खोज

यूक्रेन में युद्ध का एक वर्ष: संत पापा का दुःख और शांति के लिए अथक अपील

रूस द्वारा 24 फरवरी 2022 को यूक्रेन पर आक्रमण करने के बारह महीने बाद, हम संत पापा फ्राँसिस की अनगिनत अपीलों और युद्धग्रस्त राष्ट्र के प्रति निकटता की अभिव्यक्ति पर एक नज़र डालते हैं। वे हमसे आग्रह करते हैं कि हम यूक्रेनी लोगों को कभी न भूलें जो एक 'बेतुके' और क्रूर 'युद्ध से पीड़ित हैं।

माग्रेट सुनीता मिंज और उषा मनोरमा तिरकी- वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शुक्रवार 24 फरवरी 2023 (वाटिकन न्यूज) : एक साल पहले, 24 फरवरी 2022 को, जब दुनिया कोविड-19 महामारी के तूफान से उभर रही थी, रूस के सशस्त्र बलों ने एक ज़ोरदार, सैन्य हमले के साथ यूक्रेन पर आक्रमण किया। पिछले दिन, साप्ताहिक आम दर्शन समारोह में, संत पापा फ्राँसिस ने यूक्रेन की "बिगड़ती स्थिति के लिए दुःख भरे हृदय" के साथ एक अपील की थी।

"मैं उन लोगों से अपील करना चाहता हूँ जिनके पास राजनीतिक जिम्मेदारी है, ताकि वे ईश्वर के सामने अपने विवेक की गंभीर जांच कर सकें। हमारा प्रभु शांति का ईश्वर है और युद्ध का नहीं।"

हालाँकि, उनकी अपील के बावजूद, विजय का तर्क उत्तरदायित्व के तर्क पर हावी रहा। 24 फरवरी की भोर में, रूसी सेना यूक्रेनी क्षेत्र में घुस गई। उनके आदेश यूक्रेनी क्षेत्र: डोनेस्क और लुगांस्क पर स्थित अलगाववादी डोनबास "गणराज्यों" की मान्यता के तुरंत बाद आए।

संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन के बम्बिनो येसु बाल चिकित्सा अस्पताल पहुंचे यूक्रेनी बच्चों से मुलाकात की।
संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन के बम्बिनो येसु बाल चिकित्सा अस्पताल पहुंचे यूक्रेनी बच्चों से मुलाकात की।

संत पापा फ्राँसिस ने एक साल पहले युद्ध की शुरुआत से लेकर अब तक, स्पष्ट रूप से युद्ध की निंदा की है और अनगिनत तरीकों से सभी पीड़ितों के प्रति अपनी निकटता दिखाई है।

इन 12 युद्ध-ग्रस्त महीनों के दौरान, वाटिकन के राज्य सचिव, कार्डिनल पिएत्रो पारोलिन, ने बार-बार परमधर्मपीठ की मध्यस्थता करने की इच्छा को दोहराया है और संवाद और सहयोग के मार्ग को बढ़ावा देने के लिए हर संभव प्रयास किया है और यूक्रेन में शांति के लिए मार्च और नवंबर में विशेष ख्रीस्तयाग अर्पित किया।

संत पापा ने वाटिकन के विदेश सचिव महाधर्माध्यक्ष पॉल रिचर्ड गलाघेर और  अपने दानदाता कार्डिनल कोनराड क्रायेस्की के अलग-अलग समय में, युद्धग्रस्त यूक्रेन देश में अपनी निकटता लाने और सहायता करने के लिए भेजा।

विदेश सचिव महाधर्माध्यक्ष गलाघेर ने यूक्रेन में मारे गए यूक्रेनी सैनिकों को श्रद्धांजलि दी।
विदेश सचिव महाधर्माध्यक्ष गलाघेर ने यूक्रेन में मारे गए यूक्रेनी सैनिकों को श्रद्धांजलि दी।

एक वर्ष में अपनी प्रेरितिक यात्रा के दौरान भी संत पापा ने कभी भी शांति और युद्ध को समाप्त करने का आह्वान करने का अवसर नहीं खोया।

भागे हुए यूक्रेनियों के लिए दिल और दरवाज़े खोलना

संघर्ष के फैलने के बाद, संत पापा फ्राँसिस की अपील लगातार दलीलें बन गईं: "कई बार हमने प्रार्थना की है," संत पापा ने 27 फरवरी को देवदूत प्रार्थना का पाठ करने के उपरांत कहा, "कि इस युद्ध के मार्ग को नहीं लिया जाए। हम प्रार्थना करना बंद नहीं करते, इसके विपरीत, हम ईश्वर से और अधिक तीव्रता से याचना करते हैं।"

इसके बाद उन्होंने यूक्रेन में शांति स्थापना करने के लिए 2 मार्च को प्रार्थना और उपवास के दिन का आह्वान किया।

प्रार्थना की शक्ति संघर्ष के पहले दिनों से एक और चेहरे से जुड़ गई है: वह है एकजुटता। 2 मार्च को आम दर्शन समारोह में, पोलिश तीर्थयात्रियों का अभिवादन करते हुए, संत पापा ने याद किया कि पोलैंड वासी यूक्रेन का समर्थन करने वाले पहले नागरिक थे, जिन्होंने अपनी सीमाओं, अपने दिलों और अपने घरों के दरवाजे "युद्ध से भाग रहे यूक्रेनी लोगों के लिए खोल दिया।"

खून और आंसुओं की नदियां

संत पापा ने, "घिरे हुए क्षेत्रों में सहायता की गारंटी और सुगमता प्रदान करने के लिए" मानवीय गलियारों को खोलने का भी आह्वान किया।

