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संत  पापा फ्राँसिस इंडोनेशिया की प्रेरितिक यात्रा में संत पापा फ्राँसिस इंडोनेशिया की प्रेरितिक यात्रा में 

इंडोनेशियाई कलीसिया एक धार्मिक विविध राष्ट्र

संत पापा फ्राँसिस की इंडोनेशिया प्रेरितिक यात्रा के दौरान, हम इस जीवंत, विविधतापूर्ण राष्ट्र में काथलिक कलीसिया के सामने आने वाली विशिष्ट चुनौतियों पर करीब से नज़र डालेंगे।

लिंडा बोरदोनी

जकार्ता, बुधवार, 4 सितंबर 2024 (रेई) : इंडोनेशिया, एक दक्षिण-पूर्व एशियाई द्वीपसमूह है जिसकी 16वीं शताब्दी से ही ईसाई धर्म प्रचार में गहरी ऐतिहासिक जड़ें हैं, जो एक जीवंत काथलिक वास्तविकता को प्रस्तुत करती है।

जैसे शुरुआती मिशनरियों संत फ्रांसिस जेवियर से लेकर 1961 में संत पापा जॉन ताईसवें द्वारा  कलीसिया पदानुक्रम की स्थापना तक, इंडोनेशिया की कलीसिया 38 डायोसिस और एक सैन्य अध्यादेश को शामिल करने के लिए विकसित हुआ है।

ऐसे देश में जहाँ काथलिकों की आबादी सिर्फ़ 3% है - लगभग 8 मिलियन - बहुसंख्यक मुस्लिम आबादी (87%) के बीच, कलीसिया को इंडोनेशिया के बहुधार्मिक और बहुसांस्कृतिक परिदृश्य का सम्मान करते हुए अपने प्रेरितिक कार्य को पूरा करने के लिए रचनात्मक तरीके खोजने होंगे। राज्य द्वारा धार्मिक स्वतंत्रता के साथ, काथलिक, मुस्लिम, प्रोटेस्टेंट (7%), हिंदू, बौद्ध और कन्फ्यूशियनिस्ट अपने सह-अस्तित्व में हैं।

इस साक्षात्कार में, हम धर्मशिक्षा के एक विशेषज्ञ से बात करते हैं, जो इस बारे में अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं कि कलीसिया इन गतिविधियों का मार्गदर्शन कैसे करती है और धार्मिक विविधता एवं समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं से चिह्नित समाज में अपने प्रेरितिक कार्यों को कैसे जीवंत बनती है।

फा. डिमास दानंग अगुस विदायंतो, मध्य जावा के पुरवोकर्टो धर्मप्रांत के एक धर्मप्रांतीय पुरोहित, इंडोनेशियाई कलीसिया के बारे में अपना दृष्टिकोण और देश की विविधतापूर्ण वास्तविकताओं के बारे में अपने विचारों को व्यक्त करते हैं।

प्रश्न: कृपया अपना परिचय दें और हमें बताएं कि आपका कार्य क्या है। साथ ही, आपने बताया कि आपकी विशेषज्ञता धर्मशिक्षा है, यह इंडोनेशिया में कैसे फलित होती है?

मैं डिमास दानंग अगुस विदायंतो हूँ, जो इंडोनेशिया के सेंट्रल जावा में पुरवोकर्टो के डायसिस का एक पुरोहित हूँ। वर्तमान में, मैं फ्रांस के पेरिस के काथलिक विश्वविद्यालय में प्रेरिताई और धर्मशिक्षा ईशशास्त्र में डॉक्टरेट की पढ़ाई कर रहा हूँ। मैं डॉक्टरेट साइबर संस्कृति के संदर्भ में वयस्कों के लिए ईसाई प्रशिक्षण के अवसरों और चुनौतियों पर शोध कर रहा हूँ - एक नई संस्कृति जो इंटरनेट युग में उभरी है। वास्तव में, इस डिजिटल परिदृश्य ने हमारे सोचने, व्यवहार करने और बातचीत करने के तौर-तरीके, ईसाई धर्म का अनुभव, प्रचार और संचार कैसे मौलिक रूप से प्रभावित होता है।

इंटरनेट के माध्यम से काथलिकों को बनाने और उनसे जुड़ने के नए तरीकों का मार्ग प्रशस्त किया है जिसके द्वारा आस्था,आध्यात्मिक साधना और आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। मेरा अध्ययन विशेष रूप से यह खोज करना है कि क्या ये डिजिटल रूप से सहायता प्राप्त संरचनाएं धर्मशिक्षा के प्राथमिक उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से पूरा कर सकती हैं, जिसमें विश्वासियों को मसीह के रहस्य के साथ घनिष्ठ संवाद की ओर मार्गदर्शन करना शामिल है। इसलिए, मैं यह पता लगा रहा हूं कि क्या ईसाई प्रशिक्षण का यह नया रूप सुसमाचार घोषणा और ख्रीस्त के रहस्यमय आयामों को शामिल करता है?

