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अति पवित्र मुक्तिदाता को समर्पित धर्मसमाज के सदस्य जो रेडेम्पट्रिस्टस भी कहे जाते हैं, संत पापा फ्राँसिस से मुलाकात की अति पवित्र मुक्तिदाता को समर्पित धर्मसमाज के सदस्य जो रेडेम्पट्रिस्टस भी कहे जाते हैं, संत पापा फ्राँसिस से मुलाकात की  (ANSA)

रेडेम्पटोरिस्टस से पोप ˸ गरीबों की सेवा हेतु अपने मिशन को नवीकृत करें

अति पवित्र मुक्तिदाता को समर्पित धर्मसमाज के सदस्यों को संबोधित करते हुए, संत पापा फ्राँसिस ने मुक्तिदाता मिशनरियों को समय के संकेतों के आलोक में अपने अल्फोन्सियन कैरिज्म पर "पुनर्विचार" करने के लिए प्रोत्साहित किया, और हृदय की कठोरता के खिलाफ चेतावनी दी जो आत्मा के नवीनीकरण की क्रिया में बाधा डालती है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार, 1 अक्तूबर 2022 (रेई) ˸ अति पवित्र मुक्तिदाता को समर्पित धर्मसमाज के सदस्य जो रेडेम्पट्रिस्टस भी कहे जाते हैं, अपने धर्मसमाज की 26वीं महासभा के लिए 11 सितम्बर से 7 अक्टूबर तक रोम में एकत्रित हैं।

चार सप्ताहों की इस सभा में, संत अल्फोंस लिगोरी द्वारा स्थापित धर्मसमाज में अगले 6 वर्षों के लिए दिशा-निर्धारण तथा इसके कार्यान्वयन की निगरानी हेतु अपने नये शासन के चुनाव पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

नया रास्ता अपनाने से न डरें

संत पापा ने महासभा के प्रतिभागियों और रेडेम्पटोरिस्ट परिवार के सदस्यों का अभिवादन किया, खासकर, उन्होंने नये सुपीरियर जेनेरल फादर रोजेरियो गोम्स का स्वागत किया। इस बात पर गौर करते हुए कि "महासभा में भाग लेना कोई धर्मवैधानिक औपचारिकता नहीं है बल्कि पेंतेकोस्त को जीना है जो सब कुछ को नया बना सकता है"(प्रकाशना 21,5) संत पापा ने महासभा द्वारा ली गई विषयवस्तु ˸ पहचान, मिशन, समर्पित जीवन, प्रशिक्षण एवं प्रशासन के महत्व पर प्रकाश डाला, और उन्हें अल्फोंसियन कैरिज्म पर पुनःविचार करने हेतु प्रोत्साहित किया।  

संत पापा ने रेडेम्पटोरिस्ट के सदस्यों को बढ़ावा दिया कि वे नया रास्ता अपनाने एवं "दुनिया के साथ वार्ता करने से नहीं डरें, बल्कि अपनी नजरें येसु पर लगाये रखें, जिन्होंने सेवक का रूप धारण कर अपने आपको खाली कर दिया।"

उन्होंने कहा, "मैं आपको साहसी बनने का प्रोत्साहन देता हूँ, सुसमाचार एवं कलीसिया की धर्मशिक्षा को एकमात्र घेरा मानने के लिए। अपने हाथों को सबसे गरीब लोगों की सेवा में गंदा होने देने और ध्यान नहीं देनेवालों से नहीं डरें।"

हृदय परिवर्तन और संरचना मं बदलाव

उनके कैरिज्म "सभी के लिए ख्रीस्त की मुक्ति को लाने में हर प्रकार की कठिनाई का सामना करने हेतु तैयार", की याद दिलाते हुए संत पापा ने कलीसिया और समर्पित जीवन में नवीनीकरण के महत्व पर जोर दिया ताकि ख्रीस्त के मिशन का प्रत्युत्तर रचनात्मक निष्ठा से दिया जा सके।"  

नवीनीकरण के लिए मन और हृदय परिवर्तन की प्रक्रिया की आवश्यकता है और साथ ही संरचना में बदलाव लाना है। इसके लिए कई बार पुरानी परम्परा एवं संस्कृति – हमारे पुराने जार को छोड़ना पड़ता है, जो दर्द भरा होता लेकिन यह आवश्यक है यदि हम आशा के मिशनरी बनना चाहते हैं।  

आशा के मिशनरी बनना

संत पापा ने चेतावनी देते हुए कहा कि इस संबंध में जो लोग अपनी निश्चितताओं से आसक्त रहते हैं वे हृदय की कठोरता में पड़ने के खतरे में होते हैं जो मानव हृदय में पवित्र आत्मा के कार्यों पर बाधा डालता है।  

"हमें पवित्र आत्मा के नवीनीकरण की क्रिया में बाधा नहीं बनना है, सबसे बढ़कर हमारे हृदयों में और हमारे जीवन में। सिर्फ इसी तरह हम आशा के मिशनरी बन सकते हैं।"  

तीन खंभे

जब मुक्तिदाता धर्मसमाज के सदस्य नवीनीकरण की इस प्रक्रिया को शुरू कर रहे हैं, संत पापा फ्राँसिस ने उन्हें याद दिलाया कि "तीन मूलभूत स्तंभों: ख्रीस्त के रहस्य की केंद्रीयता, सामुदायिक जीवन और प्रार्थना को नहीं भूलना चाहिए।"

"संत अल्फोंसस की गवाही और शिक्षाएँ हमें लगातार प्रभु के 'प्रेम में बने' की याद दिलाती हैं। उसके बिना हम कुछ नहीं कर सकते; उसी में रहकर हम फल प्राप्त कर सकते हैं। सामुदायिक जीवन और प्रार्थना को त्यागना समर्पित जीवन में बाँझपन का द्वार है, कैरिज्म की मृत्यु एवं भाई-बहनों से अपने आपको बंद कर लेना है। इसके विपरीत, नाजरेथ के सभागृह में मुक्तिदाता की घोषणा के अनुसार, ख्रीस्त की आत्मा के प्रति खुलापन, हमें गरीबों के बीच सुसमाचार सुनाने भेजता है। जिसमें संत अल्फोंसस लिगोरी द्वारा स्थापित धर्मसमाज अपना ठोस आधार प्राप्त करता है।

संत पापा ने अंत में कहा कि धर्मसमाज की नवनियुक्त प्रशासनिक ईकाई इस चुनौतीपूर्ण समय में रेडेम्पटोरिस्ट परिवार के संचालन में विनम्रता, एकता, प्रज्ञा और आत्मपरख दिखा सके।

गरीबों को कभी न भूलें

धर्मसमाज को सदा सहायिका माता मरियम के संरक्षण में सिपूर्द करते हुए संत पापा ने रेडेम्पटोरिस्ट मिशनरियों के लिए प्रार्थना की कि वे अपने मिशन में विश्वस्त और दृढ़ बने रहें, सबसे गरीब एवं उपेक्षित लोगों को कभी नहीं भूलते हुए उनकी सेवा करते रहें एवं मुक्ति के सुसमाचार की घोषणा करें।  

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01 October 2022, 16:37