6 मार्च को देवदूत प्रार्थना में, संत पापा फ्राँसिस ने संघर्ष को इसकी कठोर वास्तविकता में इन शब्दों के साथ चित्रित किया: "यूक्रेन में खून और आँसुओं की नदियाँ बह रही हैं। यह सिर्फ एक सैन्य अभियान नहीं है, बल्कि एक युद्ध है, जो मौत, दुःख और विनाश को बोता है। पीड़ितों की संख्या बढ़ती जा रही है, पलायन कर रहे लोगों में विशेष रूप से माताएं और बच्चे है।"

देवदूत प्रार्थना के उपरांत संत पापा ने उल्लेख किया कि परमार्थ सेवा के लिए गठित परमधर्मपीठीय विभाग के प्रीफेक्ट कार्डिनल कोनराड क्रायेस्की और समग्र मानव विकास को बढ़ावा देने के लिए गठित परमधर्मपीठीय विभाग के प्रीफेक्ट कार्डिनल माइकेल चरनी ने उनके नाम पर लोगों की मदद और "सेवा करने के लिए" युद्धग्रस्त देश की यात्रा की थी।”

संत पापा की ओर से एक मिशन पर

दोनों कार्डिनलों को संत पापा ने सीधे अपने प्रतिनिधियों के रूप में शरणार्थियों और युद्ध के पीड़ितों के लिए एकजुटता और निकटता लाने के लिए भेजा था।

उसी देवदूत प्रार्थना के दौरान संत पापा ने कहा, "उनकी उपस्थिति, न केवल परमाध्यक्ष की, बल्कि उन सभी ख्रीस्तियों की भी है जो पास आना चाहते हैं और कहते हैं: युद्ध पागलपन है! कृपया इस क्रूरता को रोकें!"

अपने मिशन में कार्डिनल क्रायेस्की
अपने मिशन में कार्डिनल क्रायेस्की

अग्रिम मोर्चे पर कार्डिनल क्रायेस्की का मिशन

युद्ध के इस वर्ष के दौरान, कार्डिनल क्रायेस्की सहायता और भोजन पहुचाने आदि कई मिशनों पर संत पापा फ्राँसिस का आशीर्वाद और रोजरी माला के साथ यूक्रेन आए हैं ताकि कोई भी अकेला महसूस न करे।

उन्होंने इज़ियम में सामूहिक कब्रों में दफनाए गए कई शवों के सामने प्रार्थना की।

यूक्रेन में, कार्डिनल क्रायेस्की जनरेटर और थर्मल शर्ट लाए और संत पापा द्वारा दान की गई दो अंबुलेंस यूक्रेन पहुँचाया।

मई महीने में वाटिकन के विदेश सचिव महाधर्माध्यक्ष पॉल रिचर्ड गलाघेर ने भी यूक्रेन की यात्रा की थी। उन्होंने वोरजेल, इरपिन और बुचा के युद्धग्रस्त शहरों का दौरा किया, जहां उन्होंने संत अद्रेयस के ऑर्थोडोक्स गिरजाघर के पास सामूहिक कब्र के सामने प्रार्थना की।

ईश्वर के नाम पर, नरसंहार बंद करें

यूक्रेन में संघर्ष की शुरुआत के बाद से संत पापा ने निरंतर अनुरोध किया है कि युद्ध को समाप्त करें।

13 मार्च को देवदूत प्रार्थना के उपरांत संत पापा फ्राँसिस ने अपील की, “ईश्वर के नाम पर, इस पीड़ित देश में नरसंहार को रोकें।” संत पापा ने दुःख व्यक्त करते हुए कहा कि मारियुपोल शहर 'हृदय विदारक युद्ध से शहीद हुआ शहर बन गया है।'

14 मार्च को, एक नैतिक और सामाजिक उद्देश्य से गठित एक संघ को संबोधित करते हुए, संत पापा ने लोगों को यह विचार करने के लिए आमंत्रित किया कि कैसे मानव जाति इतिहास की शिक्षा की उपेक्षा करती है: "विभिन्न क्षेत्रीय युद्ध और विशेष रूप से यूक्रेन में वर्तमान युद्ध यह दर्शाता है कि जो लोग हमारे भाग्य को नियंत्रित करते हैं, उन लोगों ने अभी तक बीसवीं सदी की त्रासदियों से कुछ भी नहीं सीखा है।"

16 मार्च संत पापा और मॉस्को के प्राधिधर्माध्यक्ष किरिल के बीच वीडियो कॉल का दिन था।

संत पापा फ्राँसिस और मॉस्को के रूसी ऑर्थोडॉक्स प्राधिधर्माध्यक्ष किरिल के बीच वीडियो कॉल
संत पापा फ्राँसिस और मॉस्को के रूसी ऑर्थोडॉक्स प्राधिधर्माध्यक्ष किरिल के बीच वीडियो कॉल

संत पापा फ्राँसिस और मॉस्को के रूसी ऑर्थोडॉक्स प्राधिधर्माध्यक्ष किरिल के बीच वीडियो कॉल

वाटिकन प्रेस कार्यालय के निदेशक मत्तेओ ब्रूनी ने कहा कि उनकी बातचीत "यूक्रेन में युद्ध और शांति सुनिश्चित करने हेतु सब कुछ करने में ख्रीस्तियों और उनके पुरोहितों की भूमिका" पर केंद्रित थी। संत पापा फ्राँसिस उनसे सहमत थे कि "कलीसिया को राजनीति की भाषा का उपयोग नहीं करना चाहिए, बल्कि येसु की भाषा का उपयोग करना चाहिए।"

