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वाटिकन में दृष्टिबाधित व्यक्तियों के इतालवी संघ के सदस्यों से मिलते हुए संत पापा फ्राँसिस वाटिकन में दृष्टिबाधित व्यक्तियों के इतालवी संघ के सदस्यों से मिलते हुए संत पापा फ्राँसिस  (ANSA)

संत पापा ने समाज में नेत्रहीनों को सहयोग देने हेतु प्रोत्साहित किया

संत पापा फ्राँसिस नेत्रहीन और आंशिक रूप से दृष्टिहीन व्यक्तियों के इतालवी संघ (यूआईसीआई) के सदस्यों से मुलाकात की और उन्हें इतालवी समाज में आशा के संकेत बनने के लिए प्रोत्साहित किया क्योंकि यह कठिन समय का सामना कर रहा है, जैसा कि उनकी संरक्षक संत लूसी ने किया था।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार 13 दिसंबर 2022 (वाटिकन न्यूज) : संत पापा फ्राँसिस ने सोमवार को वाटिकन में नेत्रहीन और आंशिक रूप से दृष्टिहीन व्यक्तियों (यूआईसीआई) के इतालवी संघ के सदस्यों का स्वागत किया, वे 13 दिसंबर को सिसली द्वीप स्थित सिराकूसा के अपनी संरक्षिका संत लूसी का पर्व मनाने की तैयारी कर रहे हैं।

यूआईसीआई 1920 में स्थापित एक गैर-लाभकारी संघ है और वर्ल्ड ब्लाइंड यूनियन (डब्ल्यूबीयू) का सदस्य है, जिसे दृष्टिबाधित लोगों के लिए दुनिया को एक बेहतर और सुरक्षित जगह बनाने और सामाजिक पूर्वाग्रहों को खत्म करने की वकालत करने के लिए और उन्हें समाज में अपना पूर्ण एकीकरण प्राप्त करने के लिए स्थापित किया गया था।

सिराकूसा की संत लूसी का साहस

वाटिकन के संत क्लेमेंटीन सभागार में अपने संबोधन में, संत पापा फ्राँसिस ने संत लुसी के पर्व दिवस के पूर्व संध्या पर मिलने के लिए यूआईसीआई की पसंद की सराहना की और कहा कि यह "इतालवी लोगों की पारंपरिक धार्मिक भावना" व्यक्त करता है।

उन्होंने प्रकाश डाला कि सिराकूसा की लूसी तीसरी शताब्दी की एक ख्रीस्तीय शहीद, जो सम्राट देवक्लेशियन के उत्पीड़न के दौरान अपने विश्वास के लिए मर गई और मरने से पहले एक गैर-ख्रीस्तीय से शादी करने से बचने के लिए उसने अपनी आँखें निकलवा दी थी। उसका उदाहरण हमें याद दिलाती है कि "मानव की सर्वोच्च गरिमा" किसी भी कीमत पर, बिना किसी दोहरेपन या समझौते के, अपने विवेक का पालन करते हुए, सत्य की गवाही देने में निहित है।

"इसका अर्थ है प्रकाश के पक्ष में होना, प्रकाश की सेवा करना, जैसा कि 'लूसिया' (ज्योति) नाम से ही पता चलता है।"

संत पापा ने कहा, “स्पष्ट, पारदर्शी, ईमानदार बनें; खुले, स्पष्ट, सम्मानजनक तरीके से दूसरों के साथ संवाद करें। यह उन वातावरणों में प्रकाश फैलाने में मदद करता है जहाँ हम रहते हैं, उन्हें अधिक मानवीय, अधिक रहने योग्य बनाना।

संत पापा फ्राँसिस ने समाज में "रचनात्मक बल" के रूप में इतालवी संघ की सराहना की, विशेष रूप से इतालवी समाज में, "जो एक कठिन क्षण से गुजर रहा है", यह देखते हुए कि कलीसिया नेत्रहीन व्यक्तियों को सहायता या कभी-कभी करुणा की आवश्यकता वाले लोगों के रूप में नहीं मानता है।

दिव्यांग लोगों को समाज में महत्व दिया जाए

वास्तव में, ख्रीस्तीय दृष्टिकोण से विकलांगता को "बेचारापन या सहायतावाद" के साथ संबोधित नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि "नाजुकता, जिम्मेदारी और एकजुटता के साथ, पूरे समाज और कलीसियाई समुदाय में एक संसाधन के रुप में उनहें देखना चाहिए।"

संत पापा ने जोर देकर कहा कि दृष्टिबाधित लोग, नैतिक सिद्धांतों और नागरिक विवेक के नेतृत्व में, समावेशी समुदायों के निर्माण में सबसे आगे हैं, "जहां हर कोई अपनी सीमाओं और कमजोरियों पर शर्म किए बिना भाग ले सकता है, एक दूसरे का समर्थन करने के लिए दूसरों का सहयोग कर सकता है।"

"हम सभी को एक दूसरे की ज़रूरत है, न केवल शारीरिक कमजोरियों वाले लोगों को। हम सभी को जीवन में आगे बढ़ने के लिए दूसरों की मदद की जरूरत होती है, क्योंकि हम सभी दिल से कमजोर हैं, हम सभी।”

समाज में आशा का संचार करना

इसलिए,  संत पापा ने संघ को "एक और अधिक रचनात्मक एवं सक्रिय शैली के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया, जो विश्वास और आशा को प्रसारित करे।" संत पापा ने संत लूसी का उदाहरण दिया, जो धमकियों और चापलूसी के आगे नहीं झुकी, इसके बजाय, वह जज के सामने हिम्मत से खड़ी हुई जो उससे पूछताछ कर रहा था।

संत पापा ने कहा, "इतालवी समाज को आशा की आवश्यकता है, और यह सब उन लोगों की गवाही से आता है, जो नाजुकता की स्थिति में, खुद को बंद नहीं करते हैं, और न ही खुद के लिए खेद महसूस करते हैं, लेकिन चीजों को सुधारने के लिए दूसरों के साथ मिलकर काम करते हैं।"

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13 December 2022, 15:54