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सिनोड की आध्यात्मिक साधना सिनोड की आध्यात्मिक साधना  (ANSA)

सिनोड आध्यात्मिक साधनाः पुनरूत्थान- अंधेरे में खोज

30 सितम्बर, रोमवार की सुबह सिनोड की आध्यात्मिक साधना में दोमेनिकन धर्मसमाज के पुरोहित और भूतपूर्व उपदेशक, तिमोथी रडेक्लीफ ने धर्माध्यक्षों की धर्मसभा के द्वितीय सभा में सहभागी होने वाले प्रतिभागियों के लिए, पुनरूत्थान- अंधेरे में खोज पर अपना प्रवचन दिया।

प्रथम चिंतनः पुनरूत्थान- अंधेरे में खोज

विगत साल की आध्यात्मिक साधना में हमने “सुनने” के बारे में चिंतन किया। हम भिन्नताओं की स्थिति में कैसे आशा में बने रहते और अपने हृदय और मन को दूसरों के लिए खोलते हैंॽ कुछ अड़चनें निश्चित ही हमसे दूर हुई हैं और मैं आशा करता हूँ कि हम जिन लोगों से अपने को असहमत पाते हैं उन्हें विरोधियों के रुप में नहीं बल्कि शिष्यों के रुप में, खोज करने वालों के रुप में देखना शुरू किया है।

इस वर्ष हम एक नये विन्दु-“एक प्रेरितिक कलीसिया कैसे बनें” पर ध्यान अंकित करेंगे। लेकिन इसके आयाम का मूलभूत सार वही होगाः धैर्य, कल्पनाशील, बैधिक, खुले-हृदय से सुनना।

गहराई से सुनना सारी चीजों का सार है जिसे हम इस साल करेंगे। इंनस्तुमेतुम लाबोरिस ने इसे कलीसिया का प्रथम कार्य घोषित किया है। ईश्वर को और हमारे भाई-बहनों को सुनना अनुशासन की पवित्रता है।

इस साल हम, विश्व जो अंधकार और मृत्यु की शाय्या में जीवन यापना करता है, पुनर्जीवित येसु ख्रीस्त और उसके सुसमाचार को घोषित करने पर चिंतन करेंगे। इस संदर्भ में संत योहन का सुसमाचार हमारे लिए पुनरूत्थान के चार दृश्य- “अंधकार में खोज, बंद दरवाजे, तट पर अपरिचित और येसु के संग जलपान” पर चिंतन करेंगे। यह हमारे लिए क्रूसित संसार में एक प्रेरितिक कलीसिया की भांति ज्योति होने हेत आलोकित करता है।

हमारा प्रथम दृश्य रात में शुरू होता हैः सप्ताह के प्रथम दिन तड़के, जब की अभी तक अंधेरा था मरियम मगदलेना कब्र के पास जाती है। हम भी आज अपने को उसी स्थिति में पाते हैं। हमारी दुनिया एक साल के अधिक हिंसा के कारण और भी अंधेरी हो गयी है। वह अपने प्रिय गुरू के शरीर की खोज करती है। हम भी इस धर्मसभा में ईश्वर की खोज करने हेतु जमा होते हैं। पश्चिम में हम ईश्वर को पूर्णरूपेण ओझल पाते हैं। हम नास्तिकता से नहीं बल्कि व्यापक उदासीनता से जूझ रहे हैं। संदेहवाद कई विश्वासियों के दिलों में जहर घोल देता है। लेकिन सभी ईसाई हर जगह प्रभु की खोज में लगे रहते हैं, जैसे भोर से पहले मरियम मगदलेना करती है।

हम भी अपने को अंधेरे में होने का अनुभव करते हैं। अंतिम सभा के दौरान, बहुत से लोग, यहाँ तक की धर्मसभा में सहभागी हो रहे सदस्यों ने इस संदेह को व्यक्त किया कि क्या हम अपने में कुछ हालिस करने वाले हैं। मरियम मगदलेना की भांति हम भी कहते हैं, “वे हमारी आशा को क्यों ले गये हैंॽ हमें धर्मसभा से बहुत अधिक आशा थी लेकिन हमें अधिकतर शब्दों को सुनना।  

