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यूक्रेन  में बमबारी से ध्वस्त मकान यूक्रेन में बमबारी से ध्वस्त मकान  (AFP or licensors)

संत पापा फ्राँसिस: युद्ध में हम सब हार जाते हैं

इतालवी समाचार पत्र "इल फात्तो कोतिदियानो" ने पुस्तक " उन'एन्सिकलिका सुल्ला पाचे इन उक्राइना" ("यूक्रेन में शांति पर एक विश्वपत्र") के लिए संत पापा फ्राँसिस की प्रस्तावना जारी करने का अनुमान लगाया है, जिसमें उन्होंने युद्ध की संवेदनहीनता को दोहराया है। वे कहते हैं "ईश्वर के सबसे पवित्र नाम का अपमान।"

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार 06 दिसंबर 2022 (वाटिकन न्यूज) : संत पापा फ्राँसिस ने यूक्रेन में शांति के लिए अपनी अनगिनत अपीलों को इकट्ठा करते हुए "इल फत्तो कोटिडियानो" अखबार के इतालवी वाटिकन पत्रकार फ्रांसेस्को ग्राना की एक नई किताब "उन'एन्सिकलिका सुल्ला पाचे इन उक्राइना" ("यूक्रेन में शांति पर एक विश्वपत्र") के लिए संत पापा फ्राँसिस ने प्रस्तावना लिखी है। इस नये पुस्तक का प्रकाशन एडिज़ियोनी तेर्रा सांता ने किया है।

किताब

यह आधिकारिक तौर पर 6 दिसंबर को रोम में मोंटेसेंटो में सांता मारिया के महागिरजाघर में, महाधर्माध्यक्ष रिनो फिशिकेल्ला, सुसमाचार प्रचार के लिए गठित परमधर्मपीठीय विभाग के प्रीफेक्ट, महागिरजाघर के रेक्टर, महाधर्माध्यक्ष वाल्टर इनसेरो के साथ; यूक्रेन में वोरज़ेल के सेमिनरी के रेक्टर फादर रुस्लान मायखलकिव; और यूक्रेनी कलाकारों ऑलेक्ज़ांडर क्लेमेंको और सोनिया एटलानोवा की उपस्थिति में प्रकाशित किया जाएगा।

प्रस्तावना में, संत पापा फ्राँसिस ख्रीस्तीय परिप्रेक्ष्य में आशा पर, युद्ध की अन्यायपूर्ण और संवेदनहीनता पर और हर किसी के कर्तव्य पर शांति को सक्रिय रूप से बनाए रखने पर चिंतन किया है।

ख्रीस्तीय परिप्रेक्ष्य में आशा

संत पापा इतालवी लेखक अलेसांद्रो मंज़ोनी द्वारा प्रसिद्ध इतालवी उपन्यास "आई प्रोमेसी स्पोसी" ("सगाई") के एक उद्धरण के साथ शुरू करते हैं: "मैंने कभी भी ईश्वर को नहीं पाया जिसने चमत्कार को शुरु कर पूरा न किया हो।" उन्होंने कहा कि इस वाक्य ने 2025 जयंती वर्ष के लिए उनके द्वारा चुने गए आदर्श वाक्य को प्रेरित किया: "आशा के तीर्थयात्री"

उन्होंने इस संबंध में गौर किया कि संत पापा बेनेडिक्ट सोलहवें ने हमें आशा पर एक अद्भुत विश्व पत्र, ‘स्पे साल्वी’ की पेशकश की है, जिसमें सेवानिवृत संत पापा ने मुक्तिदाता ख्रीस्त में विश्वास के आधार पर प्रतिकूलताओं के बीच ख्रीस्तीय आशा की शक्ति पर प्रकाश डालते हैं और "निश्चितता कि ईश्वर हमें अपने हाथों में लेते हैं और हमें ऊपर उठाते हैं क्योंकि वे नहीं चाहते कि हम जमीन पर रहें।

"ख्रीस्तियों को ख्रीस्त पर अपनी निगाहें टिकाये रखनी चाहिए, जो उन्हें गले लगाते हैं, जो खोए हुए लोगों को करुणा से खोजते हैं। यह कलीसिया की दृष्टि है और हमेशा होनी चाहिए, मसीह की दृष्टि, निंदा करने वाली दृष्टि नहीं।"

युद्ध ईश्वर के नाम का अपमान करता है

इसके आलोक में, संत पापा फ्राँसिस ने जोर देकर कहा कि कोई भी ख्रीस्तीय यूक्रेन में "संवेदनहीन और निंदनीय" युद्ध और हर युद्ध के लिए नैतिक या धार्मिक औचित्य नहीं दे सकता है, जो "ईश्वर के सबसे पवित्र नाम का अपमान करता है।"

"हम ईश्वर के जन जो पुनर्जीवित ख्रीस्त के सुसमाचार का प्रचार करते हैं, हमारा कर्तव्य है कि हम विश्वास के इस सत्य का प्रचार करें: हमारे ईश्वर शांति, प्रेम और आशा के ईश्वर हैं। ईश्वर चाहते है कि हम सब भाई-बहनों की तरह रहें, जैसा कि उसके पुत्र येसु मसीह ने हमें सिखाया। युद्ध की विभीषिका, हर युद्ध की विभीषिका, ईश्वर के परम पवित्र नाम का अपमान करती हैऔर अगर इस तरह के अकथनीय नरसंहार को सही ठहराने के लिए उनके नाम का दुरुपयोग किया जाता है तो वे उन्हें और भी अधिक अपमानित करते हैं।

युद्ध में सबकी हार होती है

द्वितीय विश्व युद्ध के प्रकोप की पूर्व संध्या पर संत पापा पियुस बारहवें के शब्दों का हवाला देते हुए, संत पापा फ्राँसिस ने एक बार फिर चेतावनी दी है कि "युद्ध में, हर कोई हारता है", यहां तक ​​कि "जिन्होंने इसमें भाग नहीं लिया और जो कायरतापूर्ण उदासीनता से खड़े थे" और शांति लाने के लिए हस्तक्षेप किए बिना इस भयावहता को देखा।

वे कहते हैं, "वास्तव में, हम सभी का कर्तव्य, किसी भी भूमिका में, शांति का प्रकाश स्तंभ होना है" और "किसी को भी दूसरी तरफ देखने का अधिकार नहीं है।"

संत पापा फ्राँसिस ने इसके बाद फ्रांसेस्को अतोनियो ग्राना को उनकी अपीलों को इकट्ठा करने के लिए और नौ महीनों के युद्ध में उनके शब्दों को व्यापक प्रतिध्वनि देने के लिए इतालवी समाचार पत्र "इल फात्तो कोतिदियानो" को धन्यवाद दिया।

 टुकड़े-टुकड़े तीसरे विश्व युद्ध का आदी नहीं होना चाहिए

उन्होंने यूक्रेन में शांति के लिए अपनी प्रार्थनाओं को दोहराते हुए प्रस्तावना का समापन किया और एक बार फिर सभी से इस टुकड़े-टुकड़े तीसरे विश्व युद्ध के लिए "आदत न बनने" का आग्रह किया, जिसके बारे में उनका कहना है, "हमारी आँखों के सामने एक पूर्ण विकसित तीसरा विश्व युद्ध बनता जा रहा है।"

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06 December 2022, 15:28