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वाटिकन और बहरीन के झंडे वाटिकन और बहरीन के झंडे  (AFP or licensors)

धर्माध्यक्ष मरतिनेल्ली˸ बहरीन में पोप खुले दरवाजोंवाली कलीसिया को पायेंगे

बहरीन में संत पापा फ्राँसिस की प्रेरितिक यात्रा के पहले दिन साऊदी अरेबिया के प्रेरितिक विकर धर्माध्यक्ष पाओलो मारतिनेली ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में कलीसिया दिखलाती है कि कई संस्कृतियाँ शांति से एक साथ रह सकते हैं तथा सुसमाचार के आनन्द का साक्ष्य दे सकते हैं।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

बृहस्पतिवार को जब संत पापा फ्राँसिस बहरीन की प्रेरितिक यात्रा शुरू करनेवाले हैं तब साऊदी अरेबिया के प्रेरितिक विकर धर्माध्यक्ष पाओलो मारतिनेली ओएफएम कैप ने पोप की यात्रा पर अपना विचार प्रस्तुत किया है।  

वाटिकन न्यूज के साथ एक लिखित साक्षात्कार में इताली मूल के धर्माध्यक्ष ने पोप की यात्रा के अंतरधार्मिक वार्ता के आयाम पर प्रकाश डाला है, जहाँ पोप वार्ता के लिए बहरीन मंच में भाग लेंगे। मंच में करीब 200 धार्मिक नेता भाग लेंगे जिनका उद्देश्य है शांति को बढ़ावा देना।

प्रश्न ˸ संत पापा फ्राँसिस अबुधाबी में 2019 में यात्रा करने के बाद जल्द ही खाड़ी देश में वापस प्रेरितिक यात्रा करने लौट रहे हैं। इस क्षेत्र के काथलिक इस यात्रा से क्या उम्मीद कर रहे हैं?   

उत्तर ˸ खाड़ी में रहनेवाले सभी काथलिकों के लिए संत पापा फ्राँसिस की यह दूसरी यात्रा एक महान अवसर है। फरवरी 2019 में अबुधाबी की प्रेरितिक यात्रा ने पहले ही आशा का एक तेज झोंका लाया है। मानव बंधुत्व पर दस्तावेज में संत पापा फ्राँसिस और अल अजहर के ग्रैंड ईमाम अहमद अल तायेब ने जो हस्ताक्षर किये वह विभिन्न धर्मों के लोगों के बीच वार्ता हेतु मील का पत्थर है। इस दस्तावेज ने अधिक मानवीय एवं भाइचारापूर्ण विश्व के निर्माण में एक साथ सहयोग देने के लिए भी प्रोत्साहित किया है। पोप की खाड़ी में यात्रा विभिन्न लोगों एवं धर्मों के सकारात्मक सहअस्तित्व को गहरा करने के लिए प्रेरणा है तथा शांति निर्माता बनने का प्रोत्साहन है।

यह अंतरधार्मिक वार्ता का एक नया कदम है। एक ओर मुलाकात, विभिन्न आध्यात्मिकताओं एवं धार्मिक परम्पराओं को माननेवाले लोगों को जानने का उत्तम अवसर है ताकि हम क्षेत्र के विभिन्न धर्मों के प्रति पूर्वाग्रह एवं संकीर्णता से मुक्त हो सकें, वहीं दूसरी ओर वार्ता का आह्वान मौलिक मानवशास्त्रीय अनुभव करना है जो मानवीय वास्तविकता में विभिन्न धर्मों के लोगों के बीच संवाद को बढ़ावा देने में मदद देता है। मानवीय सच्चाई में, सार्थकता के सवाल, प्रतिदिन के संबंधों, कार्यों, प्रेम, जीवन और मौत में हम एक समान है। अलग तरह के लोगों से मुलाकात हमें अपने ही धर्म के नये आयामों को दिखाता और बतलाता है।     

इस दृष्टिकोण से बहुत सारे खाड़ी देशों में शांति पूर्ण सहअस्तित्व का निर्माण करना संभव है जिसके द्वारा एक-दूसरे के मूल्यों और शांति के दृष्टिकोणों को साझा किया जा सकता है। दुनिया की स्थित सचमुच चिंताजनक है लेकिन खाड़ी देश में पोप की यात्रा हमें नहीं डरने और विविधता में एक साथ आकर अच्छाई को बढ़ावा देने एवं उसकी रक्षा करने हेतु प्रेरित कर रही है।

प्रश्न˸ अरेबिया की कलीसिया के बारे क्या बतला सकते हैं जहाँ कई काथलिक और अधिकांश पुरोहित बाहर के हैं? यह आयाम किस तरह अनुठा है?