यद्यपि हम अंधेरे में रहते, ईश्वर वहाँ उपस्थित रहते हैं जैसे कि वे मरियम मगदलेना के संग बारी में थे। अपने मृत्यु के पहले येसु ने कहा, “जब तक गेहूँ का दान मिट्टी में गिरकर मर नहीं जाता अकेला ही रहता है लेकिन यदि वह मर जाता तो बहुत फल देता है।” वह बीज उपजाऊ भूमि में अरमथिया के जोसेफ और निकोदिमुस के द्वारा बोई गयी है, उस नई कब्र में जिसका उपयोग नहीं किया गया था। यह अब खिलने वाला है। हमारी सुबह निकट है। मरियम मगदलेना की भांति हम जिन चीजों की खोज कर रहे हैं उससे ज्याद हम अपने लिए बहुतायत में पायेंगे यदि हम भी अपने को येसु से मिलन हेतु खुला रखेंगे।    

बारी में, हम तीन खोजने वालों को पाते हैं, मरियम मगदलेना, प्रिय शिष्य और सिमोन पेत्रुस को। वे सभी अपने तरीके से येसु को खोजते हैं। हर किसी के प्रेम करने का तरीका अलग है हर कोई अपने में अलग ही एक खालीपन का एहसास करता है। हर खोजने वाले को हम अपने तरीके से आशा में संयुक्त पाते हैं। वे किसी के विरोधी नहीं हैं। उनकी परस्पर निर्भरता धर्मसभा के सार को व्यक्त करती है। हम सभी उनमें से कम से कम एक के साथ अपनी पहचान बना सकते हैं। आप कौन हैंॽ  

 

पुनरूत्थान के सभी वृतांत अपने में सवालों से भरे हैं। मरियम मगदलेना को दो बार पूछा जाता है कि वह क्यों रोती है। वह पूछती है कि शरीर को कहां ले जाया गया। वे सभी पूछते हैं कि कब्र क्यों खाली है। संत मारकुस के अनुसार, नारियाँ पूछती हैं, कौन हमारे लिए पत्थर हटायेगाॽ लूका के अनुसार हम पुनरूत्थान में सवालों को भरा पाते हैं- आप जीवित को मृत्यु के बीच क्यों खोजते हैंॽ एम्माऊस जाने वाले शिष्यों को येसु पूछते हैं, आप किस विषय पर बातें कर रहे हैंॽ सभी शिष्य से- तुम भयभीत क्यों होॽ तुम्हें संदेह क्यों होता हैॽ पुनरूत्थान हमारे जीवन में साहिसक बातों को नहीं बल्कि खोज के सावलों को लाता है।

गहरे सावलों में हम सूचना को नहीं पाते हैं। वे हमें एक नये तरीके से जीवन जीने का निमंत्रण देते हैं, और एक नयी भाषा बोलने को कहते हैं। पुनरूत्थान थोड़ी समय की रूकावट के बाद येसु के जीवन की पुनः शुरूआत नहीं है बल्कि यह एक नये रुप में जीवन है जहाँ हम मृत्यु पर विजय को पाते हैं। अतः यह हमारे जीवन में फूटकर आता है सुसमाचार के रुप में भिन्न सवालों की भांति, जो हमें पुराने रुप में जीने नहीं देता है। इस भांति, हम इस धर्मसभा में विभिन्न सवालों के साथ आते हैं उदाहरण के लिए कलीसिया में नारियों की पुरोहिताई। ये हमारे लिए महत्वपूर्ण सवाले हैं। लेकिन यह हमारे लिए सवाल मात्र नहीं है जिसे स्वीकारा या अस्वीकारा जा सकता है। हमारे सवाल धर्मग्रंथ के सवालों की भांति होने चाहिए जो हमें येसु ख्रीस्त के पुनरूत्थान को एक साथ मिलकर गहराई से जीने में मदद करते हैं। अतः इस धर्मसभा में, हमें हृदयों में गंभीर सवालों लाने की जरुरत है जो हमें नये जीवन के लिए निमंत्रण देते हैं। बारी के उन तीनों खोजने वालों की भांति हमें एक दूसरे के सवालों को लेने की जरुरत है यदि हम ऐसा करते तो कलीसिया में नवीनता आती है। यदि हमारे पास सवाल नहीं हैं या छिछले सावल हैं तो हमारा विश्वास मृत है।

यदि हम एक दूसरे के सवालों को आदर और भयभीत हुए बिना सुनते हैं, तो हम एक नया जीवन जीने के योग्य होते हैं। हम मरियम मगदलेना, प्रिय शिष्य और सिमोन पेत्रुस की भांति हैं और यह एक साथ हमें येसु से मिलाता है जो हमारी प्रतीक्षा करते हैं।

