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इटली के तीर्थयात्रियों से मुलाकात करते संत पापा फ्राँसिस इटली के तीर्थयात्रियों से मुलाकात करते संत पापा फ्राँसिस  (ANSA)

पोप : एक तीर्थयात्री को मौन, सुसमाचार और मती. 25 की आवश्यकता है

स्पेन में कम्मिनो दी संतियागो के तीर्थयात्रियों को संबोधित करते हुए, पोप ने दल को इस बात पर चिंतन करने के लिए प्रोत्साहित किया कि तीर्थयात्रा क्या होती है और एक साधारण यात्रा क्या होती है।

वाटिकन न्यूज

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 19 दिसम्बर 2024 (रेई) : कम्मिनो दी संतियागो से आए इतालवी तीर्थयात्रियों का स्वागत करते हुए पोप फ्राँसिस ने टिप्पणी की कि "पिछले तीस वर्षों में संतियागो के तीर्थयात्रियों की संख्या में वृद्धि हुई है।" उन्होंने स्वीकार किया कि दो प्रसिद्ध तीर्थयात्री उनके पूर्ववर्ती थे: पोप जॉन पॉल द्वितीय और पोप बेनेडिक्ट 16वें।

1982 में, पोलिश पोप, प्रेरित संत जेम्स की कब्र की यात्रा करनेवाले पहले पोप बने और वे पाँच साल बाद विश्व युवा दिवस के लिए वापस आए। पोप बेनेडिक्ट 16वें ने 2010 में संतियागो की तीर्थयात्रा की।

तीर्थयात्रा के तीन संकेत

तीर्थयात्रा में वृद्धि के साकारात्मक आयाम को स्वीकार करते हुए संत पापा ने प्रश्न किया : "क्या कम्मिनो दी संतियागो पर चलनेवाले लोग वास्तव में तीर्थयात्रा पर निकलते हैं? या कुछ और के लिए?"

उन्होंने प्रेरितों की कब्रों की ख्रीस्तीय तीर्थयात्रा को परिभाषित करनेवाले तीन संकेतों की ओर इशारा किया : मौन, सुसमाचार एवं मती 25। पहला है मौन। उन्होंने बताया, "मौन रहकर चलने से व्यक्ति को सुनने, दिल से सुनने का मौका मिलता है, और चलते समय दिल द्वारा मांगे जानेवाले उत्तरों को पाने का अवसर मिलता है।"

दूसरा संकेत है सुसमाचार या जैसा कि पोप ने कहा, "हमेशा अपनी जेब में सुसमाचार की प्रति रखें।" धर्मग्रंथों को दोबारा पढ़ना ही तीर्थयात्रा को संभव बनाता है। तीर्थयात्रा तब "और सच्ची एवं अधिक ख्रीस्तीय" हो जाती है जब तीर्थयात्री खुद को दूसरों के लिए समर्पित करता है।

तीसरे संकेत के लिए, पोप फ्रांसिस ने कहा, “मती 25 निर्देश।” उन्होंने समझाया कि यह सुसमाचार के अंश से लिया गया है जिसमें लिखा है, “तुमने मेरे इन छोटे से छोटे भाइयों में से किसी एक के लिए जो कुछ भी किया, तुमने मेरे लिए किया।” पोप ने इस बात पर जोर दिया कि दूसरों की जरूरतों या संघर्ष कर रहे लोगों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

तीर्थयात्रियों के लिए प्रार्थना

अपने भाषण के अंत में, पोप फ्राँसिस ने तीर्थयात्रियों को देखभाल और सुसमाचार प्रचार के लिए प्रेरित करने हेतु प्रोत्साहित किया। उन्होंने बताया, "प्राचीन तीर्थयात्री हमें सिखाते हैं कि ख्रीस्तीय तीर्थयात्राओं से, हम प्रेरितों के रूप में लौटते हैं!"

संत पापा ने आगमन काल के इस प्रतीक्षा की घड़ी में, नाजरेथ के पवित्र परिवार, "फिलिस्तीन की भूमि में तीर्थयात्रियों" को सभी के लिए एक उदाहरण के रूप में रखा।

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19 दिसंबर 2024, 16:19
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