इंडोनेशिया में, हालांकि विभिन्न आयु समूहों के लिए ईसाई प्रशिक्षण और  धर्मशिक्षण कार्यक्रमों के लिए डिजिटल संसाधन उपलब्ध हैं, पल्लियों में धर्मशिक्षा मूल रूप से बुनियादी कलीसिया समुदायों पर निर्भर करता है। ये धर्मशिक्षा संबंधी बैठक, जो नियमित रूप से चालीसा और आगमन जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक अवधियों के दौरान आयोजित की जाती हैं, इसका उद्देश्य विश्वास को गहरा और साझा करना है। इन सभाओं का नेतृत्व और उन्हें सक्रिय करने में आम लोगों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है।

प्रश्न: पोप इंडोनेशिया में काथलिक पुरोहित और कलीसिया के भीतर काम करने वाले अन्य लोगों से मिलेंगे। उनके सामने मुख्य चुनौतियाँ क्या हैं? आपको क्या लगता है कि वे पोप से क्या सुनने की आशा करते हैं?

इंडोनेशिया में काथलिक पुरोहित और अन्य कलीसियाई कार्यकर्ता कई महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करते हैं, जिनमें समावेशिता और भागीदारी, विश्वव्यापी और अंतरधार्मिक संबंध और सामाजिक मुद्दों को संबोधित करना शामिल है। एक प्राथमिक चुनौती कलीसिया के भीतर समावेशिता और सक्रिय भागीदारी को बढ़ाना है। इसमें कलीसिया की गतिविधियों और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में आम सदस्यों, विशेष रूप से महिलाओं और युवाओं की अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करना शामिल है। इस चुनौती में सत्तावादी नेतृत्व शैलियों पर काबू पाना भी शामिल है जो सहभागितापूर्ण जुड़ाव में बाधा डाल सकती हैं। इंडोनेशिया में कलीसिया के कुछ हिस्से अभी भी ऐसे नेतृत्व से जूझ रहे हैं जो अपने सदस्यों से सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित नहीं करते हैं। एक अन्य महत्वपूर्ण चुनौती इंडोनेशिया के बहुलवादी समाज के भीतर अन्य धार्मिक समुदायों के साथ सकारात्मक संबंधों को प्रबंधित करना और बढ़ावा देना है। धर्म का राजनीतिकरण, सोशल मीडिया पर असहिष्णुता का प्रसार और सैद्धांतिक गलतफहमियाँ जैसे मुद्दे तनाव को बढ़ा सकते हैं और रचनात्मक संवाद में बाधा डाल सकते हैं। अंत में, अपने प्रेरितिक स्थानों में, पुरोहित अक्सर गरीबी, अन्याय और पर्यावरण संबंधी चिंताओं जैसे सामाजिक मुद्दों को संबोधित करते हैं। इसके लिए उन्हें अपनी भूमिका को आध्यात्मिक नेतृत्व से परे ले जाते हुए सामाजिक चिंता और सामुदायिक सशक्तिकरण को विस्तारित करना होगा।