हम एक दूसरे की ओर निगाहें फेरें और दूसरों से सीखने की कोशिश करें। मरियम मगदलेना को हम एक सुकोमल प्रेम से प्रेरित पाते हैं। यह हमारे लिए वास्तविक, शारीरिक, रक्त-मांस का प्रेम है। वह अपने प्रिय प्रभु के शरीर की देख-रेख करना चाहती है। वह उनका प्रतिनिधित्व करती है जो घायल विश्व के लिए प्रेम से प्रेरित हैं। मदर तेरेसा उन्होंने कोलकता की गलियों में येसु के शरीर की खोज की। मोलोकाई के संत देमियन ने कोढ़ग्रस्त लोगों के लिए हवाई में अपने जीवन को समर्पित किया।

हम उन लाखों लोगों के बारे में विचार करें जो येसु ख्रीस्त के बारे में नहीं जानते फिर भी दुःखियों के प्रति करूणा से अपने को भरा पाते हैं। मगदलेना की भांति वे घायलों की खोज करते हैं। दुनिया रूदन से भरी है। यूक्रेन में, रूस, म्यांमार और सूडान में हम हजारों लोगों को रोता पाते हैं। मरियम मगदलेना उनका प्रतिनिधित्व करती है।

मरियम अपने नाम को पुकारे जाते हुए सुनती है, रब्बोनी। अपने नाम के पुकारे जाने में वह अपने खालीपन को भरा पाती है। वह मृत शरीर को खोज रही होती लेकिन उसे उससे भी अधिक प्राप्त होता है जिसकी वह कल्पना भी नहीं कर सकती है, वह प्रेम जो सदा के लिए जीवित है। हमारे ईश्वर हमें सदैव नाम से पुकारते हैं। डरो मत, मैंने तुम्हें मुक्त किया है, मैंने तुम्हें नाम लेकर बुलाया है तुम मेरे हो।” इसा.43.1)।

उसका नाम हमें मिलन की ओर इंगित करता है, ईश्वर की उपस्थिति की ओर। बपतिस्मा में यही होता है जहां हम नाम की मांग करते हैं। तुम्हारा नाम क्या हैॽ या आप बच्चे को क्या नाम देना चाहते हैंॽ हमारा नाम एक निशानी है जो हमें ईश्वर के अद्वितीय निधि के रुप में व्यक्त करता है।

इस भांति हमारी प्रेरिताई भी ईश्वर का नाम लेना है जो हमें अंधेरे में खोजते हैं। और इसके साथ ही हम दूसरों के नाम चेहरे को सुरक्षित रखने के लिए बुलाये गये हैं। यदि हम एक दूसरे के लिए इस धर्मसभा में उपस्थिति रहते तो हम ईश्वरीय उपस्थिति पर चिंतन करेंगे। सिनोड हमारे लिए एक कृपा का एक क्षण होगा यदि हम एक दूसरे को करूणा की दृष्टि से देखेंगे, जो हमारी तरह खोज करते हैं।

मरियम मगदलेना के कोमल प्रेम को चंगाई की जरुरत है। येसु उसे कहते हैं, “मुझ से चिपकी मत रहो।” वे उसे कहते हैं कि वह उसे व्यक्तिगत रुप में पकड़े नहीं रख सकती है। वे उसके साथ केवल नहीं रह सकते हैं। पुनरूत्थान समुदाय का जन्म देता है। ईश प्रजा लोगों की भीड़ नहीं बल्कि बपतिस्मा प्राप्त लोगों की कलीसिया है। “जाकर मेरे भाइयों से कहो, “मैं अपने पिता के पास तुम्हारे पिता, मेरे ईश्वर और तुम्हारे ईश्वर के पास जा रहा हूँ।” यह हम पहली बार संत योहन को शिष्यों के लिए भाई शब्द का उपयोग करता पाते हैं। फ्रतेल्ली तूत्ती। उसे अपने को सभी तरह के प्रेम से स्वतंत्र करने की जरुरत है, केवल तब वह सुसमाचार को शिष्यों के लिए घोषित कर सकेगी, “मैंने ईश्वर को देखा है। यह हम सभों के लिए भी एक चुनौती है। हम अपने अंग्रेजी या दोमेनिकन येसु से चिपके न रहें लेकिन उस येसु से जिनमें हम सभी भाई-बहनें हैं, यहाँ तक की येसु संघी भी। यह सिनोड हमारे लिए फलदायक होगा यदि हम “हम” की भावना से आगे बढ़ते हैं,“मेरे पिता और तुम्हारे पिता, मेरे ईश्वर और तुम्हारे ईश्वर।”

