खोज

2022.11.28 संत मार्था में अमेरिकी पत्रिका के संपादकों के साथ संत पापा फ्राँसिस 2022.11.28 संत मार्था में अमेरिकी पत्रिका के संपादकों के साथ संत पापा फ्राँसिस  (Antonello Nusca)

संत पापा: ध्रुवीकरण कथलिक नहीं है, संवाद ही एकमात्र रास्ता है

संत पापा फ्राँसिस ने काथलिक ''अमेरिका मैगज़ीन'' को एक विशेष साक्षात्कार दिया, जिसमें उन्होंने अमेरिका, कलीसिया के मुद्दों, सामाजिक मुद्दों, यूक्रेन में युद्ध, चीन के साथ वाटिकन के संबंधों और परमाधिकारी के रुप में उनके कार्य से संबंधित कई सवालों के जवाब दिए।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, गुरुवार 1 दिसंबर 2022 (वाटिकन न्यूज) : अमेरिका काथलिक पत्रिका 'अमेरिका मैगज़ीन' ने सोमवार को संत पापा फ्राँसिस के साथ एक व्यापक साक्षात्कार प्रकाशित किया, यह पहली बार चिह्नित किया गया कि संत पापा एक अमेरिकी पत्रिका के संपादकों के साथ एक साक्षात्कार के लिए सहमत हुए हैं।

साक्षात्कार 22 नवंबर को वाटिकन में उनके निवास संत मार्था में आयोजित किया गया था और स्पेनिश भाषा में अमेरिकी जेसुइट पत्रिका के पांच प्रतिनिधियों द्वारा संचालित किया गया था, जिसमें इसके निवर्तमान प्रमुख संपादक, फादर मैट मेलोन, एस.जे.और आने वाले प्रधान संपादक फादर. सैम सॉयर, एस.जे. थे। साक्षात्कार में अमेरिकी कलीसिया में ध्रुवीकरण, जातिवाद, महिलाओं के अभिषेक पर कलीसिया की शिक्षा, सामाजिक मुद्दों पर संत पापा का रुख, यूक्रेन में युद्ध, चीन के साथ वाटिकन का संबंध और परमाधिकारी के रुप में उनके कार्य से संबंधित प्रश्न थे।

मैं खुश हूँ क्योंकि प्रभु मेरे साथ हैं  

फादर मेलोन ने संत पापा फ्राँसिस से यह पूछकर साक्षात्कार की शुरुआत की कि वे अपने कार्यों को निभाते हुए कस तरह से इतने शांत और खुश रह सकते हैं। संत पापा ने उत्तर दिया कि लोगों के साथ रहने से उन्हें हमेशा बहुत खुशी मिली है और जो बात उन्हें खुशी का अनुभव कराती है वह यह आश्वासन है कि "ईश्वर उनके साथ है"। उन्होंने कहा, "मेरे पूरे जीवन में ईश्वर ने हमेशा मुझे अपने रास्ते पर निर्देशित किया है, कभी-कभी मुश्किल क्षणों में, हमेशा आश्वासन देते हैं कि कोई अकेला नहीं चलता।"

ध्रुवीकरण काथलिक नहीं है

फादर सॉयर ने संत पापा से संयुक्त राज्य अमेरिका की राजनीति में और यहां तक ​​कि अमेरिकी काथलिक कलीसिया में भी बढ़ते ध्रुवीकरण के बारे में पूछा।

संत पापा ने समाज में वैचारिक पक्षपात के खतरों के खिलाफ चेतावनी दी, यह देखते हुए कि अमेरिकी समाज में विशेष रूप से कलीसिया के भीतर, भी कुछ "वैचारिक काथलिक समूह" हैं। "ध्रुवीकरण काथलिक नहीं है।" उन्होंने कहा कि येसु उस समय के यहूदियों,फरीसियों और सदूकियों के बीच के विभाजनों से परे थे।

"जितना अधिक ध्रुवीकरण होता है, उतना ही अधिक काथलिक भावना खोता है और एक सांप्रदायिक भावना में गिर जाता है।"

धर्माध्यक्ष और धर्माध्यक्षीय सम्मेलन

संत पापा फ्राँसिस से अमेरिका में धर्माध्यक्षों के सम्मेलन और काथलिक विश्वासियों के बीच विश्वास और नैतिकता पर बढ़ती दूरी के बारे में भी पूछा गया था। इस संबंध में उन्होंने धर्माध्यक्षों के सामूहिक संगठनों के बजाय व्यक्तिगत धर्माध्यक्षों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया और उनके झुंड के साथ उनके प्रेरितिक संबंधों पर ध्यान दिया, यह देखते हुए कि धर्माध्यक्षों का सम्मेलन संगठनों को "सहायता और एकजुट करने के लिए हैं, एकता का प्रतीक हैं। "येसु ने धर्माध्यक्षीय सम्मेलनों को स्थापित नहीं किया। येसु ने धर्माध्यक्षों को नियुक्त किया।”

