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अस्ती के गिरजाघऱ में संत पापा फ्राँसिस अस्ती के गिरजाघऱ में संत पापा फ्राँसिस  (ANSA)

देवदूत प्रार्थना में संत पापा: हम शांति के अकाल में जी रहे हैं

संत पापा फ्राँसिस ने अस्ती में ख्रीस्त राजा के महापर्व पर ख्रीस्तयाग के बाद देवदूत प्रार्थना का पाठ किया और युद्ध के अंत के लिए प्रार्थना की।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

अस्ती, सोमवार 21 नवम्बर 2022 (वाटिकन न्यूज) इतालवी शहर अस्ती में ख्रीस्त राजा के महापर्व पर ख्रीस्तयाग का उत्सव समाप्त करते हुए, संत पापा फ्राँसिस ने गर्मजोशी से स्वागत के लिए पीएमोंट के निवासियों को धन्यवाद देने से पहले देवदूत प्रार्थना का पाठ किया।

शांति के लिए प्रार्थना

संत पापा फ्राँसिस ने वर्तमान समय का वर्णन करते हुए कहा कि हम "शांति के अकाल" में जी रहे हैं। उन्होंने उपस्थित सभी लोगों को यूक्रेन पर विशेष ध्यान दिलाते हुए दुनिया में कई जगहों के बारे में सोचने के लिए प्रोत्साहित किया जो युद्ध से पीड़ित हैं। उन्होंने दो दिन पहले फिलिस्तीन के गाजा में एक शरणार्थी शिविर में लगी दुखद आग की घटना को याद किया, जिसमें कम से कम 21 लोग मारे गए थे, जिसमें 10 बच्चे भी थे। संत पापा ने कहा, "हम पीड़ितों के परिवारों के लिए प्रार्थना करते हैं, ईश्वर स्वर्ग में उन लोगों को प्राप्त करें जिन्होंने अपना जीवन खो दिया है"। संत पापा ने वर्षों के संघर्ष में फंसे लोगों को सांत्वना देते हुए कहा, "आइए, हम कुछ करने में खुद को लगायें और शांति के लिए प्रार्थना करना जारी रखें!"

अस्ती में युवा संत पापा का स्वागत करते हुए
अस्ती में युवा संत पापा का स्वागत करते हुए

युवा दुनिया बदल सकते हैं

इसके बाद संत पापा ने युवा लोगों के बारे में बात की और उन्हें अपना प्यार देते हुए याद किया कि स्थानीय कलीसियाएँ इस महान पर्व के दिन विश्व युवा दिवस मनाती हैं। संत पापा ने कहा कि इस वर्ष की थीम भी  लिस्बन में होने वाले विश्व युवा दिवस के समान है: "मरिया उठी और जल्दबाजी में चली गई।" संत पापा ने कहा कि "मरियम ने ऐसा तब किया जब वह छोटी थी और वह हमें बताती है कि युवा रहने का रहस्य ठीक उन दो क्रियाओं में पाया जाता है, उठना और जाना।" उठने और जाने के लिए, "अपने बारे में सोचते रहने के लिए नहीं, जो अपने मोबाइल फोन के गुलाम नहीं हैं, अपने जीवन को बर्बाद करने और नवीनतम रोचक वस्तुओं के पीछे भागने की बजाय अपना लक्ष्य ऊंचाइयों पर रखते हैं। अपने डर को पीछे छोड़ते हुए आगे बढ़ते हैं। किसी जरुरतमंद की मदद करते हैं।"

अंत में संत पापा फ्राँसिस ने कहा, आज हमें ऐसे युवाओं की आवश्यकता है जो "शांति के सपनों को साकार करते हुए" दुनिया को बदल सकते हैं।

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21 November 2022, 16:05