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अंतर्राष्ट्रीय स्वैच्छिक सेवा के लिए ख्रीस्तीय संगठनों के संघ के लगभग 150 सदस्यों के साथ संत पापा फ्राँसिस अंतर्राष्ट्रीय स्वैच्छिक सेवा के लिए ख्रीस्तीय संगठनों के संघ के लगभग 150 सदस्यों के साथ संत पापा फ्राँसिस   (ANSA)

संत पापा: गरीबों के लिए एफओसीएसआईवी मानव भाईचारा बनाने में मदद करता है

अपनी 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर अंतर्राष्ट्रीय स्वैच्छिक सेवा के लिए ख्रीस्तीय संगठनों के संघ के लगभग 150 सदस्यों से मिलते हुए, संत पापा फ्राँसिस ने दुनिया में विकास और शांति के लिए अपने बहुमूल्य योगदान हेतु उनकी प्रशंसा की।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, सोमवार 14 नवम्बर 2022 (रेई) : संत पापा फ्राँसिस ने सोमवार 14 नवम्बर को वाटिकन के कनसिस्टरी हॉल में अंतर्राष्ट्रीय और स्वैच्छिक सेवा के लिए ख्रीस्तीय संगठनों के संघ (एफओसीएसआईवी) के सदस्यों से मुलाकात की।

संत पापा ने संघ के अध्यक्ष के परिचय भाषण के लिए धन्यवाद और बधाई देते हुए कहा कि संघ की स्थापना की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर उनसे मिलकर खुशी हुई। वे उन 90 संगठनों का प्रतिनिधित्व करते हैं जो दुनिया भर के 80 से अधिक देशों में काम करते हैं।

संत पापा ने कहा कि उनका संघ ‘एफओसीएसआईवी’  गरीबी और हाशिए के सभी रूपों के खिलाफ लड़ाई में, मानव गरिमा की रक्षा के लिए, मानव अधिकारों की पुष्टि के लिए और स्थानीय समुदायों और संस्थानों के विकास को बढ़ावा देने के लिए एक मूल्यवान योगदान प्रदान करता है और यह सब इसे सुसमाचार और कलीसिया के सामाजिक सिद्धांत के अनुरूप आगे ले जाने का प्रयास करता है। वे माता कलीसिया के एक सुंदर संकेत हैं जो भूख और युद्ध के घोटालों के आदी दुनिया में आशा पैदा करते हैं। उनकी गवाही उन लोगों के लिए एक ठोस प्रमाण है जो अब संभावित शांति में विश्वास नहीं करते हैं। अपनी प्रतिबद्धता द्वारा वे दिखाते हैं कि हर छोटा दैनिक टुकड़ा भाईचारे का महान मोसाइक का निर्माण कर सकता है।

एक साथ दुनिया का निर्माण

हम एकजुटता की दुनिया चाहते हैं, जिसमें हर कोई स्वागत महसूस करे और अपने सपनों को छोड़ने के लिए मजबूर न हो। यह एक साधारण इच्छा नहीं है, बल्कि एक बहुत ही विशिष्ट इच्छा है, जिसे आपका आदर्श वाक्य इस प्रकार व्यक्त करता है: "एक दुनिया को एक साथ बनाया जाना चाहिए, सृष्टि का सम्मान करना, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति पूरी गरिमा में खुद को पूरा कर सके!"। इस ऐतिहासिक क्षण में यह एक बहुत ही सामयिक संदेश है: तीसरे विश्व युद्ध की छाया लोगों के लिए भयानक परिणामों के साथ, पूरे राष्ट्रों के भाग्य पर लटकी हुई है। हम नई पीढ़ी के लिए क्या भविष्य बना रहे हैं? यह एक ऐसा प्रश्न है जो हमेशा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर निर्णयों के साथ होना चाहिए।

संत पापा ने कई बेजुबानों की पुकार सुनते हुए तीन उद्देश्यों पर विचार किया जो सभी को चिंतित करते हैं।