संत पापा ने कहा, "जो लोग युद्ध का खमियाजा भुगत रहे हैं, वे साधारण लोग हैं ..." और "युद्ध," "हमेशा अन्यायपूर्ण होते हैं। क्योंकि जो दुःख सहते हैं वे ईश्वर के लोग हैं।"

युद्ध अमानवीय और अपवित्र है

दिन बीतते गए और, "दुर्भाग्य से, यूक्रेन के खिलाफ हिंसक आक्रामकता बंद नहीं हुई है।" संत पापा ने 20 मार्च को देवदूत प्रार्थना में याद किया, "एक मूर्खतापूर्ण नरसंहार जहां हर दिन हत्या और अत्याचार को दोहराया जाता है।"

उन्होंने कहा, "इतने सारे दादा-दादी, बीमार और गरीब लोग, अपने परिवारों से बिछड़ गए। कई बच्चे और कमजोर लोग बम के नीचे मरने के लिए छोड़ दिए गये हैं, उन्हें मदद नहीं मिल पाती है।"

"यह सब अमानवीय है! वास्तव में, यह अपवित्र भी है क्योंकि यह मानव जीवन की पवित्रता के खिलाफ जाता है, विशेष रूप से रक्षाहीन मानव जीवन के खिलाफ, जिसका सम्मान किया जाना चाहिए और संरक्षित किया जाना चाहिए और यह किसी भी रणनीति से पहले आता है! हमें भूलना नहीं चाहिए।" उन्होंने कहा, "यह अमानवीय और पवित्र क्रूरता है!”

संघर्ष से पूरी दुनिया को खतरा है

"यह देखना असहनीय है कि यूक्रेन में क्या हुआ है और हो रहा है।"

24 मार्च को इतालवी महिला केंद्र द्वारा आयोजित एक बैठक में प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए, संत पापा ने तहा कि पूर्वी यूरोपीय देश में त्रासदी "सत्ता के पुराने तर्क का फल है जो अभी भी तथाकथित भू-राजनीति पर हावी है।"

"पिछले सत्तर वर्षों का इतिहास यह प्रदर्शित करता है: क्षेत्रीय युद्धों में कभी कमी नहीं रही है; इसीलिए मैंने कहा कि हम तीसरे विश्व युद्ध में हैं जो टुकड़ों में हो रहा है, थोड़ा-थोड़ा हर जगह। अब यह एक बड़ा आयाम है और पूरी दुनिया को प्रभावित कर रहा है।"

माता मरियम के निष्कलंक हृदय को समर्पण

25 मार्च को, संत पापा फ्राँसिस ने संत पेत्रुस महागिरजाघर में प्रायश्चित समारोह की अध्यक्षता की और अंत में, माता मरियम के निष्कलंक हृदय को समर्पण की प्रार्थना का पाठ किया और मानवता को विशेष रूप से रूस और यूक्रेन के लोगों को सौंपा।

"हमें युद्ध से मुक्त करें, हमारी दुनिया को परमाणु हथियारों के खतरे से बचायें।" "हमें कृपा दें कि युद्ध समाप्त हो और दुनिया भर में शांति फैले।"

धन्य माता मरियम को संत पापा का समर्पण

दुनिया के धर्माध्यक्षों और विश्वासियों के साथ मिलकर, संत पापा ने पुरी मानवता को मरियम के निष्कलंक हृदय को समर्पित किया : "यह कोई जादू का सूत्र नहीं है, बल्कि एक आध्यात्मिक कार्य है। यह एक प्रयश्चित समारोह है," संत पापा ने अपने प्रवचन के दौरान समझाया, "बच्चों की ओर से पूर्ण विश्वास, जो इस क्रूर और संवेदनहीन युद्ध जो हमारी दुनिया को खतरे में डालते हैं, हम अपनी माँ की ओर मुड़ते हैं।"

भविष्य नष्ट हो रहा है

27 मार्च के देवदूत प्रार्थना में जोर देते हुए युद्ध शुरू होने के ठीक एक महीने बाद इसे संत पापा ने "क्रूर और संवेदनहीन" कहा। युद्ध के कारण हर दो बच्चों में से एक को यूक्रेन से विस्थापित होना पड़ रहा है। "इसका मतलब उनका भविष्य को नष्ट हो रहा है।"

6 अप्रैल को आम दर्शन समारोह में, माल्टा में अपनी प्रेरितिक यात्रा को याद करते हुए, संत पापा ने जोर देकर कहा कि "द्वितीय विश्व युद्ध के बाद शांति के एक नए इतिहास की नींव रखने का प्रयास किया गया था, लेकिन दुर्भाग्य से - हम नहीं सीख पाये - पुरानी बड़ी शक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा की कहानी जारी रही।"

और यूक्रेन में वर्तमान परिदृश्य में हम "संयुक्त राष्ट्र के संगठनों की शक्तिहीनता" को देखते हैं। युद्ध के बारे में समाचार, "राहत और आशा लाने के बजाय, बुचा नरसंहार जैसे नए अत्याचारों की पुष्टि करता है," संत पापा ने "नागरिकों, महिलाओं और रक्षाहीन बच्चों" के खिलाफ "तेजी से भयावह क्रूरता" का जिक्र करते हुए याद किया।

पीड़ित यूक्रेन के लिए शांति

पिछले साल पास्का महोत्सव पर उर्बी एत ओरबी संदेश में, संत पापा फ्राँसिस का आह्वान "मसीह की शांति को हमारे जीवन, हमारे घरों, हमारे देशों में प्रवेश करने देना" था। "हिंसा और युद्ध के विनाश से शहीद यूक्रेन को शांति मिले।"

संत पापा ने शांति के लिए सबकी प्रतिबद्धता का आह्वान किया: "आइए, हम युद्ध के आदी न हों।"