इन चुनौतियों के संदर्भ में, पोप फ्राँसिस द्वारा धर्मसभा पर जोर दिया जाना, जो  विश्वव्यापी और अंतरधार्मिक संवाद के लिए आह्वान करता है, सामाजिक न्याय और पर्यावरण संरक्षण के लिए लाभदायक होगा। सबसे पहले, कलीसिया के संचालन हेतु धर्मसभा की दृष्टिकोण तीन बातें महत्वपूर्ण हैं, निर्णय लेने की प्रक्रिया में सभी सदस्यों को सुनना, संवाद और भागीदारी। यह मार्गदर्शन इंडोनेशिया के काथलिक कलीसिया में अपने विविध और भौगोलिक रूप से बिखरे हुए विश्वासियों के साथ अधिक व्यापक रूप से जुड़ने के प्रयासों को बढ़ावा देगा। दूसरा, इंडोनेशिया की धार्मिक विविधता को देखते हुए, पोप फ्राँसिस द्वारा विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच संवाद और सहयोग को प्रोत्साहित करना जो विशेष रूप से प्रासंगिक है। दीवारों के बजाय पुल बनाने का उनका संदेश तनाव को कम करने और इंडोनेशियाई सामाजिक ताने-बाने के भीतर अधिक सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है। तीसरा, आर्थिक असमानता और पर्यावरण संरक्षण सहित सामाजिक न्याय के मुद्दों के लिए पोप फ्राँसिस की प्रतिबद्धता इंडोनेशिया की जरूरतों के साथ निकटता से जुड़ी हुई है। "गरीबों के लिए गरीब कलीसिया", उनका दृष्टिकोण इंडोनेशिया के उन हिस्सों में गहराई से गूंजेगा जो गरीबी से प्रभावित हैं, जिससे पुरोहित वर्ग को सामाजिक मामलों में सक्रिय आवाज़ बनने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकेगा। इसके अलावा, उनका विश्व प्रेरितिक पत्र लाउदातो सी पर्यावरण संरक्षण की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करता है, जो इंडोनेशिया के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा है क्योंकि यह महत्वपूर्ण पारिस्थितिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। यह इंडोनेशिया में पुरोहित वर्ग को पारिस्थितिक चिंता को तेज करने के लिए प्रेरित कर सकता है।

प्रश्न: कलीसिया को निस्संदेह सामाजिक, स्वास्थ्य, सांस्कृतिक और शैक्षिक क्षेत्रों में अपनी गतिविधियों के लिए सम्मानित और स्वीकार किया जाता है। क्या आपको लगता है कि मृत्युदंड, भ्रष्टाचार आदि जैसे मुद्दों के बारे में धर्माध्यक्षों की आवाज़, राजनीतिक नेताओं और समाज पर प्रभाव डाल सकती है?

इंडोनेशिया के धर्माध्यक्ष लगातार धर्माध्यक्षीय सम्मेलन में सदैव सामाजिक मुद्दों को संबोधित करते हैं। उन्होंने भ्रष्टाचार, मानव तस्करी, लैंगिक समानता, मानवाधिकार और पर्यावरण अखंडता के बारे में कड़ी आलोचना व्यक्त की है। इन महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर उनके नबूवत विचारों  के लिए धर्माध्यक्षों का सम्मान किया जाता है, जो उनकी विश्वसनीयता को रेखांकित करता है। हालाँकि, उनके प्रभाव को अक्सर पर्याप्त बाधाओं का सामना करना पड़ता है, जिसकी व्याख्या "पाप की संरचनाओं" के रूप में किया जा सकता है - जो सामाजिक व्यवस्था और संस्थाएँ हैं जो अन्याय को बनाए रखती हैं और समाज को नुकसान पहुँचाती हैं। हालाँकि समाज के भीतर उनकी आवाज़ को सम्मान और पहचान प्रदान किया जाता है, लेकिन राजनीतिक नेताओं और नीति परिवर्तनों पर इसका सीधा प्रभाव कम  दिखाई देता है।

प्रश्न: पोप की यात्रा का एक मुख्य आकर्षण 5 सितंबर को इस्तिकलाल मस्जिद में होने वाली अंतरधार्मिक बैठक है। इस मुस्लिम राष्ट्र में, जो “पंचशीला” के सिद्धांतों पर आधारित है, जिसे धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय की गारंटी देनी चाहिए - यह आयोजन कितना महत्वपूर्ण है?

इस्तिकलाल मस्जिद में अंतरधार्मिक बैठक कई कारणों से बहुत महत्वपूर्ण है। सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण, इंडोनेशिया की स्वतंत्रता के उपलक्ष्य में निर्मित, इस्तिकलाल मस्जिद धार्मिक सद्भाव और सहिष्णुता के लिए राष्ट्र की प्रतिबद्धता का प्रतीक है। जकार्ता के काथलिक महागिरजाघर और प्रोटेस्टेंट इम्मानुएल कलीसिया के पास इसका अवस्थित होना, इसके ऐतिहासिक और स्थापत्य महत्व के साथ मिलकर, धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय सहित पंचशीला के आदर्शों को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। प्रोटेस्टेंट वास्तुकार फ्रेडरिक सिलाबन द्वारा मस्जिद की बनावट इसके निर्माण के पीछे समावेशी दृष्टि को रेखांकित करता है। हाल ही में, मस्जिद और गिरजाघर को "तेरोवोंगन सिलातुराह्मी" या मैत्री सुरंग से जोड़ा गया है, जो विशेष रूप से प्रमुख धार्मिक समारोहों के दौरान अंतर-धार्मिक सहयोग का प्रतीक है।

