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हंगरी में संत पापा का दूसरा दिन हंगरी में संत पापा का दूसरा दिन 

संत पापाः कलीसिया प्रेम की भाषा बोले

संत पापा फ्रांसिस ने हंगरी की अपनी प्रेरितिक यात्रा के दूसरे दिन बुडापेस्ट के संत एलिजबेद महागिरजाघर में प्रवासियों और शारणार्थियों से मुलाकात करते हुए प्रेम की भाषा बोलने को प्रेरित किया।

दिलीप संजय एक्का-वाटिकन सिटी

बुडापेस्ट, शानिवार, 29 अप्रैल 2023 (रेई) संत पापा फ्रांसिस ने हंगरी की प्रेरितिक यात्रा के द्वितीय दिन बुडापेस्ट के संत एलिजबेद गिरजाघर में गरीबों से मुलाकात करते हुए सभों को प्रेम की भाषा बोलने का आहृवान किया।

अपने संबोधन में संत पापा ने कहा कि जरूरतमंद सुसमाचार के हृदय हैं क्योंकि येसु हमारे बीच दरिद्रों के लिए खुशी का संदेश लेकर आये। अतः गरीब हमारे लिए सबसे बड़ी चुनौती प्रस्तुत करते हैं। सच्चा विश्वास अपने में जोखिम भरी चुनौती लेकर आता है, यह गरीबों से मिलन हेतु आगे जाता और अपने जीवन के द्वारा करूणा की भाषा बोलते हुए साक्ष्य प्रस्तुत करता है। संत पौलुस इसकी चर्चा करते हुए कहते हैं, कि हम अपने में बहुत-सी भाषाएं बोलते और अपने में विद्वान और धनी होते लेकिन यदि हममें प्रेम की कमी है तो हम कुछ नहीं हैं।

प्रेम की भाषा

संत पापा ने कहा कि संत एलिजबेद ने प्रेम की भाषा बोली जिसके कारण हंगरी के लोग स्नेह में उनकी आराधना करते हैं। उनकी मूर्ति, जहाँ हम उन्हें एक गरीब व्यक्ति की प्यास बुझाते हुए देखते हैं विश्वास की अभूतपूर्व कृति है जिसके द्वारा हम लोगों को ईश्वर के संग संयुक्त पाते हैं। यदि कोई ईश्वर को प्रेम करने की बात कहता और अपने भाई-बहनों से घृणा करता तो वह अपने में झूठा है क्योंकि वह जिसे देखता उनसे प्रेम नहीं करता तो ईश्वर जिसे वह नहीं देखता कैसे प्रेम कर सकता है। (1.यो.4.20) संत एलिजबेद जो एक राजा की बेटी थी, उनका लालन-पालन विलासिता में हुआ था। फिर भी, एक बार येसु से मिलन के उपरांत उनका जीवन परिवर्तित हो गया। वह दुनिया की सारी धन-दौलत का परित्याग कर गरीबों की सेवा में अपने को समर्पित करती है। इस भांति उन्होंने न केवल अपनी संपत्ति बिक्री की बल्कि अपने जीवन को गरीबों, कोढ़ियों और बीमारों की सेवा में समर्पित किया। वह उन्हें स्वयं अपने कंधों में ढ़ोती थी जो हमारे लिए प्रेम की भाषा को व्यक्त करता है।

ईश्वर की कार्य शैली

संत पापा ने कहा कि ईश्वर जो गरीबों की रूदन सुनते, “दलितों को न्याय देते, भूखों को रोटी खिलाते और गिरे हुए को उठाते हैं, कभी भी ऊपर से हमारी मुसीबतों का समाधान नहीं करते हैं। बल्कि वे करूणा में हमारे निकट आते और हमारे भाई-बहनों को प्रेरित करते हैं जो अपनी ओर से पहल करते और अपने में उदासीन नहीं रहते हैं। उन्होंने बिजिट के साक्ष्य के बारे में कहा जिन्हें ग्रीक काथलिक कलीसिया द्वारा प्रोत्साहन, रोजगार, जरूरत की भौतिक चीजें और विश्वास की यात्रा में विभिन्न प्रकार की सेवाएं प्राप्त हुई। हम ऐसा ही साक्ष्य देने हेतु बुलाये जाते हैं, हमें सभी की ओर करूणा के भाव रखने की जरुरत है विशेष कर उनकी जो गरीब, बीमार और पीड़ा की स्थिति में हैं। हमें आज उस कलीसिया की जरुरत है जो प्रेम की भाषा को धड़ल्ले से बोली है वह भाषा जिसे सारी दुनिया सुन और समझ सकती है, चाहे वे हमसे अति दूर और अविश्वासी ही क्यों न हों।

