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पेरिस 2024 ऑलम्पिक पेरिस 2024 ऑलम्पिक 

पोप : 'पेरिस में 2024 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेल, सम्मान और सद्भाव को बढ़ावा देगा'

पोप फ्राँसिस ने फ्राँस के पेरिस में होनेवाले 2024 ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों से पहले शांति के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ और प्रार्थनाएँ भेजी हैं, तथा कामना की हैं कि यह प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन, इस त्रस्त विश्व में शांति और मित्रता की दिशा में काम करेगा।

वाटिकन न्यूज

वाटिकन सिटी, शनिवार, 20 जुलाई 2024 (रेई) : संत पापा ने कहा, "मैं प्रभु से प्रार्थना करता हूँ कि वे उन सभी लोगों पर अपना वरदान बरसाएँ जो किसी भी तरह से इसमें भाग लेंगे - चाहे वे खिलाड़ी हों या दर्शक - और साथ ही उन लोगों को भी बल और आशीष प्रदान करें जो उनका स्वागत करेंगे, विशेष रूप से, पेरिस और अन्य जगहों के विश्वासी।"

इसी आश्वासन के साथ, पोप फ्राँसिस ने फ्रांस में 26 जुलाई से 11 अगस्त 2024 तक आयोजित होनेवाले आसन्न ग्रीष्मकालीन ओलंपिक खेलों से पहले, 19 जुलाई की सुबह 10 बजे पेरिस के मैडलीन चर्च में शांति के लिए आयोजित ख्रीस्तयाग में अपनी प्रार्थनापूर्ण शुभकामनाएँ भेजीं।

ओलंपिक के लिए शांति ख्रीस्तयाग

पवित्र यूखरिस्त को विशेष रूप से पेरिस खेलों के लिए ओलंपिक युद्धविराम संधि की शुरूआत के दिन, फ्रांसीसी धर्माध्यक्षीय सम्मेलन, पेरिस महाधर्मप्रांत और पवित्र खेल टीम द्वारा प्रस्तावित किया गया था। संयुक्त राष्ट्र द्वारा वोट किया गया ओलंपिक युद्धविराम 26 जुलाई को खेलों के उद्घाटन समारोह से एक सप्ताह पहले शुरू होता है और 8 सितंबर को परालिंपिक की समाप्ति के बाद समाप्त होगा।

इस मिस्सा बलिदान की अध्यक्षता फ्रांस में प्रेरितिक राजदूत महाधर्माध्यक्ष सेलेस्तिनो मिग्लियोर ने की; उनके साथ पेरिस के महाधर्माध्यक्ष लौरेंत उलरिक और ओलंपिक एवं पैरालंपिक खेलों के लिए फ्रांसीसी धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के प्रतिनिधि, डिग्ने के धर्माध्यक्ष इमानुएल गोबिलियार्ड ने भी भाग लिया। साथ ही अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति के अध्यक्ष थॉमस बाक, राजनयिक और खेल जगत की हस्तियाँ भी मौजूद रहीं।

ख्रीस्त की तरह दिल खोलना

फ्राँसीसी भाषा में पेरिस के महाधर्माध्यक्ष उलरिक को भेजे गए संदेश, जिसे परमधर्मपीठीय प्रेस कार्यालय द्वारा शुक्रवार की सुबह प्रकाशित किया गया, पोप फ्राँसिस ने खुद को पवित्र यूखरिस्त के उद्देश्यों के साथ जोड़ा। उन्होंने सभी स्तरों पर शामिल लोगों और प्रतिभागियों के लिए प्रभु से आशीर्वाद की कामना की और इस आयोजन के लिए गिरजाघरों, स्कूलों और अपने घरों के दरवाजे "पूरी तरह से खोलने" की तैयारी कर रहे ख्रीस्तीय समुदायों की याद की।

उन्होंने उन्हें प्रोत्साहित करते हुए कहा, "वे विशेष रूप से अपने हृदय के द्वार खोलें, तथा सभी के प्रति स्वागत की उदारता के माध्यम से, ख्रीस्त का साक्ष्य दें, जो उनके भीतर निवास करते और उन्हें अपना आनंद प्रदान करते हैं," साथ ही उन्होंने सबसे कमजोर लोगों को नहीं भूलने के लिए उनका धन्यवाद किया।