संत पापा ने यूक्रेनी लोगों द्वारा सहन की गई भयानक पीड़ा को याद किया: "मैं अपने दिल में सभी पीड़ितों, लाखों शरणार्थियों और आंतरिक रूप से विस्थापित व्यक्तियों, परिवारों को अलग कर दिये गये बुजुर्गों को याद करता हूँ। उन्हें अकेला छोड़ दिया गया है और अनेक शहर तबाह हो गए।

यूक्रेन में क्षतिग्रस्त मठ

माता मरिया को यूक्रेनी लोगों के आंसूओं को समर्पित

8 मई को, पोम्पेय के तीर्थालय में माता मरियम की छवि के आसपास कई विश्वासी एकत्रित हुए और अपनी प्रार्थना में यूक्रेनियों को समर्पित किया।

"आध्यात्मिक रूप से कुँवारी मरियम के सामने घुटने टेकते हुए," स्वर्ग की रानी प्रार्थना का पाठ करने के बाद संत पापा ने कहा, "मैं उन्हें इतने सारे लोगों की शांति की प्रबल इच्छा को सौंपता हूँ, जो दुनिया के विभिन्न हिस्सों में युद्ध के मूर्खतापूर्ण दुर्भाग्य को झेलते हैं। धन्य कुँवारी के चरणों में विशेष रूप से यूक्रेनी लोगों की पीड़ा और आंसुओं को चढ़ाता हूँ।"

संत पापा फ्राँसिस ने फिर से लोगों से खुद को प्रार्थना में सौंपने का आग्रह किया: "युद्ध के पागलपन के सामने, आइए, हम हर दिन शांति के लिए रोज़री की प्रार्थना करना जारी रखें।"

13 मई को, राष्ट्रीय विमानन प्राधिकरण के प्रबंधकों और कर्मचारियों के साथ बैठक में, संत पापा ने एक आशा व्यक्त की: "आसमान हमेशा और केवल शांति का आकाश हो, हम शांति से मित्रता और शांति के संबंधों को स्थापित करने और मजबूत करने के लिए उड़ान भरें।"

अनाज को हथियार की तरह इस्तेमाल न करें

जून 2022 को एक अन्य आमदर्शन समारोह में संत पापा ने अपील की : "यूक्रेन से गेहूँ के निर्यात की नाकाबंदी, जिस पर लाखों लोगों का जीवन निर्भर करता है, विशेष रूप से, सबसे गरीब देशों में, बड़ी चिंता पैदा कर रहा है।"

"मैं हार्दिक अपील करता हूँ कि इस मुद्दे को हल करने और भोजन के सार्वभौमिक मानव अधिकार की गारंटी देने के लिए हर संभव प्रयास किया जाए। कृपया गेहूँ, एक मुख्य भोजन को युद्ध के हथियार के रूप में प्रयोग न करें।"

यूक्रेन जाने की चाह

संघर्ष के कारण तोड़ दिये गये इन 12 महीनों में संत पापा ने लगातार यूक्रेन जाने की इच्छा जाहिर की है। 4 जून को उन्होंने 'अन्यजातियों के आंगन' की 'बच्चों की ट्रेन' में प्रतिभागियों से मुलाकात की। एक यूक्रेनी बच्चे के लिए, उन्होंने इन शब्दों को संबोधित किया: "मैं यूक्रेन जाना चाहता हूँ; पर मुझे ऐसा करने के लिए उस पल का इंतजार करना होगा, तुम्हें पता है? क्योंकि यह निर्णय लेना आसान नहीं है जिससे दुनिया को हित से अधिक हानि पहुँचे। मुझे इसके लिए उपयुक्त समय खोजने की जरूरत है।"

पोप फ्राँसिस : ‘मैं यूक्रेन जाना चाहता हूँ लेकिन सही समय में’

5 जून को पेंतेकोस्त महापर्व के अवसर पर और "यूक्रेन के खिलाफ सशस्त्र आक्रमण की शुरुआत के एक सौ दिन बाद," स्वर्ग की रानी प्रार्थना में पोप ने जोर देकर कहा कि युद्ध "ईश्वर के सपने को नकारना है: लोग आपस में टकरा रहे हैं, लोग एक-दूसरे को मार रहे हैं, एक-दूसरे के करीब आने के बजाय अपने घरों से भगा दिए जाते हैं।" उन्होंने राष्ट्रों के नेताओं से अपील की कि वे "मानवता को बर्बाद न करें"।

मानवता की आवाज जो शांति के लिए पुकार रही है

एक सप्ताह बाद 12 जून को देवदूत प्रार्थना के दौरान संत पापा फ्राँसिस ने यूक्रेन के युद्ध से पीड़ित लोगों की याद की। उन्होंने कहा, "समय जो बीत जाता है हमारे दर्द और उन पीड़ित लोगों के लिए हमारी चिंता को कम नहीं कर सकता। कृपया, हम इस दुखद वास्तविकता की आदत न डालें! इसे हमेशा अपने दिलों में रखें। आइए, हम प्रार्थना करें और शांति के लिए संघर्ष करें।"

गरीबों के लिए छठे विश्व दिवस के लिए अपने संदेश में, जिसको 13 जून को मनाया जाता है, पोप ने जोर दिया कि "यूक्रेन में युद्ध उन क्षेत्रीय युद्धों में शामिल हो गया है जो हाल के वर्षों में मौत और विनाश झेल रहे हैं। किन्तु यहाँ की तस्वीर एक 'महाशक्ति' के सीधे हस्तक्षेप के कारण अधिक जटिल है जो लोगों के आत्मनिर्णय के सिद्धांत के खिलाफ अपनी इच्छा थोपने की कोशिश कर रहा है। दुखद स्मृति के दृश्य दोहराए जा रहे हैं, और एक बार फिर चंद ताकतवर लोगों का आपसी ब्लैकमेल मानवता की शांति की पुकार की आवाज को ढक रहा है।"

यूक्रेन के लोगों के लिए मैं क्या कर सकता हूँ?