इसके बाद हम उस शिष्य को पाते जिसे येसु प्रेम करते हैं। उसका प्रेम करने करने का तरीका अपना है और उसमें एक अलग खालीपन है, उसमें जीवन की ज्योति लुप्त है। वह पेत्रुस को पहले अंदर अंधेरी कब्र में जाने देता है, लेकिन वह खाली स्थान को देखता और बीच में दूतों को और इस तरह वह विश्वास करता है। यह प्रेम है जो हमें देखने की शक्ति प्रदान करता है। जहाँ प्रेम है वहाँ उजाला। वह प्रेम की निगाहों से देखता और प्रेम की जीत को पाता है। उसका सुसमाचार चील की निगाहों की भांति है जिसकी आंखें सूर्य को देखती और अंधी नहीं होती हैं। उसकी खोज में ईशशास्त्रीय श्रेष्ठता है।

इसके बाद हम सिमोन पेत्रुस को पाते हैं। उसका खालीपन सबसे अधिक भारी है, जिसमें असफलता का बोझ है। उसने अपने मित्र को अस्वीकार किया। वह निश्चित रुप से ईश्वर से चंगाई की बातों को सुनने की चाह रखते हैं जो समुद्र के तट में होता है।

अतः हमारा प्रेरितिक कार्य भी उस सभों का साथ देना है जो अपनी असफलता और पाप से बोझिल हैं। हम उनके संग उस क्षमा को साझा करने को बुलाये गये हैं जिसका अनुभव हमने किया है। मैं खो गया था लेकिन अब मैं मिल गया हूँ, मैं अंधा था लेकिन अब मैं देखता हूँ। हमारी प्रेरिताई उस दयालुता को नामित करना है जैसे कि पेत्रुस को उसकी जरुरत थी।

प्रथम पुनरूत्थान के दृश्य में हम तीन खोजने वालों के खाली जीवन को पाते हैं-कोमल प्रेम जो उपस्थिति की खोज करता, जीवन और ज्योति की खोज तथा क्षमा की खोज। हर एक खोजने वाले को दूसरे की जरुरत है। मरियम के बिना वे कब्र के पास नहीं आते। वह उनके लिए येसु की उपस्थिति को घोषित करती है। प्रिय शिष्य के बिना वे पुनरूत्थान खाली कब्र को नहीं समझते,पेत्रुस के बिना वे पुनरूत्थान को करूणा की जीत के रुप में नहीं जानते।

मरियम मगदलेना हमें यह भी याद दिलाती है कि कलीसिया में अधिकार के औपचारिक पदों से महिलाओं को अक्सर कैसे बाहर रखा जाता है। हम आगे बढ़ने का रास्ता कैसे खोज सकते हैं, जो न्याय और हमसे विश्वास की मांग करती हैॽ  उनकी खोज हमारी है। पिछली सभा में कई धर्मशास्त्रियों ने भी खुद को हाशिए पर महसूस किया। कुछ ने आश्चर्य जताया कि उन्होंने आने की चिंता क्यों की। हम उनके बिना कहीं नहीं पहुँच सकते। और वह समूह जो धर्मसभा के मार्ग का सबसे अधिक विरोध करता था, वह पल्ली पुरोहितों का दल था जो विशेष रूप से दया के चरवाहों स्वरूप पेत्रुस की भूमिका साझा करते हैं। कलीसिया उनके बिना भी सही मायने में धर्मसभा नहीं बन सकती।

अंधेरे में प्रभु की खोज के लिए इन सभी गवाहों की आवश्यकता है, जैसे धर्मसभा में उन सभी तरीकों की आवश्यकता है जिनसे हम प्रभु को प्रेम करते हैं और उनकी खोज करते हैं। हम इसे अपने प्रेरिताई जीवन में कैसे करते हैॽ आप लोगों को दिव्य की अनूभूति प्रदाक करें और वे इसकी खोज में निकल पड़ेंगे।

यह हमें दिव्य प्रेम से स्पर्श होने की बात कहता है। मरिया मगदलेना दिव्य करूणा से प्रभावित थी, प्रिय शिष्य अंतहीन खोज से प्रभावित था और पेत्रुस ईश्वर की क्षमा से, सात बार नहीं बल्कि सत्तर गुण सात बार। हम अपने को यदि एक-दूसरे के लिए खोलते हैं तो हम अपने प्रेरिताई में आगे बढ़ते हैं। एक दूसरे के सानिध्य में हम ईश्वर के दिव्य प्रेम की गहराई की थाह लेने के योग्य होते और अपने को उनकी पूर्ण से सराबोर पाते हैं। 

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01 अक्तूबर 2024, 16:10
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