संत पापा ने कहा, आप सबसे पहले स्वयंसेवक हैं। आज इसका क्या मतलब है? मुझे ऐसा लगता है कि यह खुलेपन का, हमारे पड़ोसी के प्रति तत्परता का निर्णायक और साहसी संकेत है, चाहे वह निकट हो या दूर। क्योंकि सीमाओं से परे देखना "पड़ोसी" का सामना करने के लिए मन में एक प्रवृत्ति बन जाता है, जो मानवता हेतु प्रेम का प्रमाण है। स्वयंसेवा एकजुटता की गहरी जड़ें जमाने वाले मनोभाव पर आधारित है और हम सभी जानते हैं कि हर महाद्वीप पर कितनी गरीबी, अन्याय और हिंसा मौजूद है। ‘एफओसीएसआईवी’  प्रदर्शित करता है कि प्रत्येक मनुष्य को गले लगाकर "सभी भाई" होना संभव है जिसे प्रभु हमारे जीवन के मार्ग पर रखते हैं। आज हम "अपने भाइयों को व्यक्त करने के लिए, अन्य अच्छे सामरी बनने के महान अवसर का सामना कर रहे हैं, जो घृणा और आक्रोश को भड़काने के बजाय असफलताओं का दर्द अपने ऊपर लेते हैं।" (फ्रातेल्ली तुत्ती 77) इस प्रकार सुसमाचार की शिक्षा दैनिक जीवन बन जाता है।

शांति को बढ़ावा देना

दूसरा उद्देश्य शांति से संबंधित है, जिसे हम यूक्रेन में और कई अन्य देशों में घायल, कुचला हुआ देखते हैं। जब शांति की कमी होती है, तो लोग पीड़ित होते हैं, परिवार विभाजित होते हैं, सबसे नाजुक और कमजोर को अकेला छोड़ दिया जाता है। महीनों से हमने युद्ध के विनाश और मृत्यु को देखा है। एक साथ एक बेहतर भविष्य का निर्माण करने के लिए, एक सम्मानजनक जीवन के लिए शांति एक आवश्यक शर्त है। आप स्वयंसेवक अपने दिलों में शांति का पोषण करने और सभी लोगों के साथ इसे साझा करने के लिए बुलाये गये हैं। यह सबसे महत्वपूर्ण उपहार है जिसे आप अपने साथ कहीं भी ले जा सकते हैं, क्योंकि "दुनिया को खाली शब्दों की जरूरत नहीं है, लेकिन आश्वस्त गवाहों, शांतिदूतों को बिना बहिष्कार या हेरफेर के बातचीत के लिए खुले लोगों की जरुरत है।"

हम दुख के प्रति उदासीन नहीं हो सकते

तीसरा लक्ष्य विकास है। प्रत्येक व्यक्ति को एक सम्मानजनक जीवन के लिए बुनियादी परिस्थितियों की आवश्यकता होती है: शांति, आवास, स्वास्थ्य देखभाल, शिक्षा, कार्य, संवाद और संस्कृतियों और धर्मों के बीच आपसी सम्मान। मानव प्रोत्साहन एक प्रतिबद्धता बनी हुई है जिसके लिए हम उपलब्धता, जोश, रचनात्मकता, पर्याप्त साधनों के साथ खुद को समर्पित करते हैं। केवल एक अभिन्न विकास - व्यक्ति का और उस संदर्भ का जिसमें वह रहता है - एक अच्छे जीवन, व्यक्तिगत और सामाजिक, शांत और भविष्य के लिए खुला होने की अनुमति देता है। लेकिन आइए विचार करें कि आज कितने युवा एक सम्मानजनक अस्तित्व की तलाश में अपनी जमीन छोड़ने को मजबूर हैं; कितने पुरुषों, महिलाओं और बच्चों को एक बेहतर कल की तलाश में अमानवीय यात्राओं और सभी प्रकार की हिंसा का सामना करना पड़ता है; उन लोगों के लिए जो अपने भाग्य पर चर्चा करते हुए या दूसरे रास्ते पर चलते हुए निराशा के मार्गों पर मरते रहते हैं! युद्धों, भूख, उत्पीड़न या जलवायु परिवर्तन से बचने के लिए जबरन पलायन इस युग की महान बुराइयों में से एक है, जिससे हम हर देश में वास्तविक विकास सुनिश्चित करके ही इसकी जड़ से निपट सकते हैं।

संत पापा ने पचास वर्षों में किये गये उनके प्रयास की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे शांति के बुनकर और उदारता और विकास के शिल्पी रहे हैं। मैं आपको दुनिया की सड़कों पर आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करता हूं, अपने भाइयों की देखभाल करते हुए, जैसा कि अच्छे सामारी ने किया था, यह जानते हुए कि "दर्द के सामने उदासीन रहना एक संभव विकल्प नहीं है; हम किसी को जीवन के हाशिये पर नहीं रहने दे सकते।” आप कठिनाइयों या निराशाओं से निराश न हों, लेकिन ईश्वर पर भरोसा रखें।

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14 November 2022, 15:55