19 जून को देवदूत प्रार्थना में, उन्होंने विशेष रूप से इन प्रश्नों को रखा: "आज मैं यूक्रेनी लोगों के लिए क्या करूँ? क्या मैं प्रार्थना करता हूँ? क्या मैं स्वयं को देता हूँ? क्या मैं समझने की कोशिश करता हूँ?"

13 जून को, पूर्वी कलीसियाओं की सहायता एजेंसियों की मंडली की पूर्ण सभा में प्रतिभागियों के साथ बैठक में, पोप ने जोर देकर कहा कि यूक्रेन में "हम काईन और हाबिल के नाटक में लौट आए हैं"; "एक ऐसी हिंसा में, जो जीवन को नष्ट कर देती है, इस शैतानी हिंसा को फैलाया गया है, जिसके लिए हम विश्वासी प्रार्थना की शक्ति से प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए बुलाये जा रहे हैं, हर ख्रीस्तीय दान की ठोस मदद के साथ ताकि हथियार बातचीत को रास्ता दे सकें। "

आशा का चिन्ह

3 जुलाई के देवदूत प्रार्थना में संत पापा फ्राँसिस ने पुनः जोर दिया था कि दुनिया को शांति की जरूरत है :  'हथियारों के संतुलन, आपसी भय में आधारित शांति नहीं। नहीं, ऐसा नहीं चलेगा। इसका मतलब इतिहास को सत्तर साल पीछे ले जाना है। यूक्रेनी संकट को होना चाहिए था, लेकिन - अगर कोई इसे चाहे - अभी भी बुद्धिमान राजनेताओं के लिए एक चुनौती बन सकता है, जो संवाद में नई पीढ़ियों के लिए एक बेहतर दुनिया बनाने में सक्षम हो। उसके एक माह बाद 7 अगस्त के देवदूत प्रार्थना में संत पापा फ्राँसिस ने संतुष्टि के साथ अभिवादन किया, जब यूक्रेन के बंदरगाहों से अनाज से लदे पहले जहाजों ने प्रस्थान किया। उन्होंने कहा, "इस कदम से पता चलता है कि बातचीत करना और ठोस परिणाम प्राप्त करना संभव है, जिससे सभी को लाभ होता है। इसलिए, यह घटना भी आशा का प्रतीक है।"

राष्ट्रपति जेलेंस्की टेलेफोन पर बातचीत

12 अगस्त को संत पापा एवं राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के साथ टेलेफोन पर बातचीत हुई। यूक्रेन के शीर्ष अधिकारी ने स्वयं इसके बारे बतलाया, जिन्होंने ट्वीट के माध्यम से अपने देश में भयावाह स्थित की जानकारी दी एवं संत पापा की प्रार्थनाओं के लिए उनके प्रति आभार प्रकट किया। जेलेंस्की ने 22 मार्च को वीडियो कॉल के माध्यम से इताली संसद को बतलाया कि उन्होंने पोप से बातें की थीं : "उन्होंने बहुत महत्वपूर्ण बातें कहीं।" रूसी हमले के दो दिन बाद 26 फरवरी को पोप फ्रांसिस और राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की के बीच एक और टेलीफोन पर बातचीत हुई। उस अवसर पर, पोप ने यूक्रेनी राष्ट्रपति को यूक्रेन में 'दुखद घटनाओं के लिए अपना गहरा दुःख' व्यक्त किया।

युद्ध पागलपन है

हमला शुरू होने के 6 महीना बाद, आमदर्शन समारोह में 24 अगस्त को संत पापा फ्राँसिस ने जोर देते हुए कहा कि युद्ध पागलपन है : 'मैं अत्याधिक क्रूरता को सोचता हूँ कि कितने निर्दोष लोग इस पागलपन की कीमत चुका रहे हैं, हर तरह से पागलपन, क्योंकि युद्ध पागलपन है। "और जो लोग युद्ध एवं हथियार व्यापार का फायदा उठा रहे हैं वे अपराधी हैं, वे मानता को नष्ट कर रहे हैं।"

कजाकिस्तान में 13 से 15 सितम्बर को प्ररितिक यात्रा के दौरान एक सवाल बार बार उठा : "अब और क्या होना बाकी है, लोगों और मानवता की भलाई के विपक्ष को संवाद का रास्ता देने से पहले कितनी मौतों का इंतजार करना होगा?" एक प्रश्न जिसके लिए केवल एक ही क्षितिज का पालन करना चाहिए: 'एकमात्र रास्ता शांति है और वहां पहुंचने का एकमात्र तरीका संवाद है।'

एक ध्वस्त दुनिया की विरासत

संत पापा ने अपनी आशा खासकर युवाओं पर रखी है। 24 सितंबर को, 'फ्राँसिस की अर्थव्यवस्था' कार्यक्रम के अवसर पर असीसी की अपनी यात्रा के दौरान, संत पापा ने इन शब्दों का उच्चारण किया: "आप एक ऐसे समय में अपनी जवानी को जी रहे हैं जो आसान नहीं है: पर्यावरण संकट, महामारी और अब यूक्रेन में युद्ध एवं अन्य युद्ध जो विभिन्न देशों में वर्षों से चल रहे हैं, हमारे जीवन को प्रभावित कर रहे हैं। हमारी पीढ़ी ने आपको कई दौलत दी है, लेकिन हम ग्रह की रक्षा करने में विफल रहे हैं और हम शांति की रक्षा नहीं कर पा रहे हैं।" "आप आमघर के कारीगर और निर्माता बनने के लिए बुलाये जाते हैं, एक ऐसा आम घर जो बर्बाद हो रहा है।"