उत्तर ˸ खाड़ी देशों में उपस्थित कलीसिया एक आप्रवासी कलीसिया है। लोकधर्मी, धर्मसमाजी और पुरोहित सभी विभिन्न देशों और संस्कृतियों के हैं। रीतियाँ भी अलग -अलग हैं। कलीसिया की छवि विभिन्न लोगों के द्वारा ईश प्रजा की छवि है। चुनौती है, ख्रीस्त के शरीर की एकता के वरदान को बहुरूपता में जीना।

फिलीपींस, भारत, लेबनान और कई देशों से पुरोहित एक खास पुरोहित समुदाय का निर्माण करते हैं और वे न केवल अपने देश के लोगों बल्कि यहाँ रहनेवाली ईश्वर की सारी प्रजा की सेवा करने के लिए बुलाये जाते हैं। कलीसिया की रीतियों का बहु रूप में होना, इसकी विशेषता एवं मूल्य है।  

मैं मानता हूँ कि ये विशेषताएँ इस कलीसिया को विश्वव्यापी कलीसिया में महत्वपूर्ण बनाती हैं। ये एक ही साथ किस तरह एक-दूसरे से एकजुट और एक दूसरे से पृथक हो सकते हैं। यहाँ विश्वव्यापी कलीसिया को आसानी से अनुभव किया जा सकता है। हमारा समाज बहुत अधिक मिस्रित है, और कलीसिया को चाहिए कि सहअस्तित्व के उदाहरण के रूप में एकता एवं विविधता की सुन्दरता को दिखलाये।

इसके अलावा, यह एक अल्पसंख्यक कलीसिया है, क्योंकि हम एक बड़े मुस्लिम बहुल देश में रहते हैं। देश में अल्पसंख्यक होने के नाते हमें सादगी के साथ विश्वास को जीने में मदद मिलती है, अनिवार्यता का लक्ष्य रखते हुए, खुद को सुसमाचार के अच्छे सामाजिक जीवन का साक्ष्य देना पड़ता है और किसी भी प्रकार के धर्मांतरण से बचने में मदद मिलती है।

प्रश्न ˸ आपके प्रेरितिक भिखारियेट में लोगों के विश्वास को आप किस तरह व्यक्त करना चाहेंगे? विश्वास उनके दैनिक संघर्ष में किस तरह मदद देता है?

सबसे पहले मैं कहना चाहूँगा कि खाड़ी में रहनेवाली ईश प्रजा जागरूक है, वह जवान है और बहुत सक्रिय है। लोग काफी संख्या में गिरजा जाते हैं और खुशी से मिस्सा पूजा में भाग लेते हैं। मैं कई स्वयंसेवकों को देखता हूँ जो पल्ली में खासकर, धर्मशिक्षा देने के लिए तत्पर रहते हैं।  

लेकिन प्रेरिताई के लिए मेरी बड़ी चिंता है विश्वासियों को विश्वास में बढ़ने में मदद देना और हम कलीसिया में जिसको जीते हैं उसे अपने दैनिक जीवन में कैसे उतारें, उसे समझना। हमें सीखना होगा कि ख्रीस्तीय वे ही हैं जो अपने दैनिक जीवन में विश्वास के रहस्य को जीते हैं। इस अर्थ में हमें एक अभिन्न विश्वास बनाना चाहिए जो दैनिक रिश्तों में, प्यार में और स्वीकृति में व्यक्त होता है। कलीसिया से जुड़े होने की भावना को बढ़ाना महत्वपूर्ण है।

आप्रवासी होने में अपने साथ स्वीकृति, पहचान और रिश्ते के लिए अनुरोध की भावना आती है। अतः कलीसिया को सभी के लिए खुला होना चाहिए। यह दैनिक जीवन की सादगी में सुसमाचार के आनंद, जीवन को अधिक मानवीय और अधिक सुंदर बनाने की विश्वास की क्षमता का साक्षी देने की बात है।

 

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02 November 2022, 16:30