैं, तो हम भाषाओं, पुलों के निर्माता होते हैं। हम निर्माता हैं", और हम "सद्भाव", "बाबेल के नए टावरों के लिए एक ठोस विकल्प" संचारित करते हैं, जहां "हर कोई बोलता है और एक दूसरे को नहीं समझता है।"

संवाद करना प्रेम का कार्य है

दो शब्दों की विरासत: "एक साथ" और "नेटवर्क," प्रेम के साथ यह संभव है कि “उन लोगों को भी शामिल किया जाए जिन्होंने गलतियाँ की हैं”, “जो विभाजित हैं उन्हें एकजुट किया जाए”, “निराश न करें” और “आशा बोएं”, जो कि “आशावाद बोने” से अलग है।

हमारे लिए संवाद करना कोई युक्ति नहीं है, यह कोई तकनीक नहीं है। यह न तो रूढ़िगत उक्तियों या नारों को दोहराने के बारे में है, न ही यह केवल प्रेस विज्ञप्ति लिखने के बारे में है। संवाद करना प्रेम का कार्य है। केवल प्रेम का एक स्वतंत्र कार्य ही अच्छाई का जाल बुनता है। लेकिन नेटवर्क की देखभाल और मरम्मत की हर दिन जरूरत होती है। धैर्य और विश्वास के साथ

गलत सूचना के खिलाफ नेटवर्क

नेटवर्क दूसरा शब्द है जिस पर संत पापा फ्राँसिस ने हमें विचार करने के लिए आमंत्रित किया। आज, हम इस शब्द के पुराने अर्थ को भूल गए हैं, जैसे कि यह केवल डिजिटल दुनिया से जुड़ा हुआ है। वास्तव में, यह एक प्राचीन शब्द है। सोशल नेटवर्क के बारे में सोचने से पहले, यह हमें मछुआरों के जाल और येसु द्वारा पेत्रुस को मनुष्यों का मछुआरा बनने के निमंत्रण की याद दिलाना चाहिए। ऐसा करने का मतलब है कौशल, ज्ञान और संसाधनों को एक ऐसे नेटवर्क में डालना जो पर्याप्त जानकारी प्रदान करने में सक्षम हो और इस तरह निराशा और गलत सूचना के समुद्र से बच सके। यह अपने आप में पहले से ही एक संदेश है, एक सबक है जिसे हम सीख सकते हैं।

संत पापा ने कहा कि हम साथ मिलकर कितना कुछ हासिल कर सकते हैं - डिजिटल युग के नए उपकरणों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की बदौलत - अगर हम तकनीक को मूर्ति में बदलने के बजाय नेटवर्किंग के प्रति अधिक प्रतिबद्ध होते। मुझे एक बात स्वीकार करनी होगी: कृत्रिम बुद्धिमत्ता से ज़्यादा मुझे प्राकृतिक बुद्धिमत्ता की चिंता है, वह बुद्धिमत्ता जिसे हमें विकसित करना चाहिए।

ईश्वर ही हमारे संचार का रहस्य है।

इसलिए, संत पापा ने प्रेरणा दी: "जब हमें लगे कि हम रसातल में गिर गए हैं, तो हमें अपने से परे, अपने से उपर देखना चाहिए", क्योंकि "कुछ भी नहीं खोया है" और "हम हमेशा एक दूसरे को और सभी को ईश्वर को सौंपकर, फिर से शुरू कर सकते हैं, यही हमारे संचार शक्ति का रहस्य है।"

आत्म-प्रचार के मोह पर, अपनी पहल के जश्न पर निर्भर रहने के बजाय, आइए हम इस बारे में सोचें कि हम अपनी आशा की कहानियों को एक साथ कैसे बना सकते हैं

संत पापा ने स्पष्ट किया कि यह कार्य, एक प्राचीन जड़ के साथ है: "सिमोन और अन्य निराश एवं थके हुए मछुआरों के लिए येसु द्वारा किया गया सबसे बड़ा चमत्कार मछलियों से भरा जाल नहीं था, बल्कि हार के सामने निराशा और हतोत्साह का शिकार न होने में उनकी मदद करना था।"

अपने आप बाहर निकलने के संचार के लिए

संत पापा ने कहा कि काथलिक संचार केवल काथलिकों के लिए नहीं है, "एक बाड़ जिसमें हम खुद को बंद कर लें, एक संप्रदाय जिसमें हम आपस में बात करें" बल्कि "सच्चे रिश्तों का एक स्वागत करने वाला स्थान" और "एक गवाही का खुला स्थान जो जानता है कि राज्य के संकेतों को कैसे सुनना और रोकना है।"

हमारा नेटवर्क एक कलासिया की आवाज़ है जो केवल अपने आप से बाहर जाकर ही खुद को और अपनी आशा के कारणों को पा सकती है

प्रकाशना ग्रंथ में हम पाते हैं कि प्रभु हमारे हृदय के दरवाजे पर होते हैं और अंदर आने के लिए दस्तक देते हैं, उसके विपरीत,  "अब, कई बार प्रभु भीतर से दस्तक देते हैं ताकि हम, ख्रीस्तीय, उन्हें बाहर आने दें।" इसलिए, संत पापा  फ्राँसिस, "प्रभु को बाहर आने" और उन्हें "हमारी सेवाओं के लिए थोड़ा गुलाम" न रखने का अंतिम आह्वान देते हैं, ताकि कार्यालय, रिश्ते, नेटवर्क भी "एक बाहर जाने वाली कलीसिया के लिए उचित" हो।

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27 जनवरी 2025, 16:07
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