रूस और यूक्रेन के राष्ट्रपतियों से अपील

2 अक्टूबर के देवदूत प्रार्थना में संत पापा ने धर्मशिक्षा नहीं दी बल्कि अपनी लम्बी अपील पढ़ी जिसमें उन्होंने कहा, "यूक्रेन में युद्ध का क्रम इतना गंभीर, विनाशकारी और खतरनाक हो गया है, जिससे बड़ी चिंता उत्पन्न हो गई है।" "मैं हाल के महीनों में बहाए गए खून और आंसुओं की नदियों से व्यथित हूँ"। और यह दुखद है, उन्होंने आगे कहा, कि "दुनिया यूक्रेन के भूगोल को बूचा, इरपिन, मारियुपोल, इज़ियम, ज़ापोरिज़्ज़िया और अन्य इलाकों के माध्यम से पहचान रही है, जो अवर्णनीय पीड़ा और भय के स्थान बन गए हैं।"

"और इस तथ्य के बारे में क्या कहा जा सकता है कि मानवता एक बार फिर परमाणु खतरे का सामना कर रही है?" तब पोप ने सबसे पहले "रूसी संघ के राष्ट्रपति की ओर रुख किया, उनसे हिंसा और मौत की इस कुंडली को रोकने की भीख माँगी, कम से कम अपने लोगों के प्यार के खातिर।" पोप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति से "शांति के लिए गंभीर प्रस्तावों के प्रति खुले" रहने की अपील की।

युद्ध के सामने कलीसिया पीड़ित

24 अक्टूबर को संत पापा ने रोम में अध्ययन कर रहे सेमिनरी छात्रों एवं पुरोहितों से मुलाकात की। एक यूक्रेनी पुरोहित ने पोप से यह सवाल किया: "काथलिक कलीसिया को युद्ध से प्रभावित क्षेत्रों के संबंध में क्या भूमिका निभानी चाहिए?"

पोप फ्राँसिस ने उत्तर दिया, "काथलिक कलीसिया, एक माँ है, सभी लोगों की माँ। और एक माँ, जब उसके बच्चे संघर्ष में होते हैं, पीड़ित होती है। कलीसिया को युद्धों के सामने पीड़ित होना चाहिए, क्योंकि युद्ध बच्चों का विनाश करता है। बस जिस तरह एक माँ को पीड़ा होती है जब उसके बच्चे आपस में नहीं मिलते या झगड़ते हैं और एक-दूसरे से बात नहीं करते हैं - छोटे घरेलू युद्ध - आपके देश में इस तरह के युद्ध के सामने कलीसिया, माता कलीसिया को पीड़ित होना चाहिए। उसे दुखित होना, रोना और प्रार्थना करना चाहिए।"

बच्चों पर संघर्ष का भार

2 नवम्बर को मृत विश्वासियों की स्मृति दिवस के अवसर पर खीस्तयाग के दौरान संत पापा ने यूक्रेन की कुछ बातों को सामने रखा : "आज सुबह मैंने, एक बच्चों के घर से, एक चैपलिन, एक प्रोटेस्टंट, लूथरन चैपलिन से एक पत्र प्राप्त किया। बच्चे युद्ध से अनाथ हो गये हैं, अकेले और परित्यक्त हो गये हैं।" और उन्होंने कहा, ‘कि यह मेरी सेवा है, इन वंचित बच्चों को साथ देना क्योंकि उन्होंने अपने बच्चों को खो दिया है, क्रूर युद्ध ने उन्हें अकेला छोड़ दिया है।‘

"इस व्यक्ति ने वही किया है जो येसु उससे करने को कहते हैं: त्रासदी में छोटों की देखभाल करो। और जब मैंने उस पत्र को पढ़ा, जो बहुत दर्द के साथ लिखा गया था, तो मैं द्रवित हो गया, ... मैंने कहा: 'प्रभु, मैं देख सकता हूँ कि आप स्वर्गराज्य के सच्चे मूल्यों की ओर प्रेरित करना जारी रखते हैं।'"

रूसी और यूक्रेनी लोगों के प्रति स्नेह

6 नवंबर को बहरीन की प्रेरितिक यात्रा के अंत में विमान पर प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, पोप ने जोर देकर कहा कि "क्रूरता रूसी लोगों की नहीं है, क्योंकि रूसी लोग महान लोग हैं, लेकिन यह भाड़े के लोग हैं। वे सैनिक जो एक साहसिक कार्य के रूप में युद्ध के लिए जाते हैं: वे भाड़े के सैनिक हैं"। "मैं इस तरह से सोचना पसंद करता हूँ, क्योंकि मेरे मन में रूसी लोगों के लिए, रूसी मानवतावाद के लिए एक उच्च सम्मान है। जरा दोस्तोवस्की के बारे में सोचें जो आज भी हमें प्रेरित करते हैं, ख्रीस्तीयों को ख्रीस्तीय धर्म के बारे में सोचने के लिए प्रेरित करते हैं। मुझे रूसी लोगों के लिए बहुत स्नेह है।

"और मुझे यूक्रेनी लोगों से भी बहुत लगाव है। जब मैं ग्यारह साल का था, तो पास में एक यूक्रेनी पुरोहित था जो नजदीक ही में मिस्सा किया करता था और उसके पास कोई वेदी सेवक नहीं थे, और उसने मुझे सिखाया कि यूक्रेनी मिस्सा में वेदी सेवा कैसे की जाती है।"