"येसु मसीह की कृपा धर्माध्यक्ष और उसके धर्मप्रांत के लोगों के बीच के रिश्ते में है।"

गर्भपात का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए

साक्षात्कार के दौरान चर्चा एक और संवेदनशील मुद्दा गर्भपात का था, जो विशेष रूप से अमेरिका की काथलिक कलीसिया में भी विभाजनकारी रहा है। संत पापा ने इस मुद्दे के रहस्यमय आयाम का उल्लेख किया और हमें याद दिलाया कि इसका राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए।

संत पापा ने कहा कि समस्या तब पैदा होती है जब मानव जीवन के विनाश को एक राजनीतिक मुद्दे में बदल दिया जाता है या जब एक चरवाहा राजनीतिक दलों का उपयोग करता है।

जातिवाद ईश्वर के विरुद्ध पाप है

संत पापा फ्राँसिस ने नस्लवाद के बारे में सवाल का जवाब देते हुए कहा कि नस्लवाद ईश्वर के खिलाफ एक असहनीय पाप है। संत पापा फ्राँसिस ने कहा कि वे पीड़ित अफ्रीकी-अमेरिकी काथलिकों के चेहरे से अवगत हैं, उन्हें इससे मुंह नहीं मोड़ना चाहिए और कलीसिया, पुरोहितों और लोकधर्मियों को इसे मिटाने के लिए संघर्ष जारी रखना चाहिए।

कलीसिया के याजकों द्वारा बच्चों के यौन शोषण के मामलों के बारे में पूछे जाने पर, संत पापा ने खुलासा किया कि ऐसे मामलों को न छिपाने के कलीसिया के फैसले से यौन शोषण की क्रूरता के खिलाफ लड़ाई में महत्वपूर्ण प्रगति दिखाई दे रही है।

यूक्रेन में युद्ध के बारे में पुछे गये सवाल का जवाब देते हुए संत पापा ने कहा कि उन्होंने बार-बार परमधर्मपीठ द्वारा युद्ध को समाप्त करने के लिए मध्यस्थता करने की अपनी इच्छा व्यक्त की है।

उनकी वित्तीय निवेश नीति के कारण कुछ लोगों द्वारा उन्हें मार्क्सवादी के रूप में लेबल किए जाने के सवाल पर, संत पापा ने उत्तर दिया कि वे सुसमाचार का अनुसरण करते हैं और वे सुसमाचार के आशीर्वाद, विशिष्टता और उन मानदंडों के आधार पर सबसे अधिक प्रबुद्ध हैं जिनके आधार पर हमें आंका जाता है।

चीन के साथ संवाद

चीन के साथ वाटिकन के संबंध, धर्माध्यक्षों की नियुक्ति और देश के मानवाधिकारों के मुद्दे पर चुप रहने के बारे में पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए संत पापा ने कहा कि बात करने या चुप रहने के बजाय, सवाल यह होना चाहिए कि बातचीत की जाए या इसे छोड़ दिया जाए।

संत पापा ने कहा कि वे चीन के साथ बातचीत में शामिल होना जारी रखना चाहेंगे, भले ही यह धीमा हो,।

संत पापा फ्राँसिस ने कहा, चीनी लोग मेरे सम्मान और प्रशंसा के पात्र हैं क्योंकि वे बहुत बुद्धिमान हैं और संवाद कूटनीतिक कार्यों में सबसे अच्छा तरीका है, यह धीमा है, इसमें असफलताएं और सफलताएं हैं, लेकिन मुझे संवाद के अलावा और कोई रास्ता नहीं दिखता। 

परमाध्यक्षीय नेतृत्व

अपने परमाध्यक्षीय काल के नुभव के ारे पूछे जाने पर संत पापा ने कहा, मेरे दस वर्षों के नेतृत्व को देखते हुए, ऐसा लगता है कि मैं चीजों को अलग तरह से कर सकता था, लेकिन मैं वैसा ही करता हूँ जैसा पवित्र आत्मा मुझसे कहता है और अगर मैं ऐसा नहीं करता, तो मैं गलत हूँ।

इसके बाद संत पापा फ्राँसिस ने अपना साक्षात्कार समाप्त किया।

Thank you for reading our article. You can keep up-to-date by subscribing to our daily newsletter. Just click here

01 December 2022, 12:26