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2022.12.03 दिव्यांगों के अंतर्राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर दिव्यांग लोगों के एक समूह के साथ संत पापा फ्राँसिस 2022.12.03 दिव्यांगों के अंतर्राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर दिव्यांग लोगों के एक समूह के साथ संत पापा फ्राँसिस  (VATICAN MEDIA Divisione Foto)

संत पापा : दिव्यांगों को शामिल करना एक नारा मात्र नहीं रहना चाहिए

संत पापा फ्राँसिस दिव्यांग व्यक्तियों के अंतर्राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर दिव्यांग लोगों के एक समूह का स्वागत किया और कहा कि सभी की गरिमा और समावेश को बढ़ावा देकर, कलीसिया अपने पैगम्बरीय मिशन को पूरा करती है।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार 03 दिसम्बर 2022 (वाटिकन न्यूज) : संत पापा फ्राँसिस ने शनिवार 3 दिसंबर को दिव्यांग लोगों के अंतर्राष्ट्रीय दिवस पर दिव्यांग लोगों के एक समूह को वाटिकन में स्वागत करते हुए अपनी प्रसन्नता जाहिर की। संत पापा ने धर्माध्यक्ष जुसेप्पे को परिचय भाषण के लिए और इटली में कलीसियाओं की सक्रिय एवं समावेशी प्रेरितिक कार्रवाई के साथ दिव्यांग लोगों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के लिए भी धन्यवाद दिया।

कलीसिया की एक निरंतर जिम्मेदारी

संत पापा ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा की मान्यता को बढ़ावा देना कलीसिया की एक निरंतर जिम्मेदारी है: यह समय के साथ-साथ प्रत्येक पुरुष और महिला के लिए येसु मसीह की निकटता को जारी रखने का मिशन है, विशेष रूप से जो सबसे नाजुक और कमजोर हैं।

दिव्यांग लोगों का स्वागत करना और उनकी जरूरतों को पूरा करना नागरिक और कलीसियाई समुदायों का कर्तव्य है, क्योंकि "बौद्धिक और शारीरिक रुप से अपंग व्यक्ति भी पवित्र और अविच्छेद्य है।


लोगों के अधिकारों की रक्षा करना पर्याप्त नहीं है

संत पापा याद करते हैं कि जिन लोगों से वे मिले, उन पर ईश्वर की निगाह "कोमलता और दया से ओत-प्रोत थी, विशेष रूप से उन लोगों के लिए जो अपने समय के शक्तिशाली और यहां तक ​​कि धार्मिक अधिकारियों के ध्यान से बाहर थे।" इस कारण से, "ख्रीस्तीय समुदाय उदासीनता को निकटता में और बहिष्कार को अपनेपन में बदल देता है, यह अपने भविष्यवाणी मिशन को पूरा करता है।"

एकता की आध्यात्मिकता को बढ़ावा देना आवश्यक है

संत पापा कहते हैं, "दिव्यांग लोगों को इमारतों और सभा स्थलों तक पहुंच की गारंटी देना, भाषाओं को सुलभ बनाना और भौतिक बाधाओं और पूर्वाग्रहों को दूर करना" हमारा कर्तव्य है, लेकिन इतना पर्याप्त नहीं है: एकता की आध्यात्मिकता को बढ़ावा देना आवश्यक है, ताकि हर कोई अपने अपरिवर्तनीय व्यक्तित्व के साथ एक शरीर का हिस्सा महसूस करे। केवल इसी तरह से प्रत्येक व्यक्ति, अपनी सीमाओं और प्रतिभाओं के साथ, संपूर्ण कलीसिया की भलाई के लिए और पूरे समाज की भलाई के लिए अपना योगदान देने के लिए प्रोत्साहित महसूस करेगा।

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03 December 2022, 15:05