इसके अलावा, पोप के साथ धार्मिक नेताओं की यह बैठक इस सिद्धांत का एक शक्तिशाली प्रमाण है कि मानव बंधुत्व धार्मिक सीमाओं से परे है। यह न केवल इंडोनेशियाई समाज की बहुलतावादी प्रकृति को उजागर करता है बल्कि शांति और सह-अस्तित्व के वैश्विक संदेश पर भी जोर देता है। इसलिए, इस्तिकलाल में पोप की उपस्थिति न केवल सद्भावना का संकेत है बल्कि विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच संवाद और समझ को बढ़ावा देने के लिए काथलिक कलीसिया की प्रतिबद्धता की पुष्टि है। यह आयोजन एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत करता है कि एक न्यायपूर्ण और भाईचारे वाले समाज की खोज न केवल आवश्यक है बल्कि वास्तव में, प्राप्त करने योग्य भी है, यहां तक ​​कि एक ऐसे राष्ट्र में भी जहां महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता है।

प्रश्न: क्या इंडोनेशिया में शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व, सम्मान और धार्मिक सद्भाव एक ठोस वास्तविकता है? क्या कट्टरवाद एक खतरा है?

इंडोनेशिया में, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व, सम्मान और धार्मिक सद्भाव वास्तव में मूर्त वास्तविकताएँ हैं। एक ही छत के नीचे अलग-अलग धर्मों के सदस्यों के साथ सौहार्दपूर्ण तरीके से रहने वाले परिवारों को देखना काफी आम बात है। उदाहरण के लिए, मेरे अपने परिवार में, मेरे पिता मुस्लिम हैं और मेरी माँ काथलिक हैं, दोनों अपने-अपने धर्म का पालन करते हैं। यह अंतर-धार्मिक सद्भाव पारिवारिक बंधनों से परे है; यह विभिन्न धर्मों के लोगों के बीच रोज़मर्रा की बातचीत में परिलक्षित होता है। यह वास्तविकता सांस्कृतिक और धार्मिक प्रथाओं के सामंजस्यपूर्ण मिश्रण का उदाहरण है।

हालाँकि, एकता के इन उदाहरणों के बावजूद, कट्टरपंथ का खतरा वास्तविक है और इसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। कई स्रोतों से चुनौतियाँ उत्पन्न होती हैं: सोशल मीडिया पर विभिन्न धर्मों के खिलाफ़ नफ़रत भरे भाषणों का प्रसार, कट्टरपंथी विचारों को बढ़ावा देने वाली धार्मिक शिक्षाओं का अपर्याप्त विनियमन, और राजनीतिक और विधायी परिदृश्यों को प्रभावित करने का प्रयास करने वाले कट्टरपंथी समूहों की गतिविधियाँ। ये तत्व हमारे सामाजिक सद्भाव के लिए महत्वपूर्ण ख़तरा पैदा करते हैं, क्योंकि उनका उद्देश्य इंडोनेशियाई समाज के बहुसांस्कृतिक और बहु-धार्मिक ताने-बाने को नष्ट करना है।

प्रश्न: आपको क्या उम्मीद है कि पोप फ्राँसिस की यात्रा आपके देश के लिए क्या विरासत छोड़ेगी?

मुझे उम्मीद है कि पोप फ्राँसिस की यात्रा इंडोनेशिया में काथलिक समुदाय के विश्वास को मजबूत करेगी, यह हमारे अपेक्षाकृत छोटे लेकिन उत्साही झुंड को आध्यात्मिक बढ़ावा देगी। काथलिक कलीसिया के पूजनीय चरवाहे की यह यात्रा हमारे विश्वासियों को मज़बूत करने और उन्हें हमारे समाज के साथ और अधिक गहराई से जुड़ने के लिए अवसर प्रदान करती है, जो धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता से समृद्ध है। व्यापक इंडोनेशियाई आबादी के लिए, पोप के भाईचारे और प्रेम का संदेश हमारे लिए उम्मीद है कि मानवाधिकारों के मूल्यों में गहराई से निहित एक अधिक न्यायपूर्ण राष्ट्र के निर्माण की दिशा में एक सामूहिक आंदोलन प्रेरित करेंगे। पोप फ्राँसिस की यात्रा हमारे विविध धार्मिक परिदृश्यों में अधिक एकता और आपसी सम्मान के लिए उत्प्रेरक का काम कर सकती है। यह महत्वपूर्ण घटना शांति और सह-अस्तित्व की नींव को मजबूत कर सकती है जिसे इंडोनेशिया बनाए रखने का प्रयास करती है।

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04 सितंबर 2024, 14:32
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