पोप ने कहा, "ये सभी यूक्रेनी प्रार्थनाएँ, मैं उन्हें उनकी भाषा में जानता हूँ, क्योंकि मैंने उन्हें एक बच्चे के रूप में सीखा है, इसलिए मुझे यूक्रेनी धर्मविधि से बहुत लगाव है। मैं दो लोगों के बीच हूँ, जिन्हें मैं प्यार करता हूँ।"

मानवता के लिए एक हार

22 नवंबर को, पोप फ्राँसिस ने विश्व यहूदी कांग्रेस के प्रतिनिधियों से मुलाकात की, जहाँ उन्होंने कहा, "दुनिया के इतने सारे क्षेत्रों में शांति को खतरा है।"

"आइए हम एक साथ पहचानें," उन्होंने कहा, "कि युद्ध, हर युद्ध, हमेशा, किसी भी मामले में और हर जगह पूरी मानवता के लिए एक हार है! मैं यूक्रेन में जारी युद्ध के बारे में सोचता हूँ, एक विशाल और अपवित्र युद्ध को जो यहूदियों और ख्रीस्तीयों को समान रूप से चेतावनी दे रहा है, उन्हें उनके स्नेह, उनके घरों, उनकी संपत्ति, उनके जीवन से वंचित कर रहा है! केवल एक दूसरे के करीब आने की तीव्र इच्छा और भ्रातृ संवाद में ही शांति के लिए जमीन तैयार करना संभव है। आइए हम यहूदियों और ख्रीस्तीयों के रूप में, युद्ध को रोकने और शांति के रास्ते खोलने के लिए मानवीय रूप से हर संभव प्रयास करें।"

लोगों की पीड़ा, पोप की पीड़ा

यूक्रेन में युद्ध के फैलने के नौ महीने बाद, पोप फ्राँसिस ने 24 नवंबर को एक पत्र में और यूक्रेनी लोगों को संबोधित करते हुए, "युद्ध की बेतुकी मूर्खता" के लिए अपना दुःख व्यक्त किया।

"आपका दर्द मेरा दर्द है। आज येसु के क्रूस में, मैं आपको देखता हूँ, आप जो इस आक्रामकता से फैलाए गए आतंक को सहते हैं। कई दुखद कहानियाँ मेरे दिमाग में वापस आती हैं। सबसे पहले, उन छोटों की: कितने बच्चे मारे गए, घायल या अनाथ अथवा अपनी माताओं से अलग हो गये हैं! मैं आपके साथ हर छोटे बच्चे के लिए रोता हूँ, जिसने इस युद्ध के कारण अपना जीवन खो दिया है, ओडेसा में किरा की तरह, विनित्सिया में लिसा की तरह, और सैकड़ों अन्य बच्चों की तरह: उनमें से हर एक में पूरी मानवता हार गई है। अब वे ईश्वर के गर्भ में हैं, वे आपके दुःखों को देखते हैं और उनके समाप्त होने की प्रार्थना करते हैं।"

युद्ध के दुष्परिणाम

आठवीं रोम एमइडी संवाद सम्मेलन के प्रतिभागियों को 1 दिसंबर के अपने संदेश में, पोप ने "यूरोप के भीतर चल रहे युद्ध संघर्ष" के अन्य खतरनाक प्रभावों को याद किया।

उन्होंने कहा, "पीड़ितों, नागरिक और सैन्य दोनों के संदर्भ में हर युद्ध की अपूरणीय क्षति के अलावा, ऊर्जा संकट, वित्तीय संकट, इतने सारे निर्दोष लोगों के लिए मानवीय संकट है जो अपने घरों को छोड़ने और अपनी मेहनत से अर्जित संपत्ति खोने के लिए मजबूर हैं, और, खाद्य संकट, जो दुनिया भर में लोगों की बढ़ती संख्या को प्रभावित करता है, विशेष रूप से सबसे गरीब देशों में, वास्तव में, यूक्रेनी संघर्ष का उत्तरी अफ्रीकी देशों में भारी प्रभाव पड़ रहा है, जो यूक्रेन या रूस से अनाज पर 80% निर्भर हैं।"

द्वन्द्व में फंसा

विकलांग व्यक्तियों के अंतर्राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर 3 दिसंबर के अपने संदेश में, पोप फ्राँसिस ने "सभी विकलांग महिलाओं और पुरुषों की पीड़ा को याद किया जो युद्ध की स्थितियों में रहते हैं, या जो लड़ाई के कारण खुद को अक्षम पाते हैं। कितने लोग - यूक्रेन और युद्ध के अन्य जगहों में - उन जगहों पर कैद हैं जहाँ लड़ाई चल रही है और उनके बचने की संभावना भी नहीं है? उन पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए और मानवीय सहायता तक उनकी पहुँच के हर रास्ते को सुगम बनाया जाना चाहिए।"

यूक्रेन के लिए पोप का रोना

8 दिसंबर को धन्य कुँवारी के निष्कलंक गर्भाधान का महापर्व, निष्कलंक माता मरियम से संत पापा की प्रार्थना का दिन है। पियात्सा इस्पानिया में कुँवारी मरियम के स्मारक पर पारंपरिक श्रद्धांजलि और प्रार्थना के दौरान पोप ने आँसू बहाते हुए, इन शब्दों का उच्चारण किया: "बेदाग कुँवारी, मुझे आज आपके सामने शांति के लिए यूक्रेनी लोगों का आभार लाना चाहिए था। हम जिसके लिए लंबे समय से प्रभु से प्रार्थना कर रहे हैं। इसके बजाय, मुझे अभी भी आपके पास बच्चों, बुजुर्गों, माता-पिता, उस तड़पती भूमि के युवा लोगों की याचना करनी है, जो बहुत अधिक पीड़ित हैं।"

