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फ्रांस के कमब्राई धर्मप्रांत के सांसदों एवं महापौरों के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करते संत पापा फ्राँसिस फ्रांस के कमब्राई धर्मप्रांत के सांसदों एवं महापौरों के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करते संत पापा फ्राँसिस  (Vatican Media)

फ्राँसीसी लोक सेवकों से पोप ˸ समाज के वंचित लोगों को हमेशा ध्यान दें

संत पापा फ्राँसिस ने उत्तरी फ्राँस के सांसदों और महापौरों के प्रतिनिधिमंडल को प्रोत्साहन दिया कि वे प्रतिनिधित्व की उस विधि को अपनायें जो लोगों की वास्तविक जरूरतों को उच्च अधिकारियों तक पहुँचाने में मदद देता है तथा उनसे अपील की कि वे समाज के सबसे जरूरमंद लोगों पर अधिक ध्यान दें।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

संत पापा फ्राँसिस ने शुक्रवार को फ्रांस के कमब्राई धर्मप्रांत के सांसदों एवं महापौरों के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की जो वहाँ के महाधर्माध्यक्ष भिंसेंट डोलमन के साथ वाटिकन आये थे।

अपने संदेश में संत पापा ने उनकी रोम यात्रा के पहल की सराहना की, जिसको उन्होंने सभी लोगों की भलाई हेतु उत्तरी फ्राँस के नागरिक और धार्मिक अधिकारियों की आपसी सम्मान एवं सहयोग बढ़ाने की भावना से किया था।

आर्थिक सामाजिक, सांस्कृतिक चुनौतियाँ

संत पापा ने गौर किया कि उनका प्रांत एक समय में कोयले की खानों, एक मजबूत धातुकर्म उद्योग और प्रसिद्ध कपड़ा कारखाने से समृद्ध था, जिसको 19वीं सदी में उद्योग क्रांति के समय विकसित किया गया था। हालांकि क्षेत्र को खानों और फैक्ट्रियों के बंद होने के झटके एवं आर्थिक संकटों के कारण गरीबी का सामना करना पड़ा है।  

संत पापा ने कहा कि आर्थिक चुनौतियों के साथ-साथ, लोक प्रशासकों को अपने क्षेत्र के सामाजिक और सांस्कृतिक आयामों पर भी ध्यान देना है। उन्होंने लोक सेवकों से अपील की कि वे इस बात को ध्यान में रखें कि "व्यक्ति केवल रोटी से नहीं जीता बल्कि उसके लिए अपने मूल की गरिमा भी आवश्यक है जिसे संस्कृति प्रदान करती है, इसप्रकार वे सभी लोगों को अपनी प्रतिष्ठा को याद रखने में मदद कर सकते हैं।"

मतदाताओं की जरूरतों को प्राथमिकता देना  

संत पापा ने जोर दिया कि सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्षेत्र में लोक प्रशासक चाहे किसी भी राजनीतिक कार्य से जुड़े हों, वे अपने आपको "पा सकते" हैं।  

उन्होंने कहा कि "संविधान की महत्वपूर्ण जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए, कई बार लोकाचार के अनुरूप तर्क के पक्ष को दरकिनार कर, जिनका उनके दैनिक जीवन से कम लेना-देना है, लोक सेवक, अपना चुनाव करनेवालों की सेवा करने की तत्परता दिखा सकते हैं जिन्होंने उन पर भरोसा रखा है।"   

"लोकतांत्रिक एवं प्रतिनिधित्व पद्धति के द्वारा वे उच्च अधिकारियों का ध्यान, किसी विचारधारा या मीडिया के दबाव से दूर, उस क्षेत्र के लोगों की आकांक्षाओं और वास्तविक जरूरतों की ओर खींच सकते हैं।"  

आप्रवासियों एवं विकलांग लोगों का स्वागत

पोप फ्राँसिस ने सार्वजनिक प्रशासकों को विशाल सामाजिक क्षेत्र में उनके काम को प्रोत्साहित करने के लिए दो शब्दों का प्रस्ताव दिया : स्वागत और देखभाल।

उन्होंने आप्रवासियों, विकलांग लोगों सहित सबसे वंचित लोगों का स्वागत करने के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि उन्हें अपने जीवन को सुविधाजनक बनाने के लिए अधिक सुविधाओं की आवश्यकता है, उनके प्रियजनों के लिए, और सबसे बढ़कर, उनके प्रति सम्मान प्रदर्शित करने के तरीके के रूप में।

उन्होंने आग्रह किया कि समावेशन प्रावधान लोगों को नौकरी पाने में मदद दे क्योंकि यह अब पहले से कहीं अधिक आवश्यक है, प्राथमिक लक्ष्य के रूप में काम तक पहुंच निर्धारित करना जरूरी है।

बुजूर्गों की देखभाल

देखभाल के संबंध में संत पापा ने जोर दिया कि नर्सिंग होम में बुजूर्गों तथा उन लोगों को विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए जो अपने जीवन के अंतिम समय में हैं।  

"देखभाल करनेवालों को स्वभाव से ही सेवा और राहत प्रदान करने की बुलाहट प्राप्त होती है, वे हमेशा चंगाई प्रदान नहीं कर सकते लेकिन हम उन्हें अपने रोगियों को मारने के लिए नहीं कह सकते। यदि हम तर्कसंगत बतला कर मारने लगते हैं, तो हम अधिक लोगों को मारने लगेंगे।   

संत पापा ने आशा व्यक्त की कि इस तरह के आवश्यक मुद्दों पर, "जीवन को उसके स्वाभाविक अंत तक ले जाने के लिए सत्य पर वाद-विवाद किया जा सकता है।"

सभी के समग्र विकास के लिए कार्य करना

अपने संबोधन का समापन करते हुए, संत पापा ने प्रसन्नता व्यक्त की कि लोक सेवक कुछ मुद्दों पर कलीसिया के संदेश पर रुचि रखते हैं और अपने मातदाताओं की सेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के माध्यम से अपनी भूमिका के बारे में जागरूक रहते हैं।

"ख्रीस्त में अपने विश्वास के आधार पर, जो सबसे गरीब बने," उन्होंने समाज में सबसे अधिक परित्यक्त लोगों के अभिन्न विकास हेतु कलीसिया की मदद का आश्वासन दिया।

संत पापा ने कहा, "आपके साथ कलीसिया आप्रवासियों, बुजूर्गों और बीमार लोगों तक पहुँचना चाहती है, दूसरे शब्दों में उन लोगों तक पहुँचना चाहती है जो पीछे छूट गये हैं, जिनकी सबसे बड़ी गरीबी है, बहिष्कार और अकेलापन।"

अंततः संत पापा ने सांसदों एवं महापौरों के प्रतिनिधि मंडल को आशीष प्रदान की एवं ईश्वर से उनके क्षेत्र की सामान्य भलाई के लिए उनकी परियोजनाओं और पहलों को प्रेरित करने और उनके कार्यान्वयन में उनकी सहायता करने हेतु प्रार्थना की।

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22 October 2022, 15:49