पोप ने कहा, "अधिक व्यापक रूप से, मुझे आशा है कि इन खेलों का आयोजन फ्रांस के सभी लोगों के लिए भाईचारे के सद्भाव को प्राप्त करने का एक अद्भुत अवसर होगा, जिससे मतभेदों और विरोधों से परे, राष्ट्र की एकता को मजबूती मिलेगी।"

खेल की सार्वभौमिक भाषा

संत पापा ने कहा कि वे उनके साथ इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता की मेजबानी करते हुए बहुत खुश हैं, खासकर, इसलिए क्योंकि खेल, "एक सार्वभौमिक भाषा है जो सीमाओं, भाषाओं, जातियों, राष्ट्रीयताओं और धर्मों से परे है।"

इसके अलावा, उन्होंने आश्चर्य व्यक्त की कि "इसमें लोगों को एकजुट करने, संवाद और आपसी स्वीकृति को बढ़ावा देने की क्षमता है; यह आत्म-विजय को प्रोत्साहित करता है, त्याग की भावना को बढ़ावा देता है, और पारस्परिक संबंधों में वफादारी को प्रोत्साहित करता है; यह व्यक्ति को अपनी सीमाओं और दूसरों के मूल्य को पहचानने के लिए आमंत्रित करता है।"

उन्होंने सुझाव दिया कि "ओलंपिक खेल, यदि वे वास्तव में 'खेल' बने रहें, तो वे लोगों के लिए एक असाधारण मिलन स्थल बन सकते हैं, यहाँ तक कि सबसे शत्रुतापूर्ण लोगों के लिए भी।"

सम्मान और मित्रता को बढ़ावा देना

यह देखते हुए कि पाँच परस्पर जुड़े हुए रिंग "भाईचारे की उस भावना को दर्शाते हैं जो ओलंपिक आयोजन और सामान्य रूप से खेल प्रतियोगिता की विशेषता होनी चाहिए," उन्होंने पेरिस ओलंपिक को "दुनिया के सभी देशों से आनेवाले सभी लोगों के लिए एक अवसर बनने हेतु आमंत्रित किया, ताकि वे एक-दूसरे को खोज सकें और उनकी सराहना कर सकें, पूर्वाग्रहों को खत्म कर सकें, जहाँ अवमानना​​और अविश्वास है, वहाँ सम्मान को बढ़ावा दे सकें और जहाँ घृणा है, वहाँ मित्रता को बढ़ावा दे सकें।"

खेल जो युद्ध नहीं बल्कि शांति को बढ़ावा देता है

पोप ने सुझाव दिया कि खेल युद्ध नहीं बल्कि शांति को बढ़ावा देते हैं, उन्होंने स्वीकार किया कि इसी भावना से "प्राचीन काल ने खेलों के दौरान समझदारी से युद्धविराम स्थापित किया था," इस परंपरा को आधुनिक युग में पुनर्जीवित किया जा रहा है।

पोप फ्राँसिस ने अपील की, "इस संकटपूर्ण समय में जब विश्व शांति गंभीर रूप से खतरे में है, मैं ईमानदारी से चाहता हूँ कि हर कोई संघर्षों को हल करने और सद्भाव की ओर लौटने की उम्मीद में इस युद्धविराम का सम्मान करे। ईश्वर हम पर दया करें!"

पोप ने प्रार्थना की, "ईश्वर शासकों के विवेक को उन पर आनेवाली गंभीर जिम्मेदारियों के बारे में जागृत करें," "शांति स्थापित करनेवालों को उनके प्रयासों में सफलता प्रदान करें और उन्हें आशीर्वाद दें। "पेरिस के संरक्षक संत जेनेविव और संत डेनिस एवं फ्रांस की संरक्षिका स्वर्गोदग्रहण की माता मरियम को इन खेलों के सफल संचालन का दायित्व सौंपते हुए," संत पापा ने अंत में कहा, "मैं आपको, साथ ही उन सभी लोगों को जो इसमें भाग लेंगे, अपना आशीर्वाद देता हूँ।"

 

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20 जुलाई 2024, 15:49
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