अपने दिलों में यूक्रेनी लोगों के साथ क्रिसमस

क्रिसमस से कुछ दिन पहले 14 दिसंबर के आमदर्शन समारोह में पोप फ्राँसिस ने सभी को इस समय को जीने के लिए आमंत्रित किया, उन लोगों को नहीं भूलने के लिए जो युद्ध के कारण पीड़ित हैं: "आइए हम अधिक विनम्र उपहारों के साथ एक और विनम्र क्रिसमस मनाएँ। आइए, हम जो बचाते हैं उसे यूक्रेनी लोगों के लिए भेजें, जो जरूरतमंद हैं, जो बहुत पीड़ित हैं; भूखे रहते हैं, उन्हें ठंड लगती है और कई लोग मर जाते हैं क्योंकि साथ में कोई डॉक्टर, नर्स नहीं हैं। आइए, हम न भूलें: एक क्रिसमस, शांति के ईश्वर के साथ, लेकिन हमारे दिल में यूक्रेनी लोगों के साथ मनायें।"

पोप फ्राँसिस ने 25 दिसंबर को उर्बी एत ओरबी संदेश में कहा, "हमारी नजरें," हमारे यूक्रेनी भाइयों और बहनों के चेहरों को देखें, जो दस महीने के युद्ध के कारण हुए विनाश के कारण इस क्रिसमस में, अंधेरे, ठंड या अपने घरों से दूर हैं।"

आशा न खोयें

साल 2023 की शुरुआत उन्हीं नाटकीय जख्मों के साथ हुई। नए साल का पहला दिन, जिसे संत पापा पौल छटवें दुनिया में शांति के लिए प्रार्थना और चिंतन को समर्पित करना चाहते थे, असहनीय युद्ध के कारण विपरीत परिस्थिति को महसूस किया, जो यूक्रेन और अन्य क्षेत्रों में मौत और विनाश बोता है।"

"हालांकि," पोप ने देवदूत प्रार्थना में कहा, "हम आशा नहीं खोते हैं, क्योंकि हमें ईश्वर में विश्वास है, जिसने येसु मसीह में हमारे लिए शांति का मार्ग खोल दिया है।"

जिन माताओं ने अपने बच्चों को खोया है

8 जनवरी को, प्रभु के बपतिस्मा का पर्व, के अवसर पर देवदूत प्रार्थना में संत पापा ने माताओं की माताओं की विशेष याद की।

"आज, हमारी माता मरियम को चरनी में शिशु की देखभाल करते हुए देखकर, मैं युद्ध के पीड़ितों की माताओं के बारे में सोचता हूँ, उन सैनिकों की माताओं के बारे जो यूक्रेन में इस युद्ध में मौत के शिकार हो गए। यूक्रेनी माताएँ और रूसी माताएँ, दोनों ने अपने बच्चों को खो दिया है। यह युद्ध की कीमत है। हम उन माताओं के लिए प्रार्थना करते हैं जिन्होंने अपने यूक्रेनी और रूसी सैनिक पुत्रों को खो दिया है।

यूक्रेन एक बीमार मां है

इस साल 25 जनवरी को, पोप फ्राँसिस ने पैन-यूक्रेनी काउंसिल ऑफ चर्च और धार्मिक संगठनों से मुलाकात की। पोप ने कहा, 'यहूदी यूक्रेन, ख्रीस्तीय यूक्रेन, रूढ़िवादी यूक्रेन, काथलिक यूक्रेन, इस्लामिक यूक्रेन' कोई नहीं है। केवल एक यूक्रेन है, 'माँ' जो पीड़ित है, जब वह अपने बच्चों पर क्रूरता को देखती है।

एक उदास सालगिरह

22 फरवरी को, यूक्रेन पर आक्रमण और "इस बेतुके एवं क्रूर युद्ध की शुरुआत" के लगभग एक साल बाद, पोप ने आमदर्शन समारोह में इस "दुखद सालगिरह" पर चिंतन किया।

"मृतकों, घायलों, शरणार्थियों और विस्थापितों की संख्या, विनाश, आर्थिक और सामाजिक क्षति खुद से पूछती है। क्या ईश्वर इतने अपराधों और इतनी हिंसा को क्षमा कर सकते हैं? वे शांति के देवता हैं। आइए, हम पीड़ित यूक्रेन के लोगों के करीब रहें।" लोग, जो पीड़ित हैं। और आइए हम खुद से पूछें: क्या युद्ध को रोकने के लिए हर संभव प्रयास किया गया है? मैं राष्ट्रों के अधिकारियों से अपील करता हूँ कि वे संघर्ष को समाप्त करने, संघर्ष विराम हासिल करने और शांति वार्ता शुरू करने के लिए एक ठोस प्रतिबद्धता बनाएँ। मलबे पर बनी जीत कभी भी वास्तविक जीत नहीं होगी!"

खुद को युद्ध के लिए न त्याग दें

युद्ध के इन बारह महीनों के दौरान, संत पापा फ्राँसिस ने हमेशा शहीद यूक्रेनी लोगों को नहीं भूलने, संवाद और शांति के तरीके खोजने के लिए कहा है। उन्होंने संकेत, आँसू, शब्द, अपील के साथ, युद्ध के लिए खुद को इस्तीफा नहीं देने और उदासीन नहीं रहने के लिए कहा है।

 

 

Thank you for reading our article. You can keep up-to-date by subscribing to our daily newsletter. Just click here

24 February 2023, 16:41