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संत पापा प्रेरितिक यात्रा से वापसी में संत पापा प्रेरितिक यात्रा से वापसी में 

संत पापाः प्रार्थना में पवित्र आत्मा हृदय परिवर्तित करते हैं

संत पापा फ्रांसिस ने “जैसे की येसु में हमें सिखाया हैः आशा के तीर्थयात्रियों की प्रार्थना” पुस्तक की प्रस्तावना लिखी, जिसका विमोचन बुधवार 09 अक्टूबर को होगा। यह पुस्तिका प्रार्थना पर संत पापा के चिंतनों की एक संग्रह है।

संत पापा फ्राँसिस

मैंने अपनी दादी से प्रार्थना करना सीखा। उन्होंने मुझे प्रार्थना करना सिखलाया और संत योसेफ के प्रति एक भक्ति जागृत किया। तब, मेरे आध्यात्मिक संचालकगण, सेमनरी और येसु समाज ने, मुझे अपने प्रार्थना के अनुभव में बढ़ने हेतु मदद की।

उनमें से मैं मिग्वेल अंजेलो फियोरितो, अर्जेंटीना के एक येसु समाजी का जिक्र करना चाहूँगा, जो दर्शनशास्त्र प्रध्यापक के अलावे आध्यात्मिकता के प्रति एक उत्साही व्यक्ति थे। उनके कार्यों का प्रकाशन इटली में भी हुआ है- एक बड़े आध्यात्मिक गुरू जिन्होंने मुझे प्रार्थना में बढ़ने की शिक्षा दी। वे आध्यात्मिकता में बहुत से कोर्स दिया करते थे। उन्होंने पुत्र की भांति मुझे प्रार्थना करना सिखलाया और सांत्वना रूपी “मिठास” की खोज करने को नहीं कहा। प्रार्थना में क्या होता हैॽ हम प्रार्थना के आदी कैसे होते हैंॽ हमें सांत्वना की घड़ी में क्या करना चाहिए, या उदासी में जब हमें प्रार्थना करने का मन नहीं करता हैॽ वे मेरे लिए आध्यात्मिक जीवन के शिक्षक थे। आज भी, मेरे प्रार्थना करने के तरीके वैसे ही हैं।

संत पापा के रुप में भी आज कुछ नहीं बदला है। मैं रोज दिन प्रार्थना करता हूँ जैसे कि सदैव से उसी लय में करता आया हूँ। मैं कभी-कभी मौखिक प्रार्थना करता हूँ, कभी-कभी प्रवित्र परमप्रसाद के सामने रहता हूँ, मैं सूखेपन का सामना करता हूँ। मेरी प्रार्थना अच्छी चीजों के लिए और जो अच्छी नहीं हैं उनके लिए भी निरंतर होती है। कभी-कभी मैं सोचता हूँ कि मुझे और अधिक प्रार्थना करने की जरुरत है, यह सही है। इसके लिए समय नहीं है लेकिन मुझे और अधिक प्रार्थना करने की जरुरत है। मैं प्रातः वंदना, दोपहार की प्रार्थना, संध्याकालीन प्रार्थना, पवित्र घड़ी की प्रार्थना और मिस्सा बलिदान में भाग लेता हूँ। मनन प्रार्थना और छोड़ा समय रहने पर चिंतन प्रार्थना करता हूँ, मैं ईश्वर के बातें करने की कोशिश करता उनसे कुछ मांगता हूँ, लेकिन मुझे डर लगता है कि वे प्रार्थना का जबाव दे...।

और तब हे पिता की प्रार्थना, जो येसु की प्रार्थना है। इसमें सब कुछ है। जब शिष्य़ों ने येसु से प्रार्थना करने को सीखलाने की बात कही तो येसु ने किसी प्रचारक को या किसी विशेषज्ञ को शिक्षण हेतु नहीं बुलाया। उन्होंने कहा, “हे पिता हमारे”। हे पिता हमारे वैश्विक प्रार्थना है, बच्चो की प्रार्थना, विश्वास, साहस और साथ ही समर्पण  की प्रार्थना है। यह एक बृहृद प्रार्थना है।

और मरियम की प्रार्थनाएँ हैं: मुझे माता मरियम पर बहुत भरोसा है, मैं हमेशा रोज़री की प्रार्थना करता हूँ। मुझे उसे अपने करीब महसूस करना अच्छा लगता है क्योंकि वह एक माँ है और वह हमारा मार्गदर्शन करती है। एक बहुत ही सुंदर कहानी है, जो निश्चित रूप से एक किंवदंती है, जो हमें बतलाती है कि हमारी माता कैसे सभी को बचाती है। यह चोरों की हमारी मरियम की कहानी है, जो लुटेरों की रक्षक है। वे चोरी करते हैं, लेकिन क्योंकि वे उससे प्रार्थना करते हैं, जब उनमें से एक मर जाता है, तो हमारी मरियम,  जो स्वर्ग की खिड़की पर है, उसे छिपने का इशारा करती है। वह उसे कहती है कि पेत्रुस तुम्हें प्रवेश करने नहीं देंगे। लेकिन शाम को वह खिड़की खोलती और उसे अंदर आने देती है। मैं इसे पंसद करता हूँ, हमारी माता स्वर्ग की खिड़की खोलती और उसे  अंदर आने देती है। यह गुप्त व्यापार करने की भांति है। वैसे ही काना में, येसु को न कहने की स्वतंत्रता नहीं थी। वह अपने पुत्र के संग ऐसी ही है। ऐसे हम अपने लिए सारी चीजों की मांग करते हैं।

अपने इस विश्वास के कारण, हर जनसामान्य को संबोधित करने के उपरांत, मैं लोगों को अपने लिए प्रार्थना का आहृवान करता हूँ। मुझे समुदाय की आवश्यकता है जो कलीसिया की सेवा करने में मेरी मदद करते हैं। यदि कलीसिया प्रार्थना के माध्यम आप को सहायता नहीं करती तो आपका सब कुछ खत्म है। समुदाय को धर्माध्यक्ष की सहायता करनी चाहिए और धर्माध्यक्ष को अपने समुदाय हेतु प्रार्थना करने की आवश्यकता है।

प्रार्थना प्रभु का हृदय खोलती है, और जब पवित्र आत्मा प्रवेश करते,  तो यह आपके जीवन को अंदर से परिवर्तित कर देता है। इसलिए हमें प्रार्थना करनी चाहिए: हृदय को खोलते हुए, पवित्र आत्मा के लिए स्थान बनाना चाहिए। हम येसु, पिता और हमारी माता से प्रार्थना करते हैं, लेकिन हम अक्सर पवित्र आत्मा के साथ प्रार्थना में बातचीत नहीं करते हैं। फिर भी यह पवित्र आत्मा ही हैं जो हमारे हृदय को बदलते हैं, वे हमारे हृदय में प्रवेश करते, और इसे रूपांतरित करते हैं। पिता हमारा अभिषेक नहीं करते; पुत्र हमारा अभिषेक नहीं करते हैं। यह आत्मा ही हैं जो अपनी उपस्थिति से हमारा अभिषेक करते हैं, और यह पवित्र आत्मा का अभियंजन है जो मुझे कलीसिया की वास्तविकता और ईश्वर के रहस्य को समझने में मदद करता है।

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03 अक्तूबर 2024, 16:50
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