प्रेम में जादू

संत पापा ने हंगरी की कलीसिया के उदरतापूर्ण करूणामय सेवा कार्य हेतु कृतज्ञता के भाव प्रकट किये। उन्होंने  यूक्रेन प्रवासियों की न केवल उदारतापूर्ण बल्कि जोशीले स्वागत हेतु उनकी सराहना की। प्रेम की यादगारी लोगों के जीवन में आशा जागृत करती और वे अपने जीवन में नई यात्रा की शुरूआत करते हैं। दुःख और पीड़ा की स्थिति में भी प्रेम का मिला मलहम हमें आगे बढ़ने का साहस प्रदान करता है। यह हमें इस बात का विश्वास दिलाता है कि सारी चीजें खत्म नहीं हुई हैं और एक अलग भविष्य संभव है। “येसु जिस प्रेम को हमें देते और उसे अपने जीवन में जीने की आज्ञा देते वह हमारे समाज, शहर और जहाँ हम रहते हैं वहाँ व्याप्त उदासीनता और स्वार्थ रूपी बुराइयों को उखाड़ने में मददगार हो सकता है, जहाँ सभी लोग अपने लिए एक शरण स्थल प्राप्त कर सकते हैं”।

कलीसिया के लिए शिक्षा

संत पापा ने कहा कि दुःख की बात की यहाँ भी बहुत से लोग एकदम आश्रयविहीन हैं। उन्होंने अति संवेदनशील लोगों की ओर ध्यान आकर्षित कराया जो अकेले, शारीरिक अक्षमता और मानसिक बीमारी, नशा, जेले से मुक्त या बुजुर्गों के रुप में परित्याक्त हैं- वे अपने में भौतिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गरीबी का अनुभव करते हैं। उनके पास सिर रखने के लिए जगह नहीं है। उन्होंने जोतान और उनकी पत्नी के कार्यों की प्रशंसा की जो अपनी उदारता में आश्रयहीनों की सहायता करते हैं। जब वे अपने को ईश्वर की निगाहों में प्रिय और धन्य पाते तो उनका नया जन्म होता है। “कलीसिया के लिए यह जरुरी शिक्षा है कि वह लोगों के लिए केवल रोटी उपलब्ध न कराये बल्कि लोगों के हृदय की जरुरतों की पूर्ति करे”। प्रेम सभी भौतिक और सामाजिक वस्तुओं से बढ़कर है। यह हमें मानवीय सुन्दरता और सम्मान की खोज करने में मदद करता है।

“दान करने का अर्थ है आँखों में देखने का साहस करना, दूसरी ओर देखकर आप दूसरे की मदद नहीं कर सकते हैं। परोपकार करने के लिए स्पर्श करने का साहस चाहिए, बिना स्पर्श किये आप दूर से भीख नहीं फेंक सकते हैं। छूना और देखना, इस के लिए आप को एक यात्रा शुरू करने की जरुरत है, उस जरूरतमंद व्यक्ति के साथ एक यात्रा, जो आपको समझ प्रदान करेगी कि आप कितने जरूरतमंद हैं। प्रभु की नजरों और हाथों में आप कितने जरुरी व्यक्ति हैं”।

अपने प्रवचन के अंत में संत पापा ने सभों को प्रेम की भाषा बोलने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि इस प्रांगण में संत एलिजबेद की प्रतिमा हमें रोटियों के चमत्कार को दिखलाती है जिसे ईश्वर ने गरीबों के लिए किया। हम सभों के साथ भी यही होता है जब हम भूखों को रोटी खिलाने की कोशिश करते हैं, तो ईश्वर हमारे जीवन को प्रेम रूपी खुशी की खुशबू से भर देते हैं। “हम सभी कलीसिया और अपने देश में सदैव प्रेम की खुशबू बिखेरें।”

संत पापा गरीबों और शरणार्थियों के संग

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29 April 2023, 13:07