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संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस  (Vatican Media)

संत पापा: काथलिक एक्शन खुले दिल से ध्यान से सुनें

संत पापा फ्राँसिस ने काथलिक एक्शन के अंतर्राष्ट्रीय मंच को एक संदेश भेजा, जिसने अपनी 8वीं सभा के लिए सप्ताहांत में मुलाकात की और नए नेताओं का चुनाव किया। वे लिखते हैं कि, धर्मसभा की भावना को कलीसिया में जड़ें जमाने की जरूरत है इसलिए हमें उसी दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता है।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, मंगलवार 29 नवम्बर 2022 (वाटिकन न्यूज) : संत पापा फ्राँसिस ने हाल के दिनों में रोम में आयोजित काथलिक एक्शन के अंतर्राष्ट्रीय मंच (एफआईएसी) को अपना संदेशभेजा, जिसमें उन्होंने चुने गये नए नेताओं को सबसे पहले बधाई दी। संत पापा ने याद किया कि उनकी यात्रा 30 साल पहले शुरू हुई थी जब कार्डिनल एडवार्डो पिरोनियो ने मंच बनाने की आवश्यकता को देखा था ताकि काथलिक कार्रवाई नए सुसमाचार प्रचार की चुनौतियों में योगदान दे सके, प्रत्येक स्थान और संस्कृति की समृद्धि को एक साथ ला सके। वे लिखते हैं, "आप में से कई ने निर्णायक रूप से इस अंतर्ज्ञान का पालन किया है और समय की कठिनाइयों के बावजूद अपनी क्षमताओं और सुसमाचार की घोषणा करने की इच्छा का योगदान दिया है, क्योंकि पिछले वर्षों में देशों के बीच संचार और मेल-मिलाप का कोई साधन नहीं था।"

कठिन समय और उम्मीदें

आज की दुनिया को देखते हुए, संत पापा ने नोट किया कि कुछ जगहों पर व्यक्तिवाद को पुनर्जीवित किया गया है और देशों एवं लोगों के बीच हिंसा का संकट पैदा किया गया है, जिससे वैश्विक बंधुत्व की आशा कम हो गई है। "फिर भी, कठिन समय चुनौतीपूर्ण हो सकता है और आशा के समय में परिवर्तित हो सकता है," संत पापा कार्डिनल पिरोनियो को उद्धृत करते हुए लिखते हैं जिन्होंने इस जीवन में एक संकेत होने के महत्व के बारे में बात की थी, शून्यता या मृत्यु का संकेत नहीं, बल्कि प्रकाश का संकेत है जो आशा का संचार करता है। संत पापा पुष्टि करते हैं, "आशा कठिनाइयों, असहमति, दैनिक जीवन में आने वाली बाधाओं पर काबू पाने में सक्षम है।"

साथ चलना और संवाद करना

यह इंगित करते हुए संत पापा लिखते हैं कि कलीसिया ऐसे समय से गुज़र रही है जब धर्मसभा की भावना को कलीसिया के रूप में जड़ जमाने की आवश्यकता है। इसका अर्थ है कि हम एक ही दिशा में एक साथ चलते हैं ... ईश्वर को तीसरी सहस्राब्दी की कलीसिया से क्या अपेक्षा है। इसका अर्थ है हम जीवन यात्रा पर हैं और इस यात्रा को एक साथ शुरू करने की जागरूकता को पुनः प्राप्त करना है। इस भावना के साथ संत पापा विभिन्न स्थानीय कलीसियाओं में क्षेत्रीय संघों को प्रोत्साहित करने के लिए काथलिक एक्शन को आमंत्रित करते हैं।

संत पापा लिखते हैं, "एक धर्मसभा की भावना के साथ एक दूसरे को सुनना आवश्यक है, बिना किसी बाधा या पूर्वाग्रह के दूसरों के साथ संवाद करने की कला को फिर से सीखना, विशेष रूप से उन लोगों के साथ भी जो कलीसिया से बाहर हैं, हाशिये पर हैं, हम उनके निकट होना चाहते हैं क्योंकि यही ईश्वर की शैली है।"

सबकी सुनना

संत पापा एफआईएसी के नए नेताओं "सुनने वाले पुरुष और महिला" बनने का आग्रह करते हैं, न कि डेस्क, पेपर और ज़ूम के "नेता", संस्थागत संरचनावाद के प्रलोभन में न पड़ें जो विधियों, नियमों और विरासत में मिली परियोजनाओं से डिजाइन और आयोजन करता है। परियोजनाएं, अतीत में अच्छी और उपयोगी थीं लेकिन शायद आज सार्थक नहीं हैं।

संत पापा कहते हैं कि वे अपने-अपने स्थान पर पुरुषों, महिलाओं, बुजुर्गों, युवाओं और बच्चों को सुनें और उनके द्वारा व्यक्त किये गये मौन क्रंदन को सुनें। संत पापा उन्हें "एक चौकस कान रखने के लिए आमंत्रित करते हैं ताकि उन सवालों के जवाब न दें जो कोई नहीं पूछता या ऐसे मुद्दों पर बहस न करे जिन्हें सुनने में कोई दिलचस्पी नहीं है।" संक्षेप में, उनका सुझाव है कि वे "नएपन के लिए खुले कान और भले समारी के हृदय" से सुनें, साथ ही "समय के संकेतों की धड़कन को भी सुनें।"

आत्मा की आवाज

संत पापा ने रेखांकित किया, "कलीसिया इतिहास के हाशिए पर खड़ी नहीं रह सकती है, अपने मामलों में उलझी नहीं रह सकती। वह "समय के संकेतों को सुनने और देखने के लिए बुलाई गई है, इतिहास को इसकी जटिलताओं और विरोधाभासों के साथ मुक्ति की कहानी बनाने के लिए कहा जाता है। "एक महत्वपूर्ण भविष्यवक्ता कलीसिया होना आवश्यक है जो अपने संकेतों और इशारों से दिखाती है कि सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व, मानवीय संबंध, काम, प्रेम, शक्ति और सेवा के लिए विकल्प हैं और इसलिए आत्मा की आवाज को "सुनना आवश्यक है।"

संत पापा ने अपने संदेश को अंत करते हुए कहा, "हर युग में पवित्र आत्मा हमें नवीनता के लिए खोलती है," कलीसिया को "बाहर जाने की आवश्यकता, घोषित करने की शारीरिक आवश्यकता" को सिखाती है, जबकि सांसारिक आत्मा किसी को केवल अपनी समस्याओं और हितों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित करती है, अपने स्वयं का और अपने समूह का दृढ़ता से बचाव करती है। पवित्र आत्मा हमें मुक्त करती है और "हमें प्राचीन और हमेशा नए पथः गवाही, गरीबी और मिशन पर चलने के लिए आमंत्रित करती है और हमें संसार में भेजती है।"

माता मरिया का अनुसरण करें

अंत में, संत पापा सभी से ‘सक्रिय सुनने’ का आग्रह करते हैं, जो काम को लय देता है और "एक कलीसिया के लिए आवश्यक है कि वह मिशनरी जीवन की सांस ले।" कुँवारी मरियम ने यही किया, "वह सुनती है, उठती है और जाकर सेवा करती है।" संत पापा ने तब काथलिक एक्शन के अंतर्राष्ट्रीय मंच के सदस्यों को अपनी प्रार्थनाओं का आश्वासन दिया ताकि वे "इस समय को अनुग्रह का समय बना सकें और अपने दैनिक जीवन के साक्ष्य द्वारा सुसमाचार की घोषणा कर सकें।"

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29